International Tiger Day 2022: ममता की मिसाल बनी T- 28, जानकार भी हैरान, अनाथ शावकों की मां बनी बाघिन
विश्व बाघ दिवस पर तमाम खबरों के बीच हम आपको ऐसी बाघिन के बारे में बता रहे हैं,जो ममता की मिसाल बन चुकी है।
रायपुर, 29 जुलाई। विश्व बाघ दिवस पर तमाम खबरों के बीच हम आपको ऐसी बाघिन के बारे में बता रहे हैं,जो ममता की मिसाल बन चुकी है। छत्तीसगढ़ के गुरुघासीदास टाइगर रिज़र्व से लगे संजय डुबरी टाइगर रिज़र्व में एक ऐसी बाघिन है,जो अनाथ हो चुके नन्हे बाघों को पाल रही है। वन्य प्राणी विशेषज्ञ अचंभित हैं,क्योंकि इससे पहले किसी बाघिन का दूसरे के शावकों को अपनाये जाने का मामला शायद ही देखा गया है ,इसलिए बाघ की प्रवृति पर अब तक के अनुभव के आधार पर इसे इस प्रकार का दुनिया में दुर्लभ मामला माना जा रहा है।

बहन की हुई मौत,तो मौसी बनी मां
अनुभव के आधार पर यह माना जाता रहा है कि कोई बाघिन अपने ही बच्चों के लिए ममता रखती है। किसी दूसरी बाघिन के गर्भ से जन्मे शावकों को अपने परिवार का सदस्य नहीं मानती है, लेकिन बड़े-बड़े शोधकर्ताओं की छत्तीसगढ़ के गुरु घासीदास टाइगर रिजर्व से जुड़े संजय डुबरी टाइगर रिजर्व में पहुंचकर यह धारणा बदल जाएगी। यहां पर टी 28 नाम की बाघिन अपनी बहन के बच्चों को पाल रही है। बताया जा रहा है कि इसी साल मार्च के महीने में टी - 18 नाम की बाघिन की मौत हो गई थी,जिससे उसके 4 नन्हे शावक अनाथ हो गए। कुछ दिनों बाद ही मां पर आश्रित एक शावक की मौत हो गई,तब बाकी के 3 शावकों को टी-28 नाम की बाघिन ने अपना लिया। मृत बाघिन और शावकों की मां बनी बाघिन बहने थी।

टाइगर में भी होती है ममता,लेकिन मामला दुर्लभ
जानकार मानते हैं कि आम आम तौर पर ऐसे मामले काम ही देखने को मिलते हैं,लेकिन ऐसा नहीं है कि यह संभव नहीं है। जानेमाने वन्य जीव विशेषज्ञ संदीप पौराणिक ने वन वन इंडिया को बताया कि ऐसा नहीं है कि बाघ में ममता नहीं होती है। उन्होंने अफ्रीका में घटे एक घटनाक्रम का ज़िक्र करते हुए बताया कि वहां एक बार एक बाघिन ने हिरण के बच्चे को पाला था। जबकि एक बार बाघिन के मृत हो जाने के बाद नर बाघ ने भी शावकों को पाला था। बहरहाल बाघिन की ममता को देखकर वन विभाग के अधिकारी अचम्भित हैं। फ़िलहाल जो भी हो नन्हे शावकों को मां का प्यार मिलने से वन विभाग के अधिकारी बेहद खुश हैं।

छत्तीसगढ़ बढ़े टाइगर
बहरहाल छत्तीसगढ़ में वन विभाग ताजा आंकड़ों के लिहाज से बेहद उत्साहित है,क्योंकि राज्य में बाघों की संख्या बढ़ने के संकेत मिले हैं। बीते 8 वर्षों में बाघों की तादाद सुखद नहीं नहीं रही थी,लेकिन इस बार उम्मीद जागी है। दरअसल साल 2014 में छत्तीसगढ़ के जंगलों में 46 बाघ होने का खुलासा हुआ था, जिसके 4 साल बाद 2018 की रिपोर्ट में बाघ घटकर 19 रह गए थे।माना जा रहा है कि अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस पर केंद्र सरकार की तरफ से जारी होने वाली रिपोर्ट में छत्तीसगढ़ में बाघों की तादाद में 6 की वृद्धि देखने को मिलेगी छत्तीसगढ़ में वाइल्ड लाइफ के पीसीसीएफ पीवी नरसिंह राव, पीसीसीएफ का कहना है कि छत्तीसगढ़ में बाघों को बचाने और संख्या बढ़ाने की हर स्तर पर प्रयास जारी है। टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र से गांवों को शिफ्ट करने की योजना पर भी मंथन जारी है।
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