CG Election 2023: कोंटा सीट पर निर्दलीय प्रत्याशी भी मार देते हैं बाजी, कांग्रेस को सिर्फ 6 बार मिली है हार
Konta Assembly Seat: छत्तीसगढ़ की कोंटा विधानसभा सीट पर पिछले चार बार के चुनावों में यानी लगभग 20 सालों से कांग्रेस का कब्जा है। कवासी लखमा विधायक हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में लखमा ने 6000 से ज्यादा मतों से भाजपा उम्मीदवार को हराया था।
कांग्रेस का गढ़ कही जाने वाली कोंटा विधानसभा सीट पर 1998 से कवासी लखमा जीत रहे हैं। 2018 के चुनाव में उन्हें 35.05 फीसदी वोट मिले थे। अब तक सबसे ज्यादा इस सीट पर 8 बार कांग्रेस ने जीत दर्ज की है और उसमें कवासी लखमा 5 बार विधायक निर्वाचित हुए हैं।

आजाद भारत में पहले आम चुनाव 1952 में हुए थे। अविभाजित मध्यप्रदेश शासन के दौरान कोंटा विधानसभा सीट पर 1957 को पहली बार आम चुनाव हुए। कोंटा विस सीट से जनता पार्टी और भारतीय जनसंघ के उम्मीदवार 1-1 बार विधायक बने हैं वहीं सीपीआई के मनीष कुंजाम दो बार यहां से जीत दर्ज किया है।
इसके अलावा कोंटा विधानसभा सीट से निर्दलीय प्रत्याशियों का भी दबदबा रहा है। 1962 में वेट्टी जोगा और 1980 में जोगिया मुका ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा था और जीत दर्ज की थी।
कोंटा सीट से 6 बार हार चुकी है कांग्रेस
कांग्रेस का गढ़ कही जाने वाली कोंटा सीट पर कांग्रेस को भी हार का सामना करना पड़ा है। 1952 से लेकर 2018 तक कांग्रेस को 6 बार चुनाव में हार मिली है। कोंटा विधानसभा सीट पर निर्दलीय प्रत्याशियों की जीत में बड़ा दिलचस्प वाक्य भी है। दो बार जीत दर्ज करने वाले निर्दलीय प्रत्याशियों ने कांग्रेस के ही उम्मीदवारों को विधानसभा चुनाव में शिकस्त दी है।
1962 के विधानसभा चुनाव में वेट्टी जोगा हड़मा, बतौर निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव में उतरे थे। कांग्रेस के पोडियामी मासा को 2229 मतों से हराया था। इसके बाद 1980 में जोगिया मुका ने कांग्रेस के माड़वी हांदाराम को 1982 मतों से हराया था। इसके अलावा कांग्रेस को 1990 और 1993 के चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था। दोनो बार सीपीआई के मनीष कुंजाम ने शिकस्त दी थी। वहीं 1972 भारतीय जनसंघ के वेट्टी जोगा और 1977 में जनता पार्टी के कारम गोपाल ने कांग्रेस के प्रत्याशी का हराया था।
हार जीत का अंतर
कोंटा विधानसभा सीट पर हार जीत का अंतर काफी कम रहा हैे। सबसे बड़े अंतर से जीत हार की बात करें तो, सबसे ज्यादा मतों से जीतने वाले विधायक कांग्रेस के कवासी लखमा है। इन्होंने 2003 के विधानसभा चुनाव में सीपीआई के उम्मीदवार मनीष कुंजाम को 17398 मतों से हराया था।
वहीं सबसे कम मतों से जीतने का रिकॉर्ड सीपीआई के मनीष कुंजाम के नाम रहा है। 1993 के विधानसभा चुनाव में सीपीआई ने भाजपा के पदाम नंदा को हराया था। इस चुनाव में मनीष कुंजाम को 7451 मत प्राप्त हुए वहीं भाजपा को 7426 वोट मिले थे।












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