मछली पकड़ने के लिए नदी में फेंका जाल, फंस गया समुद्री कछुआ, दंग रह गए मछुआरे
जांजगीर चांपा जिले ग्राम बिर्रा में स्थित बसंतपुर बैराज में मछली पकड़ रहे मछुआरों को एक 60 किलोग्राम कछुआ मिला। बड़े से कछुए का वजन करीब 60 किलो था। ग्रामीणों ने नदी में इतना बड़ा कछुआ कभी नहीं देखा था।
छत्तीसगढ़ के जांजगीर चांपा जिले में बुधवार को नदी में मछली पकड़ने गए कुछ ग्रामीणों के जाल कोई भारी जीव फंस गया। ग्रामीणों ने जाल को खींचा,तो दंग रह गए.उन्होंने एक बड़ा सा कछुआ देखा। उन्होंने इससे पहले इतना बड़ा कछुआ नहीं देखा था। तत्काल वन विभाग को जानकारी दी गई और कछुए को उनके सुपुर्द किया

नदी में वापस छोड़ा
मिली जानकारी के मुताबिक जांजगीर चांपा जिले ग्राम बिर्रा में स्थित बसंतपुर बैराज में मछली पकड़ रहे मछुआरों को एक 60 किलोग्राम कछुआ मिला। बड़े से कछुए का वजन करीब 60 किलो था। ग्रामीणों ने नदी में इतना बड़ा कछुआ कभी नहीं देखा था,इसलिए उसे देखने के लिए भीड़ इकठ्ठा हो गई। इसकी जानकारी पुलिस को दी गई, फिर पुलिस ने वन विभाग से चर्चा करके कछुआ को दोबारा नदी में छोड़ दिया।

समुद्री कछुआ पहुंचा महानदी
वन विभाग के अधिकारियों का कहना था कि यह समुद्री कछुआ है। समुद्र से ही वह महानदी में आ गया है। क्योंकि कछुए की उम्र काफी लम्बी होती है,इसलिए वह काफी लम्बे समय से यात्रा करते हुए नदी में जीना सीख गया है। कछुआ एक संरक्षित जीव है,इसलिए उसे वापस नहीं में छोड़ दिया गया।

सबसे अधिक आयु जीने वाला जीव होता है कछुआ
आपको पता है कि कछुआ धरती का पर एकमात्र ऐसा जीव है, जो सबसे अधिक आयु तक जिंदा रहता है। इस जीव की कुछ प्रजातियां लगभग 150 साल से भी अधिक जीवन जीती हैं।

कवच है सुरक्षा
कछुओं के ऊपरी हिस्से पर एक कठोर कवच होता है, जिससे वह अपने अंगों की बाहरी खतरों से सुरक्षा करता है। किसी भी प्रकार के हमले होने की स्थिति में वह कवच के भीतर चले जाते हैं। नन्हे कछुओं की अच्छी देखभाल की जाए, तो वह काफी लंबी उम्र तक जिंदा रह सकते हैं।
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यह है सबसे बुजुर्ग जीव
मीडिया रिपोर्ट्स में मुताबिक साउथ अटलांटिक ओशन के सेंट हेलेना आइलैंड में रहने वाला जोनाथन नाम का कछुआ दुनिया के सबसे बुजुर्ग प्राणी का है। बताया जा रहा है कि वह 190 साल का है। जबकि भारत के कई हिस्सों में कछुए को लेकर कई प्रकार के दावे किये जाते रहे हैं। आज भी कई ग्रामीण इलाकों के प्राचीन तालाबों में सैकड़ों सालो से कछुओं के होने की बाद कही जाती रही है।
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