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DIWALI में बढ़ी फूलों की डिमांड, गेंदे की खेती से Durg के किसानों की बदली किस्मत, कलकत्ता से खत्म हुई निर्भरता

छत्तीसगढ़ के दुर्ग और बालोद में किसान त्योहारी सीजन के मद्देनजर फुलों की खेती करते हैं। दीपावली के सीजन में गेंदे की बिक्री से किसानों को अच्छा मुनाफा भी होता है। बालोद के जिला मुख्यालय से 3 किलोमीटर दूर ग्राम बघमरा और दुर्ग के ग्राम नगपुरा में किसान फूलों की अच्छी फसल ले रहे हैं। नवरात्रि और दीपावली के पर्व पर छत्तीसगढ़ के फूलों की डिमांड अब अन्य राज्यों में भी हो रही है।

कलकत्ता और महाराष्ट्र से कम हुई फूलों निर्भरता

कलकत्ता और महाराष्ट्र से कम हुई फूलों निर्भरता

छत्तीसगढ़ में पहले कोलकाता जैसे राज्यों से गेंदे की सप्लाई की जाती थी। पश्चिम बंगाल के कोलकाता फूल मंडी से अधिकतर गुलाब, गेंदा जैसे फूलों का निर्यात छत्तीसगढ़ में होता है। कोलकाता से ट्रांसपोर्ट का खर्चा अधिक होने के कारण फूलों की कीमत भी बढ़ जाती थी।अब छत्तीसगढ़ में ही गेंदे की खेती के बाद कलकत्ता से गेंदे की निर्भरता कम हुई है। वहीं अब इन फूलों के दामों में भी कमी आई हैं। अब इसका लाभ सीधे दुर्ग और बालोद के किसानों को मिल रहा है।

हैदराबाद और मध्य प्रदेश से हो रही फूलों की डिमांड

हैदराबाद और मध्य प्रदेश से हो रही फूलों की डिमांड

बालोद जिले के ग्राम बघमरा रोड पर युवा किसान मानवेंद्र पटेल ने गेंदे की फसल ली है। उनके खेतों में पांवर नामक विशेष प्रजाति के गेंदे की खेती की जा रही है। जो वर्ष भर खिलते हैं। किसान मानवेंद्र बताते हैं कि दीपावली पर्व पर हैदराबाद( तेलंगाना) और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों से फूलों की डिमांड आई है। इसकी सप्लाई की जा रही है। अब अन्य राज्यों से बालोद में फूलों की निर्भरता कम हो रही है। सब्जियों की अपेक्षा फूलों की खेती से किसान अच्छा मुनाफा कमा रहें हैं।

दीपावली में होती है गेंदे की डिमांड , 100 रुपये किलो तक होती है कीमत

दीपावली में होती है गेंदे की डिमांड , 100 रुपये किलो तक होती है कीमत

दुर्ग जिले के ग्राम नगपुरा के किसान अनिल साहु बताते हैं कि 1 एकड़ में लगभग 20 से 25 क्विंटल गेंदे के फूलों का उत्पादन होता है। गेंदे की खेती में खास बात यह है कि बीमारी का खतरा कम होता है। सामान्य सीजन में गेंदे की डिमांड कम होती है। लेकिन नवरात्रि और दीपावली में 80 से 100 रुपये प्रति किलो गेंदे की बिक्री बाजारों में की जाती है। थोक विक्रेताओं को 50 से 60 रुपए प्रति किलो तक बेची जाती है। कलकत्ता से आने वाले फूलों की कीमत 150 से 250 रुपये किलो तक होती है। इसके साथ ही परिवहन व्यय का खर्चा अधिक होता है। इसकी खेती से किसान एक एकड़ में लगभग 50 से 70 हजार का मुनाफा ले सकते है।

धान के अलावा फूलों और सब्जियों की हो रही खेती

धान के अलावा फूलों और सब्जियों की हो रही खेती

दुर्ग संभाग में लोग धान की खेती के साथ-साथ फूल और सब्जियों की खेती भी करने लगे हैं। लेकिन फूल की ओर रुझान बहुत ही कम कृषकों का होता है। लेकिन युवा किसानों ने इस क्षेत्र में भी अच्छी शुरुआत की है। दुर्ग जिले के ग्राम मोहलाई, महमरा, नगपुरा, टेमरी, चंदखुरी बेलोदी, डांडेसरा, धमधा, पाटन क्षेत्र में लगभग 400 से अधिक छोटे बड़े किसान 1000 एकड़ में फूलों की खेती ले रहे हैं। बालोद के किसान मानवेन्द्र लगभग 2 एकड़ जमीन पर गेंदे की खेती कर रहें है। इन फूलों की बिक्री के लिए दुर्ग- भिलाई, धमतरी, बालोद जैसे शहरों में इन्हें अच्छा बाजार मिल जाता है।

कोरोना काल में फूलों की खेती हुई थी प्रभावित, फिर लौटे किसान

कोरोना काल में फूलों की खेती हुई थी प्रभावित, फिर लौटे किसान

दुर्ग जिले में कोरोना काल से पहले गुलाब, रजनीगंधा, गेंदा जैसे फूलों की खेती की जा रही थी। बाजार नहीं मिलने के कारण बहुत से किसानो ने इसकी खेती बन्द कर दी थी। इनकी खेती से किसानों को 5 से 15 करोड़ का मुनाफा होता था। लेकिन इस बार किसानो ने फिर से फूलों की खेती को अपनाया है। दुर्ग जिले के कई आदर्श गोठानों में भी फूलों की खेती कर महिला समूहें अच्छी आमदनी कमा रहीं है।

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