टूलकिट मामलाः रमन सिंह और संबित पात्रा को मिली राहत, सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की अपील सुनने से किया इनकार
रायपुर। कांग्रेस टूलकिट मामले में छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह और भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा को थोड़ी राहत मिली है। सुर्पीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ सरकार की अपील सुनने से इनकार कर दिया है। इस अपील में सरकार ने टूलकिट मामले की जांच रोकने संबंधी हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम हाईकोर्ट से इसके शीघ्र निस्तारण का आग्रह करते हैं। मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस एनवी रमना, न्यामूर्ति सूर्यकांत और हिमा कोहली की बेंच में हुई। सुप्रीम कोर्ट में राज्य सरकार की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने पैरवी की। सिंघवी ने कहा कि अगर मैं हाईकोर्ट जाता हूं तो वास्तव में वहां सुनवाई होनी चाहिए।

सिंघवी ने उच्च न्यायालय के आदेश का उल्लेख करते हुए कहा, "इसमें कहा गया है कि याचिकाकर्ता एक राजनीतिक व्यक्ति है। अगर वह एक राजनीतिक व्यक्ति है तो आप तुरंत ऐसे निष्कर्ष पर पहुंच जाएंगे। सिंघवी ने कहा कि उच्च न्यायालय का कहना है, इनके खिलाफ कोई मामला नहीं बनता है। ऐसे में अब मेरे पास वापस जाने के लिए क्या बचा है?' सर्वोच्च न्यायालय की पीठ ने कहा कि अपनी ऊर्जा बर्बाद मत करें, हम हस्तक्षेप करने के इच्छुक नहीं हैं। हाईकोर्ट को इसका फैसला करने दें। हम उनके अवलोकन को देखेंगे।
बता दें कि छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के सिविल लाइन थाना में संबित पात्रा और डॉ. रमन सिंह के खिलाफ गैरजमानती धाराओं में मामला दर्ज है। आरोप है कि इन्होंने कांग्रेस का फर्जी लेटरपैड ट्वीट किया है। वहीं इस आरोप पर संबित पात्रा और रमन सिंह ने कहा था कि पूर्वाग्रह से एफआईआर दर्ज करवाई गई है। वहीं छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को चार हफ्ते में जवाब देने का आदेश दिया है। बता दें कि इस मामले में जेपी नड्डा, स्मृति ईरानी और वीएल संतोष पर भी प्रदेश के अलग-अलग थानों में एफआईआर दर्ज है।












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