CG News: नक्सल प्रभावित इलाकों में प्रचार करने से कतरा रहे प्रत्याशी, कोंटा क्षेत्र में झंडे-बैनर से भी दूरी
CG Election 2023: विधानसभा चुनाव के पहले चरण में बस्तर की सभी 12 सीटों समेत 20 सीटों पर पहले चरण में 7 नवंबर को मतदान होंगे। इधर नक्सलियों के चुनाव बहिष्कार के ऐलान का असर कोंटा विधानसभा क्षेत्र में देखने को मिल रहा है। अंदरूनी इलाकों में जहां कार्यकर्ता प्रचार करने से पीछे हट रहे हैं, वहीं प्रत्याशी भी उन इलाकों तक पहुंचने से कतरा रहे हैं।
इस हाइप्रोफाइल सीट पर प्रत्याशियों का चुनावी अभियान सिर्फ मुख्य सड़कों के किनारे और सुरक्षा बल के कैंपों के आस-पास बसे गांवों में देखने को मिल रहा है। इधर चुनावी माहौल सामान्य रूप से सुकमा, छिंदगढ़, कोंटा व दोरनापाल क्षेत्र के मुख्य इलाकों में ही देखने को मिल रहा है।

इसके पीछे का कारण ये है कि ये इलाके कस्बाई और सड़क से जुड़े हुए हैं। ऐसे में साधारण शब्दों में ये कहा जा सकता है कि जिले की बड़ी बस्तियों में, जहां बड़ी संख्या में लोग रहते हैं, वहीं चुनाव प्रचार चल रहा है।
चुनाव का प्रचार, चुनावी शोरगुल, झंडे-बैनर पोस्टर भी इन्हीं इलाकों में लगे नजर आ रहे हैं। वहीं राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं का फोकस भी इन्हीं जगहों पर है। जिले के अंदरूनी इलाकों में अभी तक प्रचार शुरू नहीं हो सका है। ऐसे में ये आशंका भी जताई जा रही है कि मतदान तक यहां प्रचार जोर नहीं पकड़ पाएगा।
मुख्य सड़क छोड़कर अंदरूनी इलाकों में देखने पर ये सहजता से दिखने लगता है कि चुनावी शोर भी कमजोर होता चला जा रहा है। दोरनापाल से जगरगुंडा वाले इलाके में सड़क पर मौजूद गांवों में गिनती के बैनर-पोस्टर दिख रहे हैं। वहीं अंदरूनी गांवों में न तो झंडे दिख रहे और न ही बैनर। सुरक्षा बलों के कैंपों के आस-पास मौजूद गांवों में इक्का-दुक्का जगहों पर राजनीतिक दलों के झंडे देखने को मिल रहे हैं, वहीं कुछ जगहों पर निर्दलीय प्रत्याशी के बैनर भी देखे गए हैं।
कोंटा विधानसभा के अंदरूनी किसी भी गांव में किसी भी प्रकार का चुनावी शोर देखने को नहीं मिल रहा है। माना जा रहा है कि नक्सलियों के चुनाव बहिष्कार का अघोषित रूप से बड़ा असरहुआ है। लोग चुनावी प्रचार-प्रसार से खुद को दूर रख रहे हैं। जगरगुंडा के एक युवक ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि जगरगुंडा के सारे लोग चुनाव के प्रचार में हिस्सा नहीं ले रहे हैं। चूंकि ये गांव सड़क से लगा हुआ है और यहां पुलिस कैंप भी है। ऐसे में यहां थोड़ा-बहुत माहौल दिख रहा है। जबकि जगरगुंडा से 5 से 10 किमी दूर बसे गांवों में तो चुनावी शोरगुल गायब है।
इधर धुरनक्सल प्रभावित इलाकों में प्रत्याशियों के प्रचार से कतराने को लेकर अब तक कोई घोषित बयान नहीं आया है, लेकिन इस बार निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मनीष कुंजाम सिर्फ उन्हीं गांवों व इलाकों तक पहुंच रहे हैं, जो सीधे सड़क से जुड़े हुए हैं। इन गांवों में प्रत्याशियों ने कुछ सभाएं व नुक्कड़ सभाएं की हैं।
इधर कोंटा विधानसभा में इस बार 36 मतदान केंद्रों को शिफ्ट किया गया है। शिफ्टिंग के पीछे का कारण मतदान केंद्रों का अतिसंवेदनशील होना बताया जा रहा है। जिन मतदान केंद्रों को शिफ्ट किया गया है, वहां वोटिंग का प्रतिशत बेहद कम होने की आशंका बनी हुई है। हालांकि प्रशासन ने इन स्थानों पर शिफ्टिंग जैसे काम ही इसलिए करवाया है, ताकि वोटिंग आसानी से हो सके और लोग निर्भिक होकर मतदान कर सकें।












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