कांग्रेस के मिशन गुजरात की राह में छत्तीसगढ़ बन सकता है रोड़ा, जानिए कैसे ?
Chhattisgarh may become an obstacle in the path of Congress's mission Gujarat, know how?
रायपुर, 07 जून। देश के कई राज्यों से सत्ता गंवाने के बाद कांग्रेस आगामी गुजरात विधानसभा चुनाव की तैयारियां शुरू कर दी हैं। मिली जानकारी के मुताबिक छत्तीसगढ़ के जनघोषणा पत्र की तर्ज पर ही पार्टी गुजरात के चुनावी मैदान में उतर सकती है। हाल ही में गुजरात कांग्रेस के प्रभारी रघु शर्मा ने छत्तीसगढ़ के कांग्रेस का जनघोषणा पत्र तैयार करने वाले सूबे के स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव के साथ लम्बी गुफ्तगू की थी। गुजरात चुनाव में कांग्रेस छत्तीसगढ़ की सफलता को भले ही भुनाना चाहे, लेकिन हसदेव अरण्य के मुद्दे ने इस चाल को उलट कर रख दिया है। यानि छत्तीसगढ़ में जंगलो की कटाई का मुद्दा कांग्रेस को नुकसान पहुंचा सकता है।

छत्तीसगढ़ मॉडल अपनाना चाहती है गुजरात में कांग्रेस
इस साल के अंत में गुजरात विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। कांग्रेस चाहेगी कि वह किसी भी स्थिति में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गृह राज्य पर विजय हासिल करे। कांग्रेस के पास जनता के बीच बताने के लिए केवल छत्तीसगढ़ और राजस्थान सरकार की उपल्बधियां ही हैं।
हाल ही में कांग्रेस के गुजरात प्रभारी रघु शर्मा ने रायपुर पहुंचकर छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने घोषणा पत्र के संबंध में लम्बी चर्चा की थी। सिंहदेव ने 2018 के विधानसभा चुनाव के लिए उन्होंने ही जनघोषणा पत्र तैयार करने में सबसे अहम भूमिका निभाई थी। घोषणापत्र में शामिल किसानों को कर्ज माफ़ ,बिजली बिल हाफ जैसे वादों के कारण ही कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ में भारी भरकम बहुमत पाकर सरकार बनाई थी।

सिंहदेव ने खोला राज,जताई चिंता
छत्तीसगढ़ के सरगुजा में कोयला खनन के लिए जंगलों के काटे जाने के विरोध में खड़े हुए हसदेव अरण्य बचाओ आंदोलन को व्यापक स्तर पर जनसमर्थन मिलने के बाद जनता के बीच भूपेश बघेल सरकार की इमेज को नुकसान पहुंचा है। छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव सरगुजा रियासत के महाराज और अंबिकापुर के विधायक भी हैं। लिहाजा उनका अपनी ही सरकार के खिलाफ खड़े हुए आंदोलन में स्थानीय हितों के पक्ष में खड़े होना मजबूरी के तौर पर देखा जा रहा है।
अंबिकापुर के हरिहरपुर गांव चल रहे हसदेव बचाओं आंदोलन में प्रदर्शनकारियों के बीच जाकर टी एस सिंहदेव ने कहा है कि कुछ दिनों पहले गुजरात के कांग्रेस नेता ने उन्हें बताया था कि छत्तीसगढ़ के हसदेव अरण्य आंदोलन का असर गुजरात में भी देखा जा है। सिंहदेव के कहने का मतलब था कि यदि कांग्रेस को गुजरात में चुनाव लड़ना हैं, तो छत्तीसगढ़ के आदिवासियों के आंदोलन को समर्थन देना होगा।

आप घेर सकती है कांग्रेस को
हाल ही में पंजाब विधानसभा चुनाव में जीत हासिल करने वाली आम आदमी पार्टी छत्तीसगढ़ और गुजरात के आगामी विधानसभा चुनाव को साधने में लग चुकी है। आम आदमी पार्टी ने छत्तीसगढ़ में जारी हसदेव बचाओं अभियान के मुद्दे को लपक लिया है। आप के राष्ट्रीय नेता गोपाल राय और संजीव झा लगातार छत्तीसगढ़ के दौरे कर रहे हैं। इस दौरान छत्तीसगढ़ इकाई के नेताओ के साथ भूपेश बघेल सरकार को हसदेव अरण्य के मुद्दे पर जमकर घेर रहे हैं। इसीलिए यह बात लगभग तय है कि आप अपने गुजरात मिशन के दौरान कांग्रेस की दावेदारी को कमजोर करने के लिए छत्तीसगढ़ के मुद्दों को उठाएगी।

क्या है मामला ?
छत्तीसगढ़ के सरगुजा में हसदेव के जंगलों को बचाने आंदोलन कर रहे स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार ने फर्जी ग्राम सभा आयोजित करके ग्रामीणों की सहमति के बिना कोयला खनन की मंजूरी का प्रस्ताव पास किया था।केंद्र सरकार ने कांग्रेस की राजस्थान सरकार को हसदेव अरण्य क्षेत्र के परसा कोल ब्लॉक आबंटित की है। इसके लिए राजस्थान सरकार ने अडानी समूह के साथ एमडीओ भी साइन किया है।
छत्तीसगढ़ की भूपेश बघेल सरकार ने मोदी सरकार की तरफ से अनुमति प्रदान किए जाने के बाद इस प्रोजेक्ट को वन स्वीकृति प्रदान नहीं की थी,लेकिन हाल ही में राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के छत्तीसगढ़ दौरे के बाद सीएम भूपेश बघेल ने परसा कोल ब्लॉक में कोयला खनन के लिए हरी झंडी दे दी थी। जिसके बाद कांग्रेस सरकार पर आदिवासी विरोधी होने के आरोप लग रहे हैं।

राहुल गांधी से पूछे जा रहे हैं सवाल
हाल में कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी लंदन की कैंब्रिज यूनिवर्सिटी गए थे, जहां उनसे एक छात्रा ने हसदेव अरण्य को बचाने के लिए आदिवसियो के आंदोलन पर उनकी राय जाननी चाही ,जिसपर राहुल गांधी ने कहा कि यह विषय उनके संज्ञान में है,इसपर वह पार्टी के भीतर बात कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह आदिवासियों की मांगो से सहमत हैं। कुछ ही सप्ताह में कांग्रेस पार्टी हसदेव के मुद्दे पर समाधान कर देगी,लेकिन इसके बावजूद छत्तीसगढ़ सरकार के वन विभाग ने कोयला खदान शुरू करने के लिए हसदेव के जंगलो में पेड़ो की कटाई शुरू कर दी थी।












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