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Chhattisgarh: कोरबा में मिला हरे रंग का दुर्लभ सांप, ग्रीन कीलबैक सर्प की कीमत जानकर रह जाएंगे हैरान

कोरबा जिले के सिरकी गांव में दुर्लभ प्रजाति का सुंदर और आकर्षक ग्रीन कीलबैक सर्प पाया गया है। जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत लाखों में है। सर्पमित्रों द्वारा इसका रेस्क्यू कर जंगल में छोड़ दिया गया।
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छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में आपाने अब तक बड़े कोबरा निकलने की खबरे देखी होंगी लेकिन इस बार सर्प की बहुत ही सुंदर प्रजाति पाई गई है। जिले से 35 किलोमीटर दुर सिरकी गांव में एक किसान के घर पर पाया गया है। हरे रंग के बेहद आकर्षक और दुर्लभ प्रजाति का सांप दिखने में तो सुंदर है। लेकिन उतना ही फुर्तीला भी है।

नदी और पहाड़ों के कारण नजर आते है कई प्रजाति के सांप

नदी और पहाड़ों के कारण नजर आते है कई प्रजाति के सांप

जिला मुख्यालय से 35 किमी दूर ग्राम सिरकी में एक ग्रामीण कैलाश ने घर के पास एक दुर्लभ प्रजाति का सांप देखा । कैलाश ने इस सांप को देखते ही इसकी सूचना आरसीआरएस संस्था के सदस्य शेषबन गोस्वामी को दी। संस्था के सदस्यों ने सांप को सुरक्षित रेस्क्यू किया। ग्रामीण कैलाश का घर नदी और पहाड़ों के बीच में बसा हुआ है। जिसके चलते कई प्रजाति के सांप यहां नजर आते हैं लेकिन इस आकर्षक सर्प को देखकर कैलाश भी अचंभित रहे गए।

ग्रीन कीलबैक प्रजाति के सर्प को टीम ने किया रेस्क्यू

ग्रीन कीलबैक प्रजाति के सर्प को टीम ने किया रेस्क्यू

संस्था सदस्य शेषबन गोस्वामी ने सर्प के रेस्क्यू के लिए संस्था के रेस्क्यू टीम के सदस्य रघुराज सिंह को बुलाया। रघुराज सिंह ने पहले सर्प को देखा और तुरंत अपने टीम के सदस्यों के साथ रेस्क्यू करना शुरू किया। टीम के सदस्यों ने बताया कि यह एक ग्रीन कीलबैक सांप है। जो बहुत ही दुर्लभ प्रजाति है। जिसे सदस्यों ने बड़े ही सावधानी से रेस्क्यू किया। रेस्क्यू के बाद वनविभाग कटघोरा मंडल रेंजर ऑफिसर सुखदेव सिंह मरकाम और चौकीदार विदेशी यादव आरसीआरएस टीम और एनटीपीसी के उपस्थिति मे पंचनामा तैयार कर सांप को सुरक्षित जंगल में छोड़ दिया गया।

दुर्लभ प्रजाति का सर्प है बेशकीमती

दुर्लभ प्रजाति का सर्प है बेशकीमती

नोवा नेचर टीम के सदस्य अजय भारती के अनुसार यह सांप हरी घास, झाड़ियों में रहता है और बेहद ही फुर्तीला होता है। यह इंसान की आहट को जल्दी भांप जाता है। फुर्तीला होने के कारण पलक झपकते ही छिप जाता है। इसका भोजन मेंढक, चूहे होते है। बताया जा रहा है कि यह सांप जहरीला नहीं होता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी काफी कीमत 5 से 10 लाख रुपये तक है। यह दुर्लभ प्रजाति का सांप है। यह सांप एशिया में पाया जाता है, लेकिन अब छत्तीसगढ़ के जंगल क्षेत्रों में भी नजर आने लगा है।

किरंदुल के मनोज ने 8 ग्रीन कीलबैक किया रेस्क्यू

किरंदुल के मनोज ने 8 ग्रीन कीलबैक किया रेस्क्यू

सात महीने पहले छत्तीसगढ़ किरंदुल में इसी तरह का ग्रीन कीलबैक रेस्क्यू किया गया था। बचेली व किरंदुल में 7 ग्रीन कीलबैक सांप को बचाने के बाद एक कॉलोनी से मनोज कुमार हालदार ने दुर्लभ सांप का रेस्क्यू किया था। आमतौर पर ये सांप भारत में महाराष्ट्र और बांग्लादेश, म्यांमार व पाकिस्तान में पाया जाता है। ग्रीन कीलबैक सांप का वैज्ञानिक नाम रैब्डोफिस प्लंबिकलर है।

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English summary
Chhattisgarh: Rare green colored snake found in Korba, you will be surprised to know the price of green keelback snake
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