छत्तीसगढ़: IAS अवनीश शरण ने पिता के साथ किचन में पकाया खाना, Social Media पर लोगों को काफी पसंद आया अंदाज़
Chhattisgarh: आईएसएस अफसर अवनीश शरण छत्तीसगढ़ कैडर में तैनात 2009 बैच के आईएएस अफसर हैं, वह सोशल मीडिया में काफी एक्टिव नज़र आते हैं।
IAS Awnish Sharan: छत्तीसगढ़ सरकार के आला अफसर आईएस अवनीश शरण सोशल मीडिया में काफी एक्टिव नज़र आते हैं। जनता के बीच लोकप्रिय होने की वजह से उनकी फैन फॉलोविंग भी काफी अच्छी है। छत्तीसगढ़ के तकनीकी शिक्षा संचालनालय में संचालक की भूमिका का निर्वहन कर रहे अवनीश शरण कई जिलों में कलेक्टर रह चुके हैं। सोशल मीडिया पर उनकी पिता के साथ फोटो काफी पसंद की जा रही है।

पिता के साथ क्या पका रहे हैं IAS अवनीश शरण ?
कुछ दिनों पहले अवनीश शरण ने अपने पिता के साथ किचन में काम करते हुए एक फोटो शेयर की थी। इस फोटो पर उनके फॉलोअर्स के रिएक्शन देखने योग्य हैं। खासकर उनके साथी सभी को आईएएस अधिकारीयों को उनक यह रूप बहुत पसंद आ रहा है। माना जाता है कि आईएएस अफसरों का दिन बेहद व्यस्त होता है और वह अपने परिजनों के लिए भी समय नहीं निकाल पाते हैं। ऐसी स्थिति में एक बिज़ी आईएसएस अफसर की पिता के साथ किचन खाना बनाते नज़र आ रही जोड़ी को लोग बेहद पसंद कर रहे हैं।

सफलता के पीछे की कहानी बड़ी प्रेरक
अवनीश शरण छत्तीसगढ़ कैडर में तैनात 2009 बैच के आईएएस अफसर हैं। कई सरकारी नौकरी की कई प्रतियोगी परीक्षाओं में फेल हो गए थे। उन्होंने हाल ही में अपने ट्विटर हैंडल पर अपने 10वीं से लेकर ग्रेजुएशन तक का नंबर शेयर करके निराश होने वाले बच्चों को मोटिवेट करने का प्रयास किया था। उन्होंने बच्चों को बताया था कि वह 10वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा में थर्ड डिवीजन यानी तृतीय श्रेणी से पास हुए थे। इसके अलावा वह CDS और CPF में वह फेल हो चुके हैं,फिर भी मेहनत नहीं छोड़ी और आईएएस बने।

5 लाख से अधिक फॉलोवर्स
IAS अवनीश शरण को 5 लाख से अधिक लोग ट्विटर पर फॉलो कर रहे हैं। इसमें से अधिकांश उनकी फोटोज और वीडियो पर रिएक्ट भी करते हैं। ट्विटर पर पोस्ट उनकी उन तस्वीरों को भी बेहद पसंद किया जा रहा है,जिसमे वह अपनी फिटनेस लोगो करके पूछ रहे हैं कि वह जिम करके पहले से अधिक फिट नज़र आ रहे हैं कि नहीं।

बेटी का करवाया था सरकारी स्कूल में दाखिला
दरअसल भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी अवनीश शरण कई कारणों से चर्चा में रहते हैं। साल 2018 में उन्होंने अपनी बेटी का दाखिला बलरामपुर के ही एक सरकारी प्राइमरी स्कूल में कराया था। इससे पहले उन्होंने अपनी बेटी को एक वासरः तक आंगनबाड़ी में पढ़ने भेजा था। उस समय अवनीश की इस पहल की बेहद तारीफ हुई।
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