CG Election 2023: अंतागढ़ सीट पर निर्दलीय बिगाड़ रहे हैं कांग्रेस का समीकरण, जानिए कौन काट सकता है किसके वोट?
CG Election 2023: बस्तर संभाग की 12 सीटों में से एक कांकेर जिले की अंतागढ़ सीट में इस बार अच्छी टक्कर के आसार हैं। खास बात ये है कि इस बार टक्कर भाजपा और कांग्रेस के बीच नहीं, बल्कि भाजपा और कांग्रेस के बागी निर्दलीय प्रत्याशी के बीच होती दिख रही है।
दरअसल अंतागढ़ से वर्तमान विधायक अनूप नाग ने पिछली बार कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़ा था, लेकिन इस बार उनकी टिकट काट दी गई, जिसके बाद उन्होंने निर्दलीय पर्चा भरा और चुनावी मैदान में खड़े हो चुके हैं। कांग्रेस प्रत्याशी की कोई खास पकड़ क्षेत्र में नजर नहीं आ रही है। ऐसे में माना जा रहा है कि भाजपा प्रत्याशी का सीधा मुकाबला निर्दलीय अनूप नाग से हो सकता है।

मालूम हो कि बीते 3 विधानसभा चुनावों में अंतागढ़ की सीट भाजपा के कब्जे में रही है, लेकिन साल 2018 में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा के प्रति एंटी इंकम्बेंसी और पुराने चेहरों को ही दोबारा चुनाव लड़वाने से नाराज जनता ने कांग्रेस के अनूप नाग को वोट देकर उन्हें जीत दिलाई थी। क्षेत्र में अनूप की अच्छी साख भी मानी जाती है।
यही कारण है कि इस बार टिकट कटने के बाद नाराज अनूप ने अपने समर्थकों के साथ निर्दलीय नामांकन दाखिल किया। हालांकि कांग्रेस के नेताओं ने उन्हें समझाने का बहुत प्रयास किया, लेकिन वे नहीं माने।
अब स्थिति ये है कि वे भाजपा प्रत्याशी को सीधी टक्कर देते नजर आ रहे हैं। इधर कांग्रेस प्रत्याशी की खास पकड़ अंतागढ़ क्षेत्र में नहीं दिख रही है, जिसके चलते वे विधायक बनने की दौड़ से बाहर दिख रहे हैं।
इधर टिकट कटने से नाराज अनूप को उनके समर्थकों के साथ ही क्षेत्र के लोगों का भी अच्छा समर्थन मिल रहा है। लिहाजा इस बार भाजपा का सीधा सामना निर्दलीय प्रत्याशी से होने जा रहा है। यहां बताना लाजिमी है कि भाजपा ने पूर्व मंत्री विक्रम उसेंडी को टिकट दी है, जबकि कांग्रेस ने अनूप की टिकट काटकर रूपसिंह पोटाई पर दांव खेला है।
अंतागढ़ के राजनीतिक जानकारों की मानें तो अनूप शुरू से ही दबंग नेता रहे हैं, ऐसे में पार्टी में भी कई बार उनका विवाद बड़े नेताओं से होने की खबरें मिलती रही हैं। दबंग और अपने क्षेत्र के लोगों के लिए लड़कर विकास के कार्य करवाने वाली छवि के कारण ही क्षेत्र के लोगों में उनकी खास लोकप्रियता रही है। अनूप के दबंग स्वभाव के कारण ही उनकी टिकट काटी गई थी, जबकि कांग्रेस संगठन ने टिकट काटने को लेकर सर्वे रिपोर्ट का हवाला दिया है।
पिछले चुनावों पर नजर डालें तो अंतागढ़ की सीट 2003 में नारायणपुर में शामिल थी, जहां से भाजपा के विक्रम उसेंडी ने कांग्रेस के मंतुराम पवार को करीब 9 हजार वोटों से हरा दिया था। इसके बाद साल 2008 में विधानसभा क्षेत्रों के परिसीमन के बाद अंतागढ़ विधानसभा का गठन हुआ और यहां से फिर भाजपा के विक्रम ने कांग्रेस के मंतुराम को हराया, लेकिन इस बार जीत का अंतर केवल 109 वोटों का रहा।
साल 2013 में हुए विधानसभा चुनाव में तीसरी बार विधायक बनने भाजपा के विक्रम चुनावी मैदान में रहे और तीसरी बार कांग्रेस के मंतुराम को 5 हजार वोटों से हराया। साल 2018 में हुए चुनाव में भाजपा को हार का सामना करना पड़ा और कांग्रेस की टिकट से खड़े अनूप नाग ने विक्रम को करीब 13 हजार वोटों से हराकर भाजपा के कब्जे से सीट कांग्रेस के पाले में डाल दी।
एक तरह से भाजपा के हाथ की सीट को अपनी तरफ खींचकर पिछले चुनाव में अनूप ने अपनी लोकप्रियता का परिचय दे दिया था, लेकिन इस बार भाजपा से उनकी सीधी टक्कर आसान नहीं मानी जा रही है। इसके पीछे का कारण ये है कि कांग्रेस भी क्षेत्र में लगातार चुनाव प्रचार में जुटी हुई है। ऐसे में अनूप के हिस्से के कुछ वोट कांग्रेस को भी मिल सकते हैं और कांग्रेस के वोट अनूप को समर्थन दे सकते हैं।
इन हालातों में कांग्रेस के रूपसिंह पोटाई व अनूप नाग के बीच वोट शेयरिंग की स्थिति अब तक साफ नहीं हो पाई है। ऐसे में कांग्रेस और निर्दलीय अनूप के बीच कटने वाले वोटों का सीधा फायदा भाजपा को होता दिख रहा है।
बहरहाल भाजपा से विक्रम उसेंडी, कांग्रेस से रूपसिंह पोटाई व कांग्रेस के बागी निर्दलीय प्रत्याशी अनूप नाग के अलावा इस सीट पर आम आदमी पार्टी से संतराम सलाम, भारतीय शक्ति चेतना पार्टी से नरहरदेव गावड़े, सर्व आदि दल से मंचू मंडावी, राष्ट्रीय जनसभा पार्टी से लीलाधर कोरेटी, गोंडवाना गणतंत्र पार्टी से शिवप्रसाद गोटा, अंबेडकराइट पार्टी ऑफ इंडिया से सुरेंद्र कुमार दर्रो और निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मंतुराम पवार भी चुनावी मैदान में हैं।
संवाद सूत्र: ऋषि भटनागर, जगदलपुर/छत्तीसगढ़












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