बीजापुर में सुरक्षा बलों की बड़ी कार्रवाई, टॉप नक्सल लीडर सुधाकर-भास्कर की मौत से माओवादियों को बड़ा झटका
Chhattisgarh Naxalite: छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के नेशनल पार्क क्षेत्र में चल रही सघन नक्सल विरोधी कार्रवाई में सुरक्षा बलों को एक बार फिर बड़ी कामयाबी मिली है। बीते 5, 6 और 7 जून को लगातार हुई मुठभेड़ों में अब तक कुल 7 नक्सलियों मारे गए हैं।
सुरक्षा बलों ने मारे गए माओवादियों के शव बरामद किए हैं। इनमें माओवादी संगठन के दो शीर्ष नेताओं केंद्रीय समिति के सदस्य गौतम उर्फ सुधाकर और तेलंगाना राज्य समिति के सदस्य भास्कर के शव शामिल हैं। इन दोनों की मौत को नक्सल नेटवर्क की रीढ़ पर बड़ा वार माना जा रहा है।

Bijapur में टॉप लीडर्स की मौजूदगी का मिला था इनपुट
बीजापुर के नेशनल पार्क क्षेत्र में नक्सलियों की बड़ी संख्या में मौजूदगी की खुफिया जानकारी मिली थी। इसी इनपूट के आधार पर डीआरजी, एसटीएफ और कोबरा के जवानों की संयुक्त टीम 5 जून को तलाशी अभियान पर निकली थी। जैसे ही जवान इलाके में दाखिल हुए, घात लगाए नक्सलियों ने उन पर फायरिंग शुरू कर दी।
जवाबी कार्रवाई में जवानों ने भी मोर्चा संभाला। इसके बाद 7 नक्सलियों को सुरक्षा बलों ने मार गिराया। हालांकि, ऑपरेशन के दौरान सांप के काटने, मधुमक्खी के डंक मारने से कुछ जावन घायल भी हो गए । इन सभी को उचित इलाज मिल रहा है और उनकी हालत सामान्य है।
मुठभेड़ में ये टॉप कमांडर ढेर
सुधाकर उर्फ नर सिंहाचलम
मारे गए नक्सली कमांडर्स की पहचान सुधाकर और भास्कर के रुप में हुई है जो कई खतरनाक ऑपरेशन को अंजाम दे चुके हैं। मारे गए सुधाकर उर्फ नर सिंहाचलम केंद्रीय कमेटी का सदस्य और माओवादी शिक्षा विभाग का प्रभारी भी था। सुधाकर आंध्रप्रदेश के चिंतापालुडी गांव का रहने वाला था और तेलंगाना, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र में वांटेड भी था। इस पर सुरक्षा बलों ने 1 करोड़ रुपए का इनाम रखा था।
भास्कर मंचेरियल:
कोमाराम भीम डिविजनल कमेटी (एमकेबी DVC) का सचिव भास्कर मंचेरियल आंध्रप्रदेश के आदिलाबाद का निवासी था। इसके साथ ही तेलंगाना राज्य समिति का सदस्य भी था । इस पर भी लाखों रुपए का इनाम था। भास्कर भी इस अभियान में मारा गया है।
मारे गए बाकी 5 नक्सलियों की पहचान जारी
IG बस्तर पी. सुंदरराज ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए बताया कि बाकी पांच शवों की शिनाख्त अभी नहीं हो सकी है। मुठभेड़ स्थल से दो AK-47 राइफलें, भारी मात्रा में गोला-बारूद और माओवादी दस्तावेज बरामद हुए हैं। इलाके में सर्च ऑपरेशन और एरिया डॉमिनेशन अभियान अभी भी जारी है।
Chhattisgarh | IG Bastar P Sundarraj says, "So far, a total of 7 dead bodies of Maoist cadres have been recovered by security forces during the ongoing anti-Naxal operations in the National Park area of Bijapur district. These include the bodies of Central Committee Member Gautam…
— ANI (@ANI) June 7, 2025
ऑपरेशन के दौरान कुछ जवान सांप के काटने, मधुमक्खी के डंक, डीहाइड्रेशन और थकावट जैसी समस्याओं से प्रभावित हुए। सभी को उचित इलाज मिल रहा है और उनकी हालत सामान्य है।
दंतेवाड़ा में 7 नक्सलियों का सरेंडर
इस कार्रवाई में, दंतेवाड़ा में 2 इनामी नक्सलियों समेत कुल 7 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। ये सभी माओवादी संगठन के सक्रिय सदस्य थे।
सरेंडर करने वाले नाम इस प्रकार हैं:
- जुगलू उर्फ सुंडुम कोवासी (₹50,000 इनामी)
- दशा उर्फ बुरकू पोड़ियाम (₹50,000 इनामी)
- भोजा राम माड़वी
- लखमा उर्फ सुती उर्फ लखन मरकाम
- रातू उर्फ ओठे कोवासी
- सुखराम पोड़ियाम
- पंडरू राम पोड़ियाम
यह आत्मसमर्पण शासन की पुनर्वास नीति और माओवादियों के कमजोर होते मनोबल का परिणाम बताया जा रहा है। मुठभेड़ के दौरान नक्सलियों के प्रेस इंचार्ज बंडी प्रकाश की भी उपस्थिति बताई जा रही है, हालांकि उसकी स्थिति की पुष्टि नहीं हुई है। यह दर्शाता है कि सुरक्षाबलों की यह कार्रवाई माओवादी शीर्ष नेतृत्व को निशाना बनाने में सफल रही है।
Chhattisgarh में माओवादी संगठन पर लगातार पड़ रहे हैं भारी झटके
इस मुठभेड़ से पहले 21 मई 2025 को भी सुरक्षाबलों ने बीजापुर जिले में हुई मुठभेड़ में 27 नक्सलियों को मार गिराया था, जिनमें 1.5 करोड़ का इनामी बसवराज उर्फ बसवा राजू भी शामिल था। इसके ठीक एक हफ्ते पहले पुलिस ने कर्रेगुट्टा ऑपरेशन में 31 नक्सलियों को ढेर करने की जानकारी दी थी। यह ऑपरेशन 24 दिनों तक चला और इसे अब तक की सबसे बड़ी सफलताओं में से एक माना गया।
छत्तीसगढ़ सरकार और सुरक्षाबलों की साझा रणनीति, तकनीकी निगरानी, और दृढ़ इच्छाशक्ति का ही परिणाम है कि माओवादी नेटवर्क तेजी से बिखर रहा है। सुधाकर और भास्कर जैसे बड़े नेताओं का मारा जाना माओवादी आंदोलन के लिए एक बड़ा मनोवैज्ञानिक और संगठनात्मक झटका है।
अब देखना यह होगा कि आने वाले समय में इस दबाव के चलते और कितने माओवादी सरेंडर करते हैं या मारे जाते हैं। लेकिन इतना तय है कि छत्तीसगढ़ अब निर्णायक लड़ाई के मुहाने पर है।












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