Bhoramdev Mandir: छत्तीसगढ़ के खजुराहो पर संकट, पुरातत्व विभाग की लापरवाही, कलेक्टर ने रुकवाया काम
छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले में स्थित भोरमदेव मंदिर को छत्तीसगढ़ का खजुराहो का जाता है। यह प्रचीन शिव मंदिर 11 वी सदी कला और संस्कृति की गवाही आज भी दे रहा है। लेकिन इस प्राचीन मंदिर पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। भोरमदेव शिव मंदिर यह अब काफी जीर्ण शीर्ण हो चुका है। लम्बे समय की मांग के बाद इसके संरक्षण के लिए राज्य पुरात्वत सर्वेक्षण विभाग ने कार्य तो शुरू किया, लेकिन यह भी विवादों से घिर गया।

पुरातत्व विभाग ने मेंटेनेंस के लिए जारी किया टेंडर
भोरमदेव मंदिर के संरक्षण की मांग लंबे समय से की जा रही थी जिसके तहत पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने यह टेंडर जारी किया था। टेंडर के अनुसार मेंटेनेंस के लिए 37.33 लाख व रासायनिक संरक्षण के लिए 16 लाख का टेंडर जारी किया गया था। जिसका कार्य विभाग द्वारा शुरू कराया गया लेकिन इसे स्थानीय पुरातत्व समिति के सदस्यों और कवर्धा कलेक्टर जन्मेजय महोबे ने रुकवा दिया और खोदे गए गढ्ढे को फिर से पटवा दिया।

इसलिए कलेक्टर ने रुकवाया गया मंदिर में काम
अब इस कार्य को रुकवाने का कारण भी आपको बताते हैं। मंदिर के संरक्षण के लिए टेंडर तो जारी किया गया। लेकिन बिना किसी जानकारी के मंदिर परिसर में खुदाई शुरू कर दी गई । मंदिर के नींव के आसपास लगभग 3 फीट गड्ढा खोदा जा रहा था। इस गड्ढे की बेतरतीब गैती, फावड़े की खुदाई से मंदिर की नींव को नुकसान हो सकता था। इसके अलावा पुरातत्व विभाग के इंजीनियर की अनुपस्थिति में ठेकेदार ने परिसर में खुदाई शुरू कर दी थी। जिसकी जानकारी मिलते ही स्थानीय पुरातत्व विभाग के सदस्यों मंदिर समिति एवं कलेक्टर ने तत्काल काम रोकने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा संबंधित इंजीनियर को भी उपस्थित रहने के लिए कहा है।

पुरातत्तव विभाग ने किया था सर्वेक्षण, बताए थे उपाय
दरअसल मंदिर के संधारण के लिए कुछ समय पूर्व पुरातत्व विभाग ने सर्वेक्षण किया था। इस सर्वेक्षण में पाया कि मंदिर लगभग डेढ़ फीट एक तरफ झुक गया है। जिसे भविष्य में झुकने से बचाने के लिए मंदिर के आसपास लगभग 7 से 10 फीट गड्ढे खोदकर उसमें कंक्रीट के बड़े बड़े ब्लॉक्स लगाए जाएं। इसके अलावा मंदिर के बाकी जिन हिस्सों में केमिकल रिपेयर के माध्यम से वापस उन्हें सुधारा जाए। जिससे मंदिर की उम्र लगभग 100 सालों तक बढ़ जाएगी। मंदिर में शिवलिंग पर चावल चढ़ाने से भी मना किया गया था। इसके अलावा मड़वा महल और छेरकी महल में भी रिपेरिंग की आवश्यकता सर्वेक्षण टीम ने बताई थी।

राज्य संरक्षित है मंदिर, नागवंशी राजाओं ने कराया था निर्माण
भोरमदेव मंदिर छत्तीसगढ़ का एक मुख्य धार्मिक स्थल है। यह कवर्धा जिले का एक दर्शनीय स्थल है। यह भगवान शिव शिवलिंग के रूप में स्थापित हैं। मंदिर को छत्तीसगढ़ पुरात्तव सर्वेक्षण विभाग द्वारा संरक्षित किया गया है। यह प्राचीन मंदिर पत्थरों का बना हुआ है। भोरमदेव मंदिर को फणी नागवंशी राजाओं द्वारा 11वीं शताब्दी में बनाया गया था। गौड़ों के उपासक देवता भोरमदेव के नाम पर मंदिर का नाम भोरमदेव मंदिर पड़ा।

मंदिर के पास स्थित है छेरकी महल और मड़वा महल
यह मंदिर कवर्धा से 18 किलोमीटर दूर चौरा गांव में स्थित है। इस मंदिर की बाहरी दीवारों पर सुंदर कलाकृतियां उकेरी गई है। इस मंदिर को "छत्तीसगढ़ का खजुराहो" भी कहा जाता है, क्योंकि खजुराहो की तरह इस मंदिर की कुछ मिथुन मूर्तियां भी बनाई गई हैं। मंदिर के पास छेरकी महल और मड़वा महल भी हैं जिसका निर्माण 14 वी शताब्दी में किया गया था।
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