छत्तीसगढ़ में सरकारी वैक्सीन पर उठे सवाल, टीकाकरण के बाद 2 बच्चों की मौत, विपक्ष ने की जांच की मांग

Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ में टीकाकरण के बाद दो शिशुओं की दुखद मौत हो गई है, जिसके बाद वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव ने जांच की मांग की है। पूर्व उपमुख्यमंत्री ने बिलासपुर में हुई मौतों पर चिंता व्यक्त करते हुए टीकों की गहन जांच की मांग की है। हालांकि, स्वास्थ्य अधिकारियों ने कहा है कि टीकाकरण मौतों के लिए जिम्मेदार नहीं है।

ज्ञात हो कि बिलासपुर जिले में टीकाकरण शिविर के दौरान नवजात शिशुओं को टीके लगाए गए, जिसके कारण दो शिशुओं की दुर्भाग्यपूर्ण मौत हो गई। टीएस सिंहदेव ने रविवार को बिलासपुर जिला अस्पताल में शोक संतप्त परिवारों से मुलाकात की और इस घटना को 'बहुत गंभीर' बताया। उन्होंने आग्रह किया कि सभी टीकों के बैचों को तुरंत सील कर दिया जाए और मामले की व्यापक जांच की मांग की।

दरअसल, पटैता कोरीपारा के आंगनबाड़ी केंद्र में कुल सात बच्चों को टीका लगाया गया था। परिजनों का आरोप है कि टीका लगाने के बाद डेढ़ महीने और दो दिन के मासूम बच्चे की जान चली गई है। सभी बच्चों को बीसीजी और पेंटा वन का टीका लगाया गया था। टीका लगाने के बाद सभी बच्चों की तबीयत अनायास ही से बिगड़ने होने लगी। इसमें दो मासूमों की मौत हो गई, जबकी बाकी पांच बच्चों को एहतियात के तौर पर जिला अस्पताल में डॉक्टर निगरानी में रखा गया है।

विपक्ष ने सत्तारूढ़ भाजपा सरकार के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने घटना की जांच के लिए कोटा विधायक अटल श्रीवास्तव के नेतृत्व में छह सदस्यीय समिति का गठन किया है। बिलासपुर के पूर्व विधायक शैलेश पांडे ने मौतों के लिए टीकाकरण को जिम्मेदार ठहराया और इस मुद्दे पर भाजपा की चुप्पी की आलोचना की।

बिलासपुर जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. प्रभात श्रीवास्तव ने टीकाकरण कार्यक्रम के बारे में विस्तृत जानकारी दी। 30 अगस्त को कोटा विकासखंड के अंतर्गत पतेटा गांव के आंगनबाड़ी केंद्र में आठ बच्चों को टीका लगाया गया। दो दिन के एक बच्चे को बीसीजी का टीका लगाया गया और उसी दिन उसकी मौत हो गई।

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एक अन्य दो महीने के बच्चे को पेंटावेलेंट-1 का टीका लगाया गया और अगले दिन उसे मृत अवस्था में अस्पताल लाया गया।इधर, स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि उसी गांव के छह अन्य बच्चों की जांच बिलासपुर जिला अस्पताल में की गई और पाया गया कि वे स्वस्थ हैं और उनमें कोई समस्या नहीं है। उन्होंने कहा, "मौत का वास्तविक कारण पता नहीं चल सका है," उन्होंने आगे कहा कि परिवारों ने पोस्टमार्टम जांच से इनकार कर दिया। उन्होंने सुझाव दिया कि संक्रमण या निमोनिया के कारण मौतें हो सकती हैं।

स्वास्थ्य अधिकारी ने वैक्सीन वितरण के बारे में भी जानकारी साझा की। एक बैच में प्राप्त 5,000 बीसीजी खुराकों में से 3,000 का उपयोग किया जा चुका है। इसी तरह, पेंटावेलेंट वैक्सीन की 10,000 खुराकों में से अब तक 6,000 का उपयोग किया जा चुका है। इन घटनाओं से पहले या बाद में इन टीकों के बारे में कोई शिकायत सामने नहीं आई है। एहतियात के तौर पर इस खेप का उपयोग रोक दिया गया है।

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