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राजद्रोह के मुकदमे पर रोक के बाद छत्तीसगढ़ में हलचल, जानिए उन 3 मामलों के बारे में, जिनपर टिकी है देश की नजर!

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रायपुर,12 मई। भारत की सुप्रीम कोर्ट ने अब राजद्रोह कानून पर तब तक रोक लगाने कहा है, जब तक उसका पुनरीक्षण हो। अदालत में कहा है कि राजद्रोह की धारा 124-A में कोई नया प्रकरण नहीं दर्ज होना चाहिए। छत्तीसगढ़ में डॉ. बिनायक सेन, कालीचरण महाराज और कांकेर के पत्रकार कमल शुक्ला समेत कई लोगों पर राजद्रोह के मामले दर्ज हुए हैं। इन मामलों में कुछ लोगों को जमानत पर रिहा किया जा चुका है, वहीं वरिष्ठ पत्रकार कमल शुक्ला के मामले में पुलिस ने अभी तक चार्जशीट पेश नहीं की है।

वरिष्ठ पत्रकार कमल शुक्ला का मामला विवेचना में

वरिष्ठ पत्रकार कमल शुक्ला का मामला विवेचना में

28 अप्रैल 2018 को छत्तीसगढ़ के आदिवासी बाहुल्य और माओवादी प्रभावित क्षेत्र बस्तर के वरिष्ठ पत्रकार कमल शुक्ला पर राजद्रोह का मामला दर्ज किया गया था। बस्तर संभाग के कांकेर जिले के निवासी पर कथित तौर पर देश की न्यायपालिका और सरकार के खिलाफ आपत्तिजनक कार्टून पोस्ट करने के कारण मुकदमा दर्ज किया गया था। पुलिस विभाग के मुताबिक उनका मामला विवेचना में है गौरतलब है कि कमल शुक्ला फर्जी नक्सल मुठभेड़ के खिलाफ मुखर रहे हैं और लम्बे समय से छत्तीसगढ़ में पत्रकार सुरक्षा कानून लागू करने की मांग कर रहे हैं।

कमल शुक्ला का कहना है कि राजद्रोह कानून सरकार की आलोचना करने वाले नागरिकों के खिलाफ इस्तेमाल किया जाता रहा है, जिसके पत्रकार अधिक शिकार होते हैं। एक स्वस्थ लोकतंत्र में ऐसा नहीं होना चाहिए, क्योंकि आलोचना ही सरकार को उसकी कमियों को सुधारने का मार्ग प्रशस्त करती है। उन्होंने बताया कि एक वर्ष पूर्व ही कानून को चुनौती देने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई थी। पुलिस ने उनके प्रकरण में अब तक चार्जशीट दाखिल नहीं की है।

छत्तीसगढ़ के पूर्व ACB चीफ जीपी सिंह को मिल सकती है राहत

छत्तीसगढ़ के पूर्व ACB चीफ जीपी सिंह को मिल सकती है राहत

8 जुलाई 2021 को रायपुर के कोतवाली थाने में छत्तीसगढ़ के पूर्व निलंबित आईपीएस जीपी सिंह के खिलाफ राजद्रोह का मामला दर्ज किया गया था। सिंह पर राजद्रोह के अलावा आय से अधिक संपत्ति का मामला भी दर्ज है। चर्चा है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब वह भी अपनी जमानत के लिए आवेदन कर सकते हैं। गौरतलब है कि जीपी सिंह राजद्रोह के मामले में दाखिल चार्जशीट की वजह से बीते 6 महीने से अधिक समय से बिना जमानत जेल में बंद हैं।

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    क्या होगा कालीचरण का ?

    क्या होगा कालीचरण का ?

    कथित संत कालीचरण महाराज का मामला भी बीते कुछ समय से बेहद चर्चा में रहा है। 26 दिसंबर 2021 को छत्तीसगढ़ पुलिस ने कालीचरण के खिलाफ टिकरापारा थाने में राजद्रोह का मामला दर्ज किया था। कालीचरण पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी पर अभद्र टिप्पणी करने का आरोप है। हालांकि कालीचरण बीते माह ही जमानत पर जेल से रिहा हुआ है। छत्तीसगढ़ सरकार के प्रवक्ता और कैबिनेट मंत्री रविंद्र चौबे का कहना है कि अदालत के फैसले पर टिप्पणी नहीं करनी चाहिए, लेकिन भारत में गांधी जी का सम्मान सबको करना चाहिए, कालीचरण के मामले में यह फैसला लागू नहीं होना चाहिए।

    डॉ. विनायक सेन, जिनकी रिहाई के लिए दुनिया भर में हुए थे प्रदर्शन

    डॉ. विनायक सेन, जिनकी रिहाई के लिए दुनिया भर में हुए थे प्रदर्शन

    निवास से माओवादी समर्थक साहित्य बरामद होने के कारण वर्ष 2010 में एक निचली अदालत ने वरिष्ठ समाजिक कार्यकर्ता डॉ. बिनायक सेन को राजद्रोह का दोषी करार दिया था। बिनायक सेन की गिरफ्तारी और सजा के बाद छत्तीसगढ़ समेत राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई बड़े विरोध प्रदर्शन हुए थे। दुनिया की कई जानी मानी हस्तियों ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से बिनायक सेन की रिहाई की अपील की थी। साल 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी थी।

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    Comments
    English summary
    After the ban on the sedition case, there is a stir in Chhattisgarh, know about those 3 cases on which the eyes of the country are fixed!
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