Chhatarpur News: छतरपुर नगर पालिका परिषद महाराजपुर के रिकॉर्ड में गोलमाल, पुराने दस्तावेजों को बदलने का आरोप
मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले की महाराजपुर नगर पालिका परिषद पर प्रशासनिक कामकाज में गोलमाल करने का गंभीर आरोप लगा है। 1939 में स्थापित हुई इस नगर पालिका परिषद ने अपने ही रिकॉर्ड में बदलाव कर नियमों की धज्जियाँ उड़ा दी हैं।
आश्चर्य की बात यह है कि जो परिषद् 1939 में बनी थी, उसके अस्तित्व को अब 1948 में दिखाने का प्रयास किया जा रहा है। इस प्रकार के बदलाव से नगर पालिका परिषद के रिकॉर्ड और प्रशासनिक कार्य प्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।

1939 में स्थापित म्युनिसिपलिटी, अब 1948 में अस्तित्व में?
ब्रिटिश शासन काल में महाराजपुर को नगर के रूप में विकसित करने के लिए 28 अगस्त 1939 को म्युनिसिपैलिटी का गठन किया गया था। पहले प्रशासनिक प्रमुख के रूप में श्याम सुंदर भट्ट को नियुक्त किया गया। इसके बाद से कई और प्रशासक आए, जिनकी सूची में नाम भी दर्ज हैं। उदाहरण के लिए, जी एस भागवत (1943-44), एनडी कपूर (1944-47), श्याम सुंदर (1947-48) जैसे प्रशासकों का कार्यकाल हुआ।
लेकिन आश्चर्यजनक रूप से, नगर पालिका परिषद के रिकॉर्ड से इन प्रशासकों के नाम गायब कर दिए गए हैं और 1948 के बाद के प्रशासकों को ही प्रमुखता दी जा रही है। शासकीय दस्तावेजों के अनुसार, 1948 में दीनदयाल चौरसिया को नगर पालिका परिषद का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था, लेकिन उनके कार्यकाल के बाद तक म्युनिसिपलिटी का अस्तित्व और इसके प्रशासकों का रिकॉर्ड गायब कर दिया गया।

अधिकारियों का कथित कृत्य
नगर पालिका के सूत्रों की मानें तो अधिकारियों ने जानबूझकर म्युनिसिपलिटी के दस साल का रिकॉर्ड गायब कर दिया है। यह गंभीर आरोप किसी अपराध से कम नहीं माने जा सकते। अगर यह आरोप सही साबित होते हैं तो यह प्रशासनिक अनियमितता और सरकारी दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ का मामला बनता है।

नगर पालिका परिषद द्वारा किए गए विकास कार्य
ब्रिटिश शासन के दौरान ही कई महत्वपूर्ण विकास कार्य किए गए थे। 8 दिसंबर 1940 को थाना भवन का उद्घाटन हुआ था, जबकि 30 जून 1942 को भवानी मार्केट का उद्घाटन किया गया। इसके अलावा, मिडिल स्कूल, खेल मैदान, और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जैसी महत्वपूर्ण सुविधाओं का भी निर्माण हुआ था। इन कार्यों का श्रेय म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन को जाता है, जो नगर पालिका के रिकॉर्ड में दर्ज थे।
हालांकि, समय के साथ इन संपत्तियों पर विवाद उत्पन्न हुआ। नगर पालिका की संपत्तियों में से कई को अधिकारियों और स्थानीय लोगों की मिलीभगत से हड़पने की कोशिश की गई। अब नगर पालिका से संबंधित कई महत्वपूर्ण रिकॉर्ड, जैसे सरकारी भूमि और भवनों का विवरण, सूचना के अधिकार (RTI) के तहत उपलब्ध नहीं हो पा रहा है।
भूमि अतिक्रमण और संपत्तियों का विवाद
नगर पालिका द्वारा किए गए विभिन्न विकास कार्यों की संपत्तियाँ अब अतिक्रमण के शिकार हो गई हैं। दक्षिण दिशा की जमीन, जो नगर पालिका भवन से जुड़ी हुई थी, अब पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष के परिवार के नाम कर दी गई है। इसके अलावा, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की भूमि और भवानी मार्केट की भूमि पर भी अतिक्रमण की समस्याएँ उत्पन्न हो गई हैं। यह सब कथित रूप से महेश असाटी, जो कि नगर पालिका के इंजीनियर हैं, के सहयोग से हुआ है।
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