लॉकडाउन में चली गई नौकरी, तो घर पर ही बना डाली ई-बाइक- पढ़ें तमिलनाडु के रहने वाले सरवन की दिलचस्प कहानी
पैसों की तंगी और ईंधन के बढ़ती कीमतों ने सरवन को ई-बाइक बनाने पर मजबूर कर दिया और उन्होंने घर पर ही ई-बाइक बना डाली।
चेन्नई, 21 अगस्त। पेट्रोल-डीजल के दाम आज रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुके हैं, इसके अलावा पेट्रोल-डीजल से चलने वाले वाहनों ने निकलने वाले धुएं से इंसानों का दम घुटा जा रहा है। वहीं इलेक्ट्रिक वाहन इतने महंगे हैं कि उन्हें खरीदना फिलहाल आम आदमी के बसका नहीं है। लेकिन इंसान तो फिर इंसान ठहर। वह हर चीज का तोड़ निकालने की कोशिश करता है। ऐसी ही कोशिश की तमिलनाडु के सरवन ने। पैसों की तंगी और ईंधन के बढ़ती कीमतों ने सरवन को ई-बाइक बनाने पर मजबूर कर दिया और उन्होंने घर पर ही ई-बाइक बना डाली।

बचपन से था मशीनों के साथ खेलने का शौक
पेशे से इलेक्ट्रीशियन सरवन को लॉकडाउन के कारण अपनी नौकरी गंवानी पड़ी। इसके बाद वह खेती कर के अपने सात सदस्यीय परिवार का पेट भर रहे थे, जिसमें उनके माता-पिता, पत्नि और तीन बच्चे शामिल हैं। खेती से जो भी समय बचता वह उसे मशीनों के साथ एक्सपेरिमेंट करने में लगाते। उन्हें बचपन से ही मशीनों के साथ जोड़-तोड़ करने का शौक था।
सरवन कहते हैं, 'सात साल पहले मैंने ई-बाइक बनाने की कोशिश की थी, लेकिन दुर्भाग्यवश में इसमें असफल रहा। इसके बाद मैं लगातार इसके बारे में पढ़ता रहा और कुछ वीडियोज भी देखता रहा। लॉकडाउन के दौरान मैंने इसपर दोबारा प्रयोग करना शुरू कर दिया।'

पुरानी बाइक को बना डाला ई-बाइक
उन्होंने पहले एक पुरानी बाइक खरीदी और फिर उसमें बैटरी फिट करने की कोशिश की। इसने थोड़ा काम किया, लेकिन बेहतर परिणाम के लिए उन्होंने एक और पुरानी बाइक 2,500 रुपए में खरीदी। इस बार यह काम कर गई। उन्होंने कहा कि उन्हें इसका इस्तेमाल करते हुए 45 दिन से ज्यादा हो गए हैं और यह काफी बढ़िया चल रही है। यह 45 किलोमीटर प्रतिघंटा का माइलेज देती है। उन्होंने 2600 रुपए खर्च किए और बाइक को बेहतर बनाने में उन्हें 3 महीने का समय लगा।सरवन बताते हैं कि ऐसी बाइक बनाने के लिए आपको इलेक्ट्रिक, वेल्डिंग और मकैनिकल की जानकारी होना जरूरी है। जब में तिरुचि में एक प्राइवेट कंपनी में काम करता था, उसी दौरान मुझे वेल्डिंग की भी जानकारी हो गई थी। इस तरह के मॉडिफिकेशन के लिए वेल्डिंग आना बहुत जरूरी है। वह कहते हैं कि उन्होंने इसका पूरा इंजन बदला। उन्होंने एक ब्रशलैस डीसी (बीएलडीसी) मोटर, कंट्रोलर यूनिट और एक किट चेन्नई से मंगवाई। सरवन ने कहा, 'मोटर और किट के ऑर्डर में मुझे कई बार ठगा गया।
लेकिन इस बार सब अच्छा हुआ। आमतौर पर ई-बाइक में 20 एएच, लीथियम आयन बैटरी इस्तेमाल की जाती है, लेकिन मैं इसका खर्च वहन नहीं कर सकता था। इसलिए मैंने लीड एसिड 14 एएच बैटरी से ही काम चलाया जो कि आम तौर पर मोटरसाइकिलों में इस्तेमाल होती है। अगर मैं ई-बाइक की बैटरी इस्तेमाल करता तो माइलेज 65 किमी हो सकता था।' वह कहते हैं कि वह घर में लगे सोलर पैनल से ही बाइक को चार्ज करते हैं। सरवन कहते हैं, 'मेरे घर में 315 वॉट का सोलर पैनल है। और एक यूपीएस है। मैं सोलर से पहले यूपीएस चार्ज करता हूं और फिर यूपीएस से बैंटरी।'

ये है बाइक की सबसे बड़ी खासियत
इस गाड़ी की खासियत ये है कि इसे दिव्यांग व्यक्ति भी चला सकता है। जैसे ही आप ब्रेक दवाते हो, मोटर बंद हो जाती है, और इससे बैटरी की बचत होती है और इससे माइलेज बढ़िया होता है। सरवन कहते हैं न तो यह आवाज करती है, न ही प्रदूषण और न ही इसे चलाने के लिए पेट्रोल की जरूर पड़ती है।












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