पंजाब: सिद्धू-चन्नी के बीच नियुक्तियों को लेकर तकरार के बीच डिप्टी CM के दामाद बने एडिशल AG, विपक्ष हुआ हमलावर
पंजाब के उपमुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा के दामाद तरुणवीर सिंह लहल को एडिशनल एडवोकेट जनरल पद पर नियुक्त किया गया है।
चंडीगढ़, 8 नवंबर। पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू और सीएम चरणजीत सिंह चन्नी के बीच नियुक्तियों को लेकर चल रही तकरार के बीच पंजाब के उपमुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा के दामाद तरुणवीर सिंह लहल को एडिशनल एडवोकेट जनरल पद पर नियुक्त किया गया है। तरुणवीर सिंह लहल की एडिशनल एडवोकेट जनरल पद पर नियुक्ति के बाद विपक्ष हमलावर हो गया है क्योंकि सुखजिंदर रंधावा के पास पंजाब का गृह विभाग भी है। सोमवार को जारी अधिसूचना के अनुसार अधिवक्ता तरुण वीर सिंह लेहल को पंजाब के महाधिवक्ता के कार्यालय में अनुबंध के आधार पर 31 मार्च तक नियुक्त किया गया है।
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रंधावा ने नियुक्ति को बताया वैध
इस फैसले का बचाव करते हुए सुखजिंदर सिंह रंधावा ने कहा कि लहल की नियु्क्ति कानूनी है। उन्होंने कहा कि लहल की नियुक्ति महाधिवक्ता पंजाब की सिफारिश पर की गई है। उनकी नामांकन संख्या पी-1968/2008 है और उनका 12 साल से अधिक का अभ्यास रिकॉर्ड है, जिसमें 500 से अधिक मामले उच्च न्यायालय में लंबित हैं। उनकी नियुक्ति 6 महीने से भी कम समय के लिए की गई है।
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विपक्ष ने लगाया भाई-भतीजावाद का आरोप
लहल की नियुक्ति को लेकर विपक्ष ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। आप नेता राघव चड्ढा ने नौकरियों पर पार्टी के चुनावी वादे पर कटाक्ष करते हुए कहा कि यह केवल कांग्रेस नेताओं के रिश्तेदारों पर लागू होता है। उन्होंने ट्वीट कर कहा, कांग्रेस 'हर घर नौकरी' के अपने प्रमुख चुनावी वादे को पूरा कर रही है, लेकिनन मामूली संशोधन के साथ। इन नौकरियों को पाने वाले केवल कांग्रेस के मंत्रियों और विधायकों के परिवार के सदस्य हैं। इसके नवीनतम लाभार्थी उपमुख्यमंत्री रंधावा के दामाद है। चन्नी अनिवार्य रूप से कैप्टन की विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं।
विधानसभा में मुद्दा उठाएगी आप
वहीं विपक्ष के नेता हरपाल सिंह चीमा ने कांग्रेस सरकार पर चुटकी लेते हुए कहा कि कांग्रेस केवल वंशवाद की राजनीति को आगे बढ़ाने के अपने वादे पर खरा उतर रही है। आप इस मुद्दे को विधानसभा में उठाएगी और सरकार को जवाब देगी।
बदा दें कि इससे पहले इस पद पर एपीएस देवोल की नियुक्ति हुई थी, जिस पर नवजोत सिंह सिद्धू के विरोध के बाद उन्हें इस्तीफा देना पड़ा था। बता दें कि अगले साल पंजाब में विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं, ऐसे में सरकार का कोई भी कदम जनता को नाराज कर सकता है और विपक्ष को हमलावर होने का मौका दे सकता है।












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