पत्नी से पीड़ित पति का शादी के बाद घटा 21 किलो वजन, हाईकोर्ट ने तलाक के फैसले पर लगाई मुहर

चंडीगढ़, 9 सितम्बर। पंजाब और हरियाणा कोर्ट ने फैमिली कोर्ट द्वारा पत्नी की मानसिक प्रताड़ना के चलते पति को तलाक की अनुमति दिए जाने के फैसले को बरकरार रखा है। 50 प्रतिशत से ज्यादा सुनने में अक्षम एक व्यक्ति ने हिसार फैमिली कोर्ट में दावा किया था कि पत्नी के मानसिक उत्पीड़न के चलते उसका वजन 21 किग्रा तक कम हो गया था।

फैमिली कोर्ट के फैसले पर मुहर

फैमिली कोर्ट के फैसले पर मुहर

पीड़ित शख्स की पत्नी ने फैमिली कोर्ट के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की थी। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया कि पत्नी ने पति के खिलाफ जो आपराधिक मुकदमें और शिकायतें दर्ज की थी वह सभी गलत पाई गईं। उच्च न्यायालय ने इसे मानसिक उत्पीड़न माना और अपील को सुनने से इनकार कर दिया।

जस्टिस रितु बाहरी और जस्टिस अर्चना पुरी की डिवीजन बेंच ने हिसार की महिला की फैमिली कोर्ट के 27 अगस्त 2019 के उस फैसले के खिलाफ अपील को खारिज कर दिया जिसमें महिला ने फैमिली कोर्ट द्वारा उसके पति की अपील पर तलाक को मंजूरी दे दी थी।

युगल ने 2012 में शादी की थी। शख्स बैंक में काम करता है जबकि महिला हिसार में ही एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ाती है। शादी के बाद दोनों की एक बेटी है जो अभी पिता के साथ रहती है।

क्या था मामला?

क्या था मामला?

पीड़ित शख्स के आरोपों के मुताबिक उसकी पत्नी गुस्सैल स्वभाव की है और बात-बात पर लड़ती रहती है और उसने कभी भी परिवार के साथ खुद को मिलाने की कोशिश नहीं की। शख्स के मुताबिक उसकी पत्नी छोटी-छोटी बातों पर बड़ा हंगामा करती थी जिसके चलते उसे अपने परिवार वालों और रिश्तेदारों के सामने शर्मिंदा होना पड़ता था लेकिन वह इस उम्मीद में चुप रहा कि आगे चलकर शायद उसका व्यवहार बदल जाएगा।

पत्नी पर मानसिक उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए शख्स ने दावा किया कि शादी के समय उसका वजन 74 किलोग्राम था जो उत्पीड़न के चलते बाद में घटकर 53 किलोग्राम हो गया।

पति के आरोपों से इनकार करते हुए महिला ने कोर्ट को बताया कि उसने अपनी सारी वैवाहिक जिम्मेदारियां प्रेम और सम्मान के साथ निभाई हैं। महिला ने यह भी दावा किया कि शादी के छह महीने बाद उसका पति और उसके परिवार के लोग उसे सताने लगे और दहेज की भी मांग करने लगे थे।

महिला का दावा कोर्ट में निकला झूठा

महिला का दावा कोर्ट में निकला झूठा

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि महिला ने 2016 में ही घर छोड़ दिया था और अपनी बेटी को भी ससुराल से अपने साथ नहीं ले गई थी। यही नहीं महिला ने बेटी से कभी मिलने की भी कोशिश नहीं की। कोर्ट के सामने यह भी सामने आया कि पति के परिवार वालों ने कभी महिला से दहेज की मांग नहीं की बल्कि शादी के बाद उसकी उच्च शिक्षा के लिए खर्च भी दिया था।

कोर्ट ने यह भी पाया कि महिला ने पति और उसके परिवार वालों के खिलाफ झूठे आपराधिक मामले दर्ज कराए। कोर्ट ने महिला की अपील को खारिज करने हुए अपनी टिप्पणी में लिखा "यह ध्यान में रखते हुए कि महिला शिक्षित है और उसे उन आपराधिक शिकायतों के परिणामों के बारे में पता था जो उसने पति और उसके परिवार वालों के खिलाफ 2013 और 2019 में दर्ज कराई थीं। यही नहीं पत्नी के 2016 में घर छोड़ देने के बाद शख्स ने अकेले अपनी तीन साल की बेटी का पालन पोषण किया जो कि मानसिक उत्पीड़न है।

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