करनाल: पुलिस लाठीचार्ज में किसान की मौत के दावे का पुलिस ने किया खंडन
करनाल में किसानों पर किए गए लाठीचार्ज के बाद एक किसान की कथित मौत का पुलिस ने खंडन किया है। पुलिस ने कहा है कि पुलिस लाठीचार्ज से किसान की मौत नहीं हुई।
चंडीगढ़, 29 अगस्त। शनिवार को हरियाणा के करनाल सीएम खट्टर के खिलाफ विरोध कर रहे किसानों पर पुलिस ने बड़े स्तर पर लाठी चार्ज किया था। इस लाठी चार्ज को लेकर अखिल भारतीय किसान मजदूर सभा ने दावा किया था कि करनाल में हुए लाठीचार्ज के बाद एक किसान की मौत हो गई है और मृत किसान का नाम सुशील काजल है। किसानों ने पुलिस पर हत्या का भी आरोप लगाया था। इस पूरे मामले को लेकर पुलिस ने अपनी सफाई दी है और किसानों के दावे का खंडन किया है।

करनाल के पुलिस अधीक्षक गंगा राम पूनिया ने कहा कि वह (मृत किसान) किसी भी अस्पताल नहीं गया। वह स्थित अवस्था में घर गया और सोते वक्त उसकी मौत हो गई। कुछ लोग कह रहे हैं कि उसकी मौत हार्ट अटैक से हुई है। पुलिस द्वारा शनिवार को करनाल में किए गए लाठीचार्ज में उसकी मौत हुई, इस तरह की खबरें गलत हैं।
बता दें कि शनिवार को किसानों ने कृषि कानूनों को लेकर करनाल में विरोध प्रदर्शन किया था। जिस वक्त किसान प्रदर्शन कर रहे थे उसी वक्त पुलिस ने एसडीएम के आदेश पर बसताड़ा टोल, करनाल में किसानों पर लाठियां बरसाई थीं। घटना के बाद सुशील काजल नाम के एक किसान की मौत हो गई थी, जिसको लेकर किसानों ने कहा कि उसकी मौत पुलिस द्वारा की गई लाठीचार्ज के कारण हुई है।
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किसानों ने की एसडीएम की गिरफ्तारी की मांग
अखिल भारतीय किसान सभा ने करनाल एसडीएम की गिरफ्तारी की मांग की है। घटनास्थल का जो वीडियो रिलीज हुआ था उसमें साफ तौर पर एसडीएम करनाल आयुष सिन्हा को किसानों पर लाठी भांजने का आदेश देते हुए सुना जा सकता है। वायरल वीडियो में आयुस सिन्हा पुलिस वालों को किसानों को उठा-उठा कर मारने और सिर फोड़ने का आदेश दे रहे थे। इस आदेश के कारण आयुष सिन्हा सवालों के घेरे में आ गए हैं। लोग उनसे लगातार सवाल कर रहे हैं कि क्या वह इसीलिए सिविल सेवा में आए थे।
गौरतलब है कि देश भर के लाखों किसान केंद्रीय कृषि कानूनों को लेकर लंबे समय से दिल्ली की सीमाओं पर आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन केंद्र सरकार अपने फैसले से पीछे हटने को तैयार नहीं दिख रही है।












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