Budget 2026: वित्त मंत्री सीतारमण के बजट के बाद SENSEX-NIFTY हुई धड़ाम, शेयर मार्केट में मचा हाहाकार
Budget 2026: केंद्रीय बजट 2026 पेश होने के अगले ही दिन, 1 फरवरी को भारतीय शेयर बाजारों में तेज बिकवाली देखने को मिली। बीएसई सेंसेक्स करीब 1600 अंक टूटकर 80,600 के आसपास आ गया, जबकि निफ्टी में भी लगभग 550 अंकों की गिरावट दर्ज की गई और यह 24,800 के नीचे फिसल गया। बाजार की इस कमजोरी ने निवेशकों को चौंका दिया।

STT बढ़ोतरी बनी गिरावट की बड़ी वजह
बाजार में आई इस गिरावट का प्रमुख कारण फ्यूचर्स ट्रेडिंग पर सिक्योरिटीज ट्रांजेक्शन टैक्स (STT) में बढ़ोतरी माना जा रहा है। बजट में STT को 0.02% से बढ़ाकर 0.05% कर दिया गया, जिससे खासकर ट्रेडर्स और ब्रोकिंग फर्मों पर दबाव बढ़ा। इसके चलते ब्रोकरेज कंपनियों के शेयरों में 10% तक की तेज गिरावट देखी गई।
सेंसेक्स-निफ्टी के ज्यादातर शेयर लाल निशान में
सेंसेक्स के 30 में से 27 शेयरों में गिरावट रही। एसबीआई, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स (BEL) और एचसीएल टेक जैसे शेयरों में सबसे ज्यादा, करीब 5% तक की कमजोरी दर्ज की गई। निफ्टी के सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो सरकारी बैंक सबसे ज्यादा प्रभावित रहे, जहां करीब 3.5% की गिरावट आई। मेटल और मीडिया सेक्टर भी लगभग 2% टूटे।
कुछ सेक्टर्स में दिखी सीमित मजबूती
हालांकि, बाजार में हर तरफ नकारात्मक माहौल नहीं था। ऑटो और प्राइवेट बैंक सेक्टर में कुछ हद तक मजबूती देखने को मिली। बैंकिंग और आईटी के चुनिंदा बड़े शेयरों-जैसे एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक और टीसीएस-में खरीदारी से बाजार को निचले स्तरों से सहारा मिला।
दिन में दिखी जोरदार रिकवरी
शुरुआती भारी गिरावट के बाद बाजार ने दिन के निचले स्तरों से अच्छी रिकवरी भी दिखाई। सेंसेक्स अपने न्यूनतम स्तर से करीब 500 अंक उछला, जबकि निफ्टी भी लगभग 150 अंकों की वापसी करने में सफल रहा। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी खरीदारी का रुझान देखने को मिला।
कैपेक्स बढ़ाने पर सरकार का जोर
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026-27 में पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) का लक्ष्य बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव रखा है। उन्होंने कहा कि इससे इंफ्रास्ट्रक्चर, रोजगार और आर्थिक विकास को मजबूती मिलेगी। विशेषज्ञ मानते हैं कि यही लंबी अवधि में बाजार के लिए सकारात्मक संकेत है।
निवेशकों के लिए क्या है रणनीति?
बाजार जानकारों का मानना है कि बजट के बाद कुछ समय तक उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। प्रॉफिट बुकिंग के चलते गिरावट संभव है, लेकिन हर गिरावट लंबी अवधि के निवेशकों के लिए मौका भी हो सकती है। विशेषज्ञों की सलाह है कि निवेशक मजबूत लार्जकैप कंपनियों और इंफ्रास्ट्रक्चर, डिफेंस व रेलवे जैसे बजट-फोकस्ड सेक्टरों पर नजर बनाए रखें।
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