Wholesale inflation: थोक महंगाई दर जनवरी 2023 में घटकर हुई 4.73%, इन चीजों के गिरे दाम
Wholesale inflation, वाणिज्य मंत्रालय द्वारा मंगलवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, जनवरी 2023 में थोक मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई दर कम हुई है। दिसंबर 2022 में डब्ल्यूपीआई 4.95 प्रतिशत थी जो जनवरी 2023 में 4.73 प्रतिशत हो ग

खुदरा महंगाई दर (सीपीआई) भले ही जनवरी महीने में बढ़कर तीन महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हो लेकिन थोक महंगाई दर (डब्ल्यूपीआई) में गिरावट देखने को मिली है। जनवरी 2023 में थोक महंगाई दर घटी है और ये 4.73 प्रतिशत पर आ गई है। दिसंबर में थोक महंगाई दर का आंकड़ा 4.95 प्रतिशत रहा था। हालांकि इसका असर खुदरा महंगाई पर देखने को नहीं मिला है।
वाणिज्य मंत्रालय द्वारा मंगलवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, जनवरी 2023 में थोक मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई दर कम हुई है। दिसंबर 2022 में डब्ल्यूपीआई 4.95 प्रतिशत थी जो जनवरी 2023 में 4.73 प्रतिशत हो गई। थोक मूल्य मुद्रास्फीति में गिरावट खनिज तेल, रसायन और रासायनिक उत्पादों, कपड़ा, कच्चा पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस और खाद्य उत्पादों की दर में गिरावट के कारण हुई है।
अनाज के मामले में थोक महंगाई दर में 2.41 प्रतिशत का इजाफा हुआ। वहीं सब्जियां 26.48 प्रतिशत तक सस्ती हुईं। ऑयल सीड्स की कीमतों में जनवरी 2023 में 4.22 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। ईंधन और ऊर्जा बास्केट में थोक महंगाई दर 15.15 प्रतिशत दर्ज की गई। जनवरी में खाने-पीने की चीजों की महंगाई दर बढ़कर 2.95% पहुंच गया है जो दिसंबर में 0.65% था।
आरबीआई की तमाम कोशिशों के बावजूद भारत की खुदरा महंगाई दर जनवरी में बढ़कर 3 महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। जनवरी 2023 में खुदरा महंगाई दर 6.52 फीसदी रही। इस तरह यह आरबीआई द्वारा तय दायरे से एक बार फिर बाहर चली गई है। दिसंबर 2022 में यह 5.72% थी। जनवरी महीने में खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ने के चलते महंगाई में इजाफा हुआ है। खाने-पीने की चीजों की महंगाई दर जनवरी में 5.94 प्रतिशत रही जो इसके पहले दिसंबर में 4.19 फीसदी थी। ग्रामीण और शहरी भारत में खुदरा मुद्रास्फीति क्रमशः 6.85 प्रतिशत और 6.00 प्रतिशत थी।
अनाज और उत्पाद, अंडे, मसाले, आदि ने जनवरी में खुदरा मुद्रास्फीति में वृद्धि में योगदान दिया। भारत की खुदरा मुद्रास्फीति लगातार तीन तिमाहियों के लिए आरबीआई के छह प्रतिशत लक्ष्य से ऊपर थी और नवंबर 2022 में ही आरबीआई के आराम क्षेत्र में वापस आने में कामयाब रही थी। पिछले साल मई से आरबीआई ने मुद्रास्फीति को कम करने के लिए नवीनतम 25 बीपीएस बढ़ोतरी सहित अल्पकालिक उधार दर में 250 आधार अंकों की वृद्धि की है। रेपो दर बढ़ाने से अर्थव्यवस्था में मांग को कम करने में मदद मिलती है और इस प्रकार मुद्रास्फीति को प्रबंधित करने में मदद मिलती है।












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