Indian Rupee Surge: लगातार गिरावट के बाद डॉलर के मुकाबले रुपए में जबरदस्त उछाल, 7 महीने में सबसे बड़ी तेजी
Indian Rupee Surge: भारतीय रुपया बुधवार, 17 दिसंबर को सात महीनों में सबसे ज्यादा मजबूती के साथ उभरा। इसकी बड़ी वजह भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा डॉलर की आक्रामक बिक्री मानी जा रही है।
लगातार रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच रहे रुपये को संभालने के लिए केंद्रीय बैंक के हस्तक्षेप के बाद विदेशी मुद्रा बाजार में बड़ा बदलाव देखने को मिला। रुपये की मजबूती के साथ-साथ घरेलू शेयर बाजारों में भी तेजी दर्ज की गई।

डॉलर के मुकाबले 1% तक चढ़ा रुपया
बुधवार, 17 दिसंबर को रुपया करीब 1% की बढ़त के साथ 90.0963 प्रति डॉलर तक पहुंच गया, जो 23 मई 2025 के बाद की सबसे बड़ी एकदिवसीय तेजी है। इससे पहले सत्र में रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुआ था। बाजार से जुड़े लोगों के मुताबिक, RBI ने स्थानीय बाजार में डॉलर बेचकर रुपये को सहारा दिया। ट्रेडर्स के अनुसार, रिज़र्व बैंक ने करीब 91 रुपये प्रति डॉलर के स्तर पर आक्रामक तरीके से हस्तक्षेप किया।
इससे पहले 16 दिसंबर को RBI ने फॉरेन एक्सचेंज स्वैप के जरिए करीब 5 अरब डॉलर खरीदे थे। माना जा रहा है कि इसके बाद बुधवार को खुले बाजार में डॉलर की बिक्री कर रुपये को मजबूती दी गई। RBI की इस कार्रवाई से फिलहाल रुपये के खिलाफ बनाई गई सट्टेबाजी पोजिशन खुलेंगी, जिससे मुद्रा को और राहत मिल सकती है।
हाल के हफ्तों में क्यों टूटा था रुपया?
RBI के हस्तक्षेप से पहले रुपये पर लगातार दबाव बना हुआ था। इस महीने अब तक रुपया करीब 2% तक टूट चुका था। इसकी बड़ी वजहें थीं भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने में देरी, घरेलू शेयर और बॉन्ड बाजार से विदेशी निवेशकों की निकासी,वैश्विक अनिश्चितता और डॉलर की मजबूत मांग के कारण गिर गया था।
विदेशी निवेशकों की बड़ी निकासी
इस साल अब तक वैश्विक फंड्स भारतीय शेयर बाजार से करीब 18 अरब डॉलर निकाल चुके हैं। इससे रुपये पर दबाव और बढ़ गया। वहीं अमेरिका द्वारा 50% तक के टैरिफ लगाए जाने की आशंका ने निर्यातकों की डॉलर आमदनी पर भी खतरा पैदा कर दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि मजबूत आयात मांग के चलते डॉलर की जरूरत बनी हुई है, जिससे रुपये पर दबाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। यही वजह है कि RBI को बीच-बीच में बाजार में उतरना पड़ रहा है।
आगे कितना मजबूत हो सकता है रुपया?
विशेषज्ञों की मानें तो, जब तक भारत-अमेरिका व्यापार समझौता अंतिम रूप नहीं ले लेता, तब तक रुपये के 90 के स्तर से ज्यादा मजबूत होने की संभावना कम है। हालांकि, RBI की सक्रियता से यह साफ है कि केंद्रीय बैंक रुपये में तेज और अनियंत्रित गिरावट को बर्दाश्त नहीं करेगा।
रुपये में मजबूती और RBI के भरोसेमंद हस्तक्षेप का असर शेयर बाजार पर भी दिखा। निवेशकों के सेंटिमेंट में सुधार आया और प्रमुख सूचकांकों में बढ़त दर्ज की गई। कुल मिलाकर, RBI की सख्त दखल ने साफ संकेत दे दिया है कि वह रुपये की गिरावट पर कड़ी नजर रखे हुए है। हालांकि वैश्विक हालात और विदेशी निवेश की दिशा तय करेगी कि आने वाले दिनों में रुपया कितनी मजबूती बनाए रख पाता है।












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