चंद्रयान-3 बनाने में TATA-गोदरेज समेत 400 कंपनियों का है सहयोग, जानें किस कंपनी ने क्या बनाया?
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने 14 जुलाई को अपना तीसरा चंद्र मिशन चंद्रयान-3 सफलतापूर्वक लॉन्च किया था। आज शाम 6 बजे चंद्रयान 3 चांद पर उतरने वाला है। लैंडिंग सफल होते ही भारत दक्षिणी ध्रुव पर सॉफ्ट लैंडिंग करने वाला दुनिया का पहला देश बन जाएगा।
इस मिशन का उद्देश्य रोवर की मदद से चंद्रमा की सतह की जानकारी हासिल करना है। यही नहीं चंद्रयान 3 मिशन की सफलता भारतीय अर्थव्यवस्था की मददगार साबित होगी। चंद्रयान की सफलता इस क्षेत्र में बहुत अधिक निवेश आकर्षित करेगा।

इस मिशन का सफलता में अकेले इसरो का हाथ नहीं हैं। चंद्रयान को बनाने, लॉन्चिग समेत कई चरणों में करीब 400 निजी कंपनियों का योगदान है। इस मिशन से सफल होने के बाद जहां भारत दुनिया में एक स्पेस शक्ति के तौर पर स्थापित हो जाएगा, वही भारतीय स्पेस कंपनियों के द्वारा पूरी दुनिया के लिए खुल जाएंगे।
2022 में ग्लोबल स्पेस एक्सपीडिशन मार्केट का मूल्य 486 बिलियन अमेरिकी डॉलर था, 2032 तक ग्लोबल स्पेस एक्सपीडिशन मार्केट 1,879 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। ये निवेश भारतीय कंपनियों और भारतीय अर्थव्यवस्था को बड़ा बढ़ावा देंगे।
चंद्रयान-3 के अलग-अलग चरणों में टाटा स्टील, लॉर्सन एंड टुब्रो, भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड और गोदरेज जैसी दिग्गज और छोटी 400 कंपनियां ने अपना सहयोग दिया है। जैसे लॉन्च वाहन बूस्टर सेगमेंट और सबसिस्टम लार्सन एंड टुब्रो द्वारा तैयार किया गया था, बैटरी भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (भेल) ने दी थी और मिशन कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग वालचंद इंडस्ट्रीज ने उपलब्ध कराए थे।
लार्सन एंड टुब्रो (एलएंडटी)
इस मिशन में एलएंडटी ने कई महत्वपूर्ण घटकों की आपूर्ति की है। लॉन्च वाहन बूस्टर सेगमेंट और सबसिस्टम एलएंडटी ने तैयार किए हैं। उसने LVM-3 M-4 को बनाने में अपना योगदान दिया है। चंद्रयान-3 के मध्यम और नॉडल बकेट फलेयर को कंपनी की महाराष्ट्र स्थित पवई के मैन्युफैक्चरिंग प्लांट में बनाया गया है। कंपनी ने लॉन्च व्हीकल के सिस्टम एकीकरण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स
चंद्रयान-3 मिशन की सफलता में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स की भी भूमिका रही। राष्ट्रीय एयरोस्पेस प्रयोगशालाओं (एनएएल) ने कई अहम कंपोनेंट की आपूर्ति इसरो को की है।
भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स (भेल)
भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड ने चंद्र मिशन में बेहद ही अहम भूमिका अदा की है। रोवर और अन्य उपकरणों को पावर देने के लिए जरूरी बैट्री की सप्लाई भेल ने की है। भेल ने इसरो को 100वीं बैटरी की आपूर्ति करने का अनूठा रिकॉर्ड हासिल किया है।
पारस डिफेंस
पारस डिफेंस ने भी चंद्रयान- 3 मिशन में अहम रोल निभाया है। टेक्नोलॉजी ट्रांसफर में कंपनी का खास रोल रहा है। एनएसआईएल ने व्यावसायीकरण के लिए 363 से अधिक प्रौद्योगिकियों को स्थानांतरित किया है।
गोदरेज एयरोस्पेस
मिशन में गोदरेज एयरोस्पेस ने चंद्रयान के कई जरूरी पार्ट्स तैयार किए हैं। चंद्रयान के रॉकेट इंजन और थ्रस्टर का गोदरेज एयरोस्पेस द्वारा बनाया गया है।चंद्रयान का विकास इंजन, CE20 और सैटेलाइट थ्रस्टर्स को गोदरेज एयरोस्पेस की मुंबई स्थित बिखरोली फैसिलिटी में तैयार किया गया है। इसके अलावा मिशन के कोर स्टेज के लिए L110 इंजन का निर्माण भी गोदरेज कंपनी द्वारा ही किया गया है।
हिमसन इंडस्ट्रियल सिरेमिक
इसरो के Chandrayaan-3 मिशन में सूरत की एक कंपनी हिमसन इंडस्ट्रियल सिरेमिक ने चंद्रयान-3 के उपकरणों को अत्यधिक तापमान से बचाने के लिए महत्वपूर्ण कंपोनेंट्स की सप्लाई की है। कंपनी की ओर से तैयार किए गए Squibs 3000 डिग्री सेल्सियस के तापमान पर यान को सुरक्षित रखेंगे।
टाटा स्टील
टाटा स्टील की ओर से चंद्रयान-3 की सफल लॉन्चिंग में अहम भूमिका निभाई गई है। टाटा स्टील द्वारा तैयार की गई क्रेन ने आंध्र प्रदेश के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र में लॉन्च वाहन LVM3 M4 को असेंबल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
वालचंदनगर इंडस्ट्रीज
वालचंदनगर इंडस्ट्रीज लिमिटेड 1993 में पीएसएलवी-डी1 के पहले लॉन्च से लेकर अब तक सभी 48 लॉन्चों के लिए अहम कंपोनेंट के निर्माण में शामिल रहा है।
सेंटम इलेक्ट्रॉनिक्स
कंपनी ने भारतीय अंतरिक्ष अभियानों के लिए लगभग 300 से 500 घटक बनाए हैं।












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