सर्वे में हुआ खुलासा, 29 फीसदी भारतीय मोबाइल पेमेंट को नहीं मानते हैं सुरक्षित
जहां एक ओर नोटबंदी के दौर में पीएम मोदी भारत को कैशलेस बनाना चाहते हैं, वहीं दूसरी ओर सर्वे से खुलासा हुआ है कि 29 फीसदी भारतीय मोबाइल पेमेंट को सुरक्षित नहीं मानते हैं।
बेंगलुरु। जहां एक ओर पीएम मोदी नोटबंदी के बाद लोगों से डिजिटल पेमेंट की गुहार लगा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर भारत के करीब एक तिहाई कंज्यूमर्स मानते हैं कि मोबाइल पेमेंट सुरक्षित नहीं है। डेलॉयट द्वारा कराई गए एक स्टडी से यह बात सामने आई है कि 29 फीसदी ग्राहक मानते हैं कि मोबाइल पेमेंट सुरक्षित नहीं है। ऐसे में, जिस देश में बैंकिंग सेवाओं का इस्तेमाल करने वाले 29 फीसदी ग्राहक इसे सुरक्षित ही नहीं मानते हैं, उस देश में कैशलेस इकोनॉमी को प्रोत्साहन कैसे मिल सकता है? नोटबंदी के बाद भी बहुत से ऐसे लोग हैं जो अपने फोन से किसी मोबाइल वॉलेट ऐप या फिर मोबाइल बैंकिंग के जरिए भुगतान करने को सुरक्षित नहीं मान रहे हैं।

इस स्टडी से यह भी सामने आया है कि करीब 54 फीसदी लोग अपने मोबाइल पर फाइनेंसियल ट्रांजैक्शन के नाम पर सिर्फ अपना बैलेंस चेक करते हैं। 53 फीसदी लोग अपने स्मार्टफोन का इस्तेमाल यूटिलिटी बिल का भुगतान करने के लिए करते हैं। वहीं दूसरी ओर, 38 फीसदी लोग अपने स्मार्टफोन से पैसे ट्रांसफर करते हैं। मोबाइल पेमेंट का इस्तेमाल करने वाले बहुत से लोगों ने यह भी कहा है कि कम फायदे और क्रेडिट कार्ड पर कम रिवॉर्ड प्वाइंट मिलने की स्थिति में वह कम मोबाइल पेमेंट करते हैं। इसका सीधा मतलब यह है कि अगर मोबाइल वॉलेट पर दिए जाने वाले ऑफर कम हो जाएं, तो मोबाइल पेमेंट में भी कमी आना स्वाभाविक है।
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रिसर्च के अनुसार 54 फीसदी लोग ई-कॉमर्स कंपनियों से मोबाइल फोन खरीदना पसंद करते हैं, जबकि 39 फीसदी लोगों ने अपने मोबाइल स्टोर पर जाकर खरीदे हैं। आपको बता दें कि डेलॉयट के इस सर्वे में 2000 से भी अधिक भारतीय ग्राहकों ने हिस्सा लिया था। इस सर्वे को डेलॉयट्स ग्लोबल मोबाइल कंज्यूमर सर्वे नाम दिया है। सर्वे में हिस्सा लेने वाले अधिकतर लोगों ने अपने फोन के साथ मिलने वाले ऐप्स के अलावा करीब 20 ऐप अपने मोबाइल में इंस्टॉल किए थे।












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