भ्रामक विज्ञापनों के लिए Sensodyne पर लगा 10 लाख का जुर्माना, जानें क्या है मामला

केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) ने मंगलवार को सेंसोडाइन (Sensodyne) पर उसके भ्रामक विज्ञापनों के लिए 10 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है।

नई दिल्ली, 22 मार्च। केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) ने मंगलवार को सेंसोडाइन (Sensodyne) पर उसके भ्रामक विज्ञापनों के लिए 10 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है। इसके अलावा सेंसोडाइन को सात दिनों के अंदर अपने भ्रामक विज्ञापनों को बंद करने का आदेश दिया गया है।

Sensodyne

सात दिन में बंद करें विज्ञापन

मंगलवार को एक आधिकारिक नोटिस में कहा गया है कि सेंसोडाइन को उन विज्ञापनों को सात दिन के भीतर बंद करने का निर्देश दिया गया है जिनमें कहा गया है कि यह टूथपेस्ट दुनिया का नंबर वन टूथपेस्ट है और दुनियाभर के दंत चिकित्सक दांतों की समस्याओं से बचने के लिए इस टूथपेस्ट के इस्तेमाल की सलाह देते हैं। प्राधिकरण ने 10 लाख रुपए के जुर्माने का भी आदेश दिया है। सीसीपीए की अध्यक्ष निधि खरे ने यह आदेश जारी किया है।

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सीसीपीए ने कंपनी के सर्वे को किया खारिज

इससे पहले 9 फरवरी को भी सीसीपीए ने सेंसोडाइन को टेलीविजन, यू-ट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर भ्रामक विज्ञापनों को बंद करने का निर्देश दिया था। बता दें कि सेंसोडाइन के विज्ञापनों में बताया जाता है कि भारत के दंत चिकित्सक को विदेश में प्रेक्टिस कर रहे हैं वह झनझनाहट से बचने के लिए सेंसोडाइन रेपिड रिलीफ और सेंसोडाइन फ्रेस जेल का इस्तेमाल करने की सलाह देते हैं। विज्ञापनों में यह भी बताया गया कि दुनियाभर के दंत चिकित्सक इसके इस्तेमाल की सलाह देते हैं और यह 60 सेंकेंड के अंदर असर दिखाने लगता है।
कंपनी ने विज्ञापन के दावे को साबित करने के लिए भारत में सर्वे भी कराया, जिसे सीसीपीए ने खारिज कर दिया कि उन्होंने अपने सर्वे में केवल भारत के दंत चिकित्सकों को शामिल किया है।

सीसीपीए ने लगाया 10 लाख का जुर्माना

इसके बाद सीसीपीए ने दावों की सत्यता पर भारत के औषधि महानियंत्रक, केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) को पत्र लिखकर अपनी टिप्पणी प्रस्तुत करने के लिए कहा। अब सीडीएससीओ ने सहायक औषधि नियंत्रक, लाइसेंसिंग प्राधिकरण, सिलवासा को कंपनी द्वारा किए गए दावों की जांच करने का निर्देश दिया है। सहायक औषधि नियंत्रक ने सीसीपीए को सूचित किया है कि कंपनी के दानों की फिलहाल जांच की जा रही है। ने सहायक औषधि नियंत्रक के जवाब के बाद सीसीपीए ने कंपनी को भ्रामक विज्ञापन चलाने से मना कर दिया और 10 लाख का जुर्माना लगाते हुए सात दिन के अंदर विज्ञापन बंद करने के लिए कहा।

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