Farmers Protest: अफवाहों पर रिलायंस ग्रुप की सफाई, कहा- 'कॉरपोरेट खेती में एंट्री का कोई प्लान नहीं'
Farmers Protest: मोदी सरकार संसद के मानसून सत्र में तीन नए कृषि कानून लेकर आई थी। पहले तो इसको लेकर संसद के दोनों सदनों में जमकर हंगामा हुआ, इसके बाद पंजाब-हरियाणा समेत कई राज्यों के किसान सड़कों पर उतर आए। सरकार का कहना है कि नए कानून से किसानों को फसल बेचने संबंधित कई आजादियां मिलेंगी, जबकि किसानों का मानना है कि इस कानून के जरिए मोदी सरकार अंबानी जैसे उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाना चाहती है। इस बीच सोमवार को खुद रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (Reliance Industries) ने इस पूरे मामले में कंपनी का नाम आने पर सफाई दी है।
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रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) ने नए कानून के जरिए लाभ उठाने की अफवाहों को खारिज कर दिया। साथ ही कहा कि उनकी कॉरपोरेट खेती से जुड़े व्यवसाय में एंट्री की कोई योजना नहीं है। ना तो उनकी कंपनी ने इसके लिए कृषि भूमि खरीदी है और ना ही कॉरपोरेट खेती से संबंधित कोई अनुबंध किया है। निकट भविष्य में भी उनकी ऐसी कोई योजना नहीं है।
आरआईएल ने आगे कहा कि वो किसानों से सीधे अनाज नहीं खरीदते हैं और उसके आपूर्तिकर्ता केवल न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर ही किसानों से खरीदते हैं। रिलायंस ग्रुप और उसके सहयोगी पूरी तरह से भारतीय किसानों की आकांक्षा का समर्थन करते हैं और उनकी मेहनत के बदले उन्हें लाभ देने के लिए प्रयासरत रहते हैं। बयान में कहा गया कि अभी तक उन्होंने किसी भी तरह की सब्सिडी पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कोई भी कृषि भूमि नहीं खरीदी है।
वहीं किसान आंदोलन के दौरान जियो के टावरों को पंजाब में नुकसान पहुंचाया गया है। जिस पर रिलायंस ने कहा कि कई उपद्रवी उनकी टेलीकॉम सेवाओं में बाधा डालने की कोशिश कर रहे हैं। इसमें उनके व्यापारिक प्रतिद्वंदी भी उपद्रवियों का साथ दे रहे हैं। ऐसे में उन्होंने पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की है। जिसमें कोर्ट से मांग की गई कि वो सरकार को निर्देश दें कि टावरों को नुकसान पहुंचाने वाले लोगों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाए।












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