RBI Monetary Policy: आरबीआई के फैसले से FD में पैसा लगाने वालों को फायदा, होम लोन लेने वालों पर बढ़ेगा बोझ

नई दिल्ली। RBI Monetary Policy. रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने आज मौद्रिक समीक्षा बैठक के बाद नीतिगत दर रेपो रेट की घोषणा की। आरबीआई( RBI) ने एक बार फिर से रेपो रेट( REPO Rate) को अपरिवर्तित रखा। रेपो रेट को 4 फीसदी पर बनाए रखने का फैसला किया। वहीं कैश रिजर्व रेशियो( CRR) में बदलाव की घोषणा की। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया( Reserve Bank of India) ने बैंकों को CRR (कैश रिजर्व रेशियो) को अगले चार महीने में 3 फीसदी से बढ़ाकर 4 फीसदी करने को कहा है। CRR में बढ़ोतरी का असर सीधा आपकी जेब पर होगा।

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     RBI के फैसले से इन लोगों को मिली खुशी

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    रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने बैंकों को मई 2021 तक सीआरआर को बढ़ाकर 4 फीसदी करने का निर्देश दिया है। रिजर्व बैंक के इस फैसले का असर आम जनता पर होगा। जहां लोन लेने वालों को झटका लगेगा तो वहीं सीनियर सिटिजन, एफडी करवाने वालों को फायदा होगा। बैंक में पैसा जमा करने वालों को पहले से ज्यादा ब्याज मिलेगा। फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) की ब्याज दरों में बढ़ोतरी हो सकती है। आइए समझे इसका पूरा गणित

     FD की ब्याज दर में हो सकती है बढ़ोतरी

    FD की ब्याज दर में हो सकती है बढ़ोतरी

    RBI के फैसले का असर बैंक में पैसा रखने वालों पर होगा। आपको बताएं कि CRR के तहत बैंकों को अपनी बैलेंसशीट का एक फिक्स्ड हिस्सा आरबीआई के पास जमा करना पड़ता है। इस जमा रकम पर बैंकों को ब्याज भी मिलता है। वर्तमान में बैंकों को CRR 3 फीसदी है, जिसे RBI ने अगले 4 महीनों में बढ़ाकर 4% कर दिया गया है। बैंकों को अब पहले से ज्यादा ब्याज मिलेगा। जब बैंक को देगा। यानी जब बैंकों को 1% ज्यादा ब्याज मिलेगा तो आपको बैंक भी ज्यादा ब्याज देगा। CRR में बढ़ोतरी से बैंकों के पास लिक्विडिटी घटेगी। बैंकों की लिक्विडिटी बढ़ने से बैंकों पर ग्राहकों के लिए ब्याज दरों को बढ़ाने का दवाब बढ़ेगा। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि बैंक FD पर ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकते हैं।

     कर्ज होगा महंगा

    कर्ज होगा महंगा

    जहां FD की ब्याज दरों में बढ़ोतरी होगी तो वहीं कर्ज लेने वालों को भी झटका लगेगा। ऐसा इसलिए क्योंकि CRR बढ़ने से बैंकों के पास पूंजी की कमी हो जाती है। उन्हें अपना बड़ा हिस्सा रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के पास सुरक्षित रखना पड़ता है। ऐसे में बैंकों के पास ग्राहकों को कर्ज देने के लिए रकम कम रह जाती है, जिसके चलते वो ग्राहकों को अधिक ब्याज पर कर्ज मुहैया करवाते हैं। वहीं अगर CRR घटती है तो बाजार में लिक्वडिटी बढ़ जाती है। बाजार में ज्यादा लिक्विडिटी से देश में महंगाई बढ़ने लगती है।

     क्या होता है CRR

    क्या होता है CRR

    कैश रिजर्व रेश्यो यानी CRR का मतलब होता है नकद सुरक्षित अनुपात। आरबीआई ने सभी बैंकों के लिए CRR को अनिवार्य कर रखा है। जिसे देश के सभी सरकारी और निजी बैंकों को मानना होता है। CRR के तहत देश के सभी बैंकों को अपनी पूंजी का एक सुरक्षित हिस्सा RBI के पास रखना होता है। ये रकम बैंकों का सुरक्षित रकम होता है।

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