Go First ही नहीं भारत की ये बड़ी एयरलाइंस भी हो चुकी हैं बंद,ये रही वजहें
सस्ती हवाई यात्रा करने वाली एयरलाइन कंपनी गो फर्स्ट (Go First) दिवालिया होने के कगार पर पहुंच चुकी है।

सस्ते हवाई सफर का वादा करने वाली गो फर्स्ट बड़े आर्थिक संकट से जूझ रही है। कंपनी ने खुद के दिवालिया होने का ऐलान कर दिया है। कंपनी ने अगले दो दिनों के लिए अपनी सभी उड़ानें भी रद्द कर दी हैं। नकदी संकट से जूझ रही एयरलाइंस ने अमेरिकी इंजन कंपनी को इसके लिए दोषी बताया है।
गो फर्स्ट पर सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ बड़ौदा , आईडीबीआई बैंक , एक्सिस बैंक और ड्यूश बैंक की करीब 6500 करोड़ रुपए का कर्जा है। बताया जा रहा है कि, कंपनी पर करीब 11,463 की देनदारी है।
यह पहली बार नहीं जब किसी भारतीय एयरलाइन का ऐसा हाल हुआ है। इससे पहले 2019 में जेट एयरवेज और उससे पहले विजय माल्या के स्वामित्व वाली किंगफिशर एयरलाइंस का भी ऐसा ही हाल हुआ है।

गो फर्स्ट
कंपनी के बंद होने की की वजह वित्तीय संकट और इंजन बनाने वाली अमेरिकी कंपनी प्रैट एंड विटनी की ओर से सप्लाई बंद करना है। इंजन बनाने वाली कंपनी प्रैट एंड विटनी का कहना है कि गो फर्स्ट ने उसे समय पर पैसे नहीं चुकाया है जिस वजह से उसे इंजन की सप्लाई नहीं की गई है।
दिवालिया की कगार पर खड़ी गो फर्स्ट पर बैंकों का कुल करीब 6520 करोड़ रुपये का कर्ज है। एनबीएफसी, वेंडर, एयरक्राफ्ट लीजिंग कंपनी को मिलकर कुल बकाया 11,460 करोड़ रुपये है। गो फर्स्ट ने कोविड संकट के दौरान शुरू की गई सरकार की इमरजेंसी क्रेडिट गारंटी स्कीम के तहत भी 1,292 करोड़ रुपये का एक अलग कर्ज लिया था।

जेट एयरवेज
2019 में पैसों की कमी के चलते जेट एयरवेज भी बंद हो गई थी। जेट एयवेज के प्रोमोटर तो नरेश गोयल थे। प्रबंधन की नाकामियों की वजह से यह कंपनी बंद हो गई थी। जेट एयरवेज लीज पर मिले विमानों के लिए पेमेंट नहीं कर पाई। जिसके बाद उन कंपनियों ने अपने एयरक्राफ्ट वापस ले लिए थे। एयरलाइन पर बैंकों का 8,500 करोड़ रुपये से अधिक का बकाया था। जब कंपनी दिवालिया हुई तो उसके पास उस समय करीब 123 विमान थे।
किंगफिशर
2003 में शराब के कारोबारी विजय माल्या द्वारा शुरू की गई किंगफिशर एयरलाइंस 2011 तक भारत के डोमेस्टिक मार्केट की दूसरी सबसे बड़ी कंपनी है। लेकिन अचानक 2012 में कंपनी का दिवाला निकल गया। विजय माल्या की किंगफिशर ने अपने कारोबार को 2012 में समेट लिया। कंपनी बुरी तरह से कर्ज में डूब गई थी। किंगफिशर के मालिक विजय माल्या पर बैंकों के 9 हजार करोड़ रुपये का बकाया है। माल्या अभी भगोड़ा घोषित हैं।

सहारा एयरलाइंस
सहारा एयरलाइंस को 20 सितंबर 1991 में स्थापित किया गया था। दिसंबर, 1993 में इसका परिचालन शुरू हुआ। 2 अक्टूबर, 2000 को एयरलाइन का नाम बदलकर एयर सहारा कर दिया गया। इसने भारत के घरेलू उड़ान बाजार के 12 प्रतिशत को अपने चरम पर नियंत्रित किया। 2007 में एयरलाइन की हिस्सेदारी 11 प्रतिशत से गिरकर 8.5 प्रतिशत रह गई। बाद में जेट एयरवेज ने 340 मिलियन डॉलर में सहारा का अधिग्रहण किया और इसका नाम बदलकर जेटलाइट कर दिया।
दमानिया एयरवेज
1993 में स्थापित की गई थी। दमानिया एयरवेज मार्केट में सर्वाइव नहीं कर पाई। इसे रवि प्रकाश खेमका ने खरीद लिया। इसे स्काईलाइन एनईपीसी नाम से फिर शुरू किया गया, लेकिन कंपनी असफल रही।
एयर डेक्कन
2003 में उद्यमी जीआर गोपीनाथ द्वारा स्थापितयह भारत की पहली कम लागत वाली एयरलाइन थी। जिसका किराया अपने प्रतिस्पर्धियों की तुलना में 30-40 प्रतिशत कम था। किंगफिशर एयरलाइंस के संस्थापक विजय माल्या ने इस एयरलाइन को 2007 में खरीद लिया। किंगफिशर के साथ ये कंपनी भी बंद हो गई। एयर डेक्कन ने 2017 में फिर से परिचालन शुरू किया। हालांकि, अप्रैल 2020 में एयरलाइन कोरोनोवायरस महामारी बंद हो गई।












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