New Financial Year: 1 अप्रैल से लागू हो रहे नए टैक्स नियम, जानिए पुराने रूल्स से कैसे हैं अलग
नए वित्तीय वर्ष से टैक्स नियमों में कुछ अहम बदलाव किए हैं। सरकार का कहना है कि इससे कई करदाताओं को इससे फायदा होगा। इसके बावजूद पुरानी कर व्यवस्था से भी आइटीआर भरा जा सकेगा।

New Financial Year: नए वित्तीय वर्ष में कर व्यवस्था को लेकर कई बड़े बदलाव लागू किए गए हैं, जो 1 अप्रैल से प्रभावी हैं। नए कर नियम को लेकर दावा किया जा रहा है ये कई मायनों में लाभकारी है। सरकार का कहना है कि इससे कई करदाता प्रभावित होंगे। नई कर व्यवस्था के डिफॉल्ट रूप में उपलब्ध होगी। लेकिन अगर कोई करदाता पुरानी व्यवस्था के जरिए टैक्स का भुगतान करना चाहता है तो उसके भी व्यवस्था दी गई है। ऐसे टैक्सपेयर्स को पुरानी व्यवस्था का विकल्प चुनना होगा।
वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने केंद्रीय बजट को पेश करते हुए इसकी जानकारी दी थी। उन्होंने पर बजट पर अपने भाषण में कहा था कि नई कर कर व्यवस्था ही डिफॉल्ट व्यवस्था होगी। हालांकि, करदाताओं के पास पुरानी कर व्यवस्था को चुनने का भी विकल्प होगा। पुरानी कर व्यवस्था के तहत, करदाताओं को आवास किराया भत्ता, होम लोन पर ब्याज, बच्चों की शिक्षा भत्ता और पेशेवर कर कटौती के तहत क्लेम करने की अनुमति थी। जबकि रिपोर्ट्स के मुताबिक नई कर व्यवस्था के तहत ऐसे क्लेम की अनुमति नहीं होगी।
नई कर व्यवस्था के तहत नए टैक्स स्लैब लागू होंगे। जिसके तहत कर छूट की सीमा मौजूदा 5 लाख रुपये से बढ़ाकर 7 लाख रुपये होगी। यानी 7 लाख रुपये तक की वार्षिक आय वाले व्यक्तियों पर कोई कर नहीं लगाया जाएगा।
नए टैक्स स्लैब-
3 लाख रुपये और 6 लाख रुपये की आय वाले हिस्से पर 5% टैक्स
6 लाख रुपये से 9 लाख रुपये तक पर 10%
9 लाख रुपये से 12 लाख रुपये तक पर 15% टैक्स
12 लाख रुपये से 15 लाख रुपये तक 20% टैक्स
15 लाख रुपये और उससे अधिक पर 30% फीसदी कर लगेगा
कैसे कैलकुलेट होगा टैक्स
टैक्स स्लैब का मतलब ये है कि 3 लाख रुपए तक की आय करमुक्त होगी। लेकिन तीन लाख से ऊपर शेष राशि जिस स्लैब में आएगी उसके हिसाब से टैक्स लगाया जाएगा। यानी अगर किसी की वार्षिक आय 10 लाख रुपए है तो उस पर फ्लैट 15% टैक्स दरों से कर नहीं लगाया जाएगा। नई कर व्यवस्था के तहत 3 लाख रुपये से 6 लाख रुपये के बीच की आय पर 5 प्रतिशत (15,000 रुपये कर) कर लगेगा। शेष 6 से 9 लाख के बीच स्लैब के अनुसार 30,000 रुपए और शेष 1 लाख पर 15 प्रतिशत की दर से कर लिया जाएगा।
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