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New Income Tax Bill: इस साल से लागू होगा नया इनकम टैक्स बिल, क्या-क्या जाएगा बदल, कितना पड़ेगा आपके ऊपर असर?

New Income Tax Bill: भारत के करोड़ों टैक्सपेयर्स के लिए साल 2025 एक ऐतिहासिक मोड़ साबित हुआ है। 1961 के पुराने और पेचीदा इनकम टैक्स एक्ट को पीछे छोड़ते हुए, केंद्र सरकार ने 'न्यू इनकम टैक्स बिल 2025' को संसद से मंजूरी दिला दी है। यह नया कानून न केवल टैक्स फाइलिंग को आसान बनाएगा, बल्कि आम आदमी की जेब में अधिक बचत भी सुनिश्चित करेगा।

यह नया कानून 1 अप्रैल 2026 से पूरे देश में प्रभावी होगा। इसका सबसे बड़ा असर वित्त वर्ष 2026-27 की आईटीआर (ITR) फाइलिंग में दिखाई देगा। सरकार का लक्ष्य 60 साल पुराने जटिल कानूनों को सरल बनाना और पूरी प्रक्रिया को डिजिटल करना है।

New Income Tax Bill 2025

5 बड़े बदलाव जो हर टैक्सपेयर को जानना जरूरी है-

1. 'Tax Year' का नया कॉन्सेप्ट

अब तक टैक्सपेयर्स 'Previous Year' और 'Assessment Year' के तकनीकी शब्दों में उलझे रहते थे। नए बिल में इन दोनों को खत्म कर केवल 'Tax Year' का सरल नाम दिया गया है। इससे गणना करना और रिटर्न भरना बहुत आसान हो जाएगा।

2. पेंशनर्स और LIC पॉलिसीधारकों को फायदा

पेंशन का एक हिस्सा एकमुश्त (Commuted Pension) लेने पर अब तक केवल सरकारी कर्मचारियों को ही टैक्स छूट मिलती थी। लेकिन अब गैर-सरकारी कर्मचारियों (Non-Employees) और LIC जैसे संस्थानों से पेंशन लेने वालों को भी एकमुश्त रकम पर डिडक्शन (छूट) का लाभ मिलेगा।

3. लेट ITR पर भी नहीं रुकेगा रिफंड

अक्सर समय सीमा समाप्त होने के बाद रिटर्न फाइल करने पर रिफंड अटक जाता था। नए बिल के तहत नियमों को लचीला बनाया गया है। अब देरी से ITR भरने पर भी रिफंड मिलने में कोई कानूनी बाधा नहीं आएगी।

4. प्रॉपर्टी मालिकों के लिए खुशखबरी

स्टैंडर्ड डिडक्शन: म्युनिसिपल टैक्स चुकाने के बाद रेंटल इनकम पर 30% तक की छूट मिलेगी।

ब्याज पर राहत: घर बनने से पहले चुकाए गए ब्याज पर डिडक्शन अब 'Self-occupied' और 'Rented' दोनों तरह की प्रॉपर्टी पर लागू होगी।

खाली प्रॉपर्टी: अगर आपकी कोई बिजनेस प्रॉपर्टी लंबे समय से खाली है, तो उस पर टैक्स नहीं लगेगा।

5. डिजिटल CBDT और आसान भाषा

नए कानून को 536 धाराओं में इस तरह लिखा गया है कि एक आम आदमी भी इसे आसानी से समझ सके। CBDT को अब अधिक शक्तियां दी गई हैं ताकि जांच, नोटिस और समाधान की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन और पारदर्शी हो सके।

निवेश और बचत पर क्या होगा असर?

शून्य टीडीएस (Zero TDS): जिनकी आय टैक्स सीमा से कम है, वे अब आसानी से 'जीरो टीडीएस सर्टिफिकेट' प्राप्त कर सकेंगे।

डिविडेंड राहत: निवेशकों के लिए सेक्शन 80M की वापसी से डिविडेंड आय पर टैक्स का बोझ कम होने की उम्मीद है।

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