Muharram Bank Holiday 2026: 'मुहर्रम- चौथा शनिवार और रविवार', क्या 3 दिन लगातार बंद रहेंगे बैंक?
Muharram Bank Holiday 2026: 26 जून को 'मुहर्रम' है, इसलिए कई राज्यों में इस दिन बैंक बंद रहेंगे, हालांकि यह छुट्टी पूरे देश में एक समान नहीं है, क्योंकि बैंक अवकाश राज्यवार RBI की सूची के अनुसार तय होते हैं। RBI के अवकाश कैलेंडर के मुताबिक, 26 जून को बेंगलुरु, मुंबई, दिल्ली, चेन्नई, हैदराबाद, कोलकाता, लखनऊ, पटना, रायपुर, रांची समेत कई शहरों में बैंक बंद रहेंगे। वहीं कुछ राज्यों में बैंक सामान्य रूप से खुले रहेंगे।

26 जून से शुरू होगा लंबा बैंक वीकेंड
26 जून 2026 को शुक्रवार के दिन मुहर्रम का अवकाश रहेगा। इसके बाद 27 जून को चौथा शनिवार होने के कारण बैंकों में नियमित छुट्टी रहेगी, जबकि 28 जून को साप्ताहिक अवकाश (रविवार) रहेगा। इस वजह से कई राज्यों में बैंक शाखाएं लगातार तीन दिनों तक बंद रहेंगी।

किन राज्यों में 3 दिन बंद रहेंगे बैंक?
- उत्तर प्रदेश
- दिल्ली
- महाराष्ट्र
- बिहार
- पश्चिम बंगाल
- कर्नाटक
- आंध्र प्रदेश
- छत्तीसगढ़
- झारखंड
- जम्मू-कश्मीर
- मध्य प्रदेश
- मिजोरम
- तमिलनाडु
- तेलंगाना
- त्रिपुरा
ग्राहकों को क्या-क्या दिक्कत हो सकती है?
लगातार तीन दिनों तक बैंक बंद रहने से उन ग्राहकों को परेशानी हो सकती है जिन्हें बैंक मैनेजर के हस्ताक्षर की जरूरत हो या लॉकर संचालन करना हो या फिर डिमांड ड्राफ्ट बनवाना हो, इसके अलावा जिन्हें केवाईसी दस्तावेज या चेक को जमा करना है, उन्हें दिक्कत हो सकती है।
ऑनलाइन बैंकिंग सेवाएं रहेंगी चालू
हालांकि बैंक शाखाएं बंद रहेंगी, लेकिन डिजिटल बैंकिंग सेवाएं सामान्य रूप से उपलब्ध रहेंगी। ग्राहकों को निम्न सुविधाएं मिलती रहेंगी:
- UPI भुगतान
- इंटरनेट बैंकिंग
- मोबाइल बैंकिंग ऐप
- NEFT ट्रांसफर
- RTGS ट्रांजैक्शन
- IMPS सेवा
- एटीएम से नकदी निकासी
आरबीआई कैसे तय करता है बैंक छुट्टियां?
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) बैंक अवकाशों को मुख्य रूप से तीन श्रेणियों में वर्गीकृत करता है:
- नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट के तहत अवकाश
- नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट एवं RTGS अवकाश
- बैंक खातों के समापन से संबंधित अवकाश
मुहर्रम इस्लामी कैलेंडर का पहला महीना
मुहर्रम इस्लामी कैलेंडर का पहला महीना है और इसे मुस्लिम समुदाय के लिए अत्यंत पवित्र है। यह महीना विशेष रूप से 10वीं तारीख, यानी आशूरा, के कारण महत्वपूर्ण है। इस दिन 680 ईस्वी में इमाम हुसैन और उनके साथियों ने इराक के कर्बला में सत्य, न्याय और मानवता की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया था। मुहर्रम का महीना शोक, आत्मचिंतन, त्याग और धार्मिक श्रद्धा का प्रतीक माना जाता है।
साहस, बलिदान और इंसानियत का पर्व है मुहर्रम
शिया मुस्लिम समुदाय इमाम हुसैन की शहादत की याद में मजलिस और जुलूस का आयोजन करता है। मुहर्रम का संदेश अन्याय के खिलाफ खड़े होने, सत्य का साथ देने और मानव मूल्यों की रक्षा करने का है। यही कारण है कि मुहर्रम केवल एक धार्मिक अवसर नहीं, बल्कि साहस, बलिदान और इंसानियत की मिसाल के रूप में भी याद किया जाता है।














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