बच्चों की पढ़ाई को लेकर परेशान होती थीं मां, भारतीय मूल की महिला ने स्टार्ट अप शुरू कर कमा रहीं अरबों रुपये

Succes Story: कामकाजी महिलाओं को अपने बच्चों के लालन-पालन के लिए बहुत तकलीफ उठानी पड़ती है। बच्चों को पढ़ाने के लिए उन्हें अपने करियर का भी बलिदान देना पड़ता है। ऐसी ही कैलिफोर्निया की एक मां के साथ हुआ है। लेकिन उन्होंने इस आपदा को अवसर में बना दिया।

कैलिफोर्निया के बे एरिया में रहने वाली 50 वर्षीय वर्किंग मदर को अपने बच्चों को स्कूल ले जाने के लिए अपना सब कुछ छोड़ना पड़ा। जब उनके बच्चों की बस समय पर नहीं पहुंचती थी। तो उन्हें छोड़ने के लिए स्कूल जाना पड़ता था। ऐसी स्थिति में उन्हें अपनी मां का त्याग याद आता था। उनकी मां ने अपने बच्चों के पालन-पोषण के लिए अपना करियर अलग रख दिया।

2015 में रितु नारायण ने अपनी नौकरी छोड़कर एआई-बैक्ड इलेक्ट्रिक स्कूल बस सेवा शुरू की। अपने स्टार्टअप जम के माध्यम से आज वे अरबों रुपये कमा रही हैं। शुरुआत में जम ने एक स्व-वित्त पोषित उबर के रूप में काम किया, जो बच्चों के पैरेंट्स को विश्वसनीय समाधान प्रदान करता था।

सीएनबीसी मेक इट की रिपोर्ट के अनुसार, इनोवेटिव ऐप ने माता-पिता को पहले से यात्रा बुक करने और रियल टाइम में अपने बच्चों को स्कूल तक पहुंचाने की सुविधा देते हैं।

उन्होंने अपने इंटरव्यू में कहा कि मुझे पता था कि जम का मॉडल कामकाजी माता-पिता के जीवन को बदल रहा है। कामकाजी महिलाएं लगातार उन्हें इसके लिए कहती थी। उन्हें अपने बच्चों को स्कूल से लाने के लिए शाम 4 बजे भागना पड़ता था।

रितु नारायण ने स्थानीय स्कूलों से माता-पिता के बीच उसके व्यवसाय को बढ़ावा देने का अनुरोध किया। उनका स्टार्टअप धीरे-धीरे काफी गति पकड़ने लगी। 2020 में ओकलैंड यूनिफाइड स्कूल डिस्ट्रिक्ट के साथ पांच साल के 53 डॉलर मिलियन के अनुबंध में प्रवेश करने के बाद स्टार्टअप को गति मिली।

रितु नारायण ने बताया कि कोरोना महामारी के दौरान स्कूल बंद होने से सभी गाड़ियां बंद हो गईं। इस स्थिति में हमें काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ा।

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