Dalai Lama Reincarnation: दलाई लामा के अवतार से पहले ही घबराया चीन! भारत की भूमिका जिंगपिंग क्यों हैं नाराज?

Dalai Lama Reincarnation: तिब्बत के धर्मगुरु Dalai Lama के अगले अवतार को लेकर भारत और China के बीच नया विवाद शुरू हो गया है। चीन ने भारत को साफ चेतावनी दी है कि दलाई लामा के पुनर्जन्म की प्रक्रिया में दखल न दे।

बीजिंग चाहता है कि अगला दलाई लामा उसकी मंजूरी से चुना जाए, जबकि दलाई लामा और उनके समर्थक कहते हैं कि फैसला सिर्फ धार्मिक परंपराओं के आधार पर होगा। इसी मुद्दे ने अब तिब्बत, भारत और चीन के बीच भू-राजनीतिक तनाव को और बढ़ा दिया है।

Dalai Lama Reincarnation

चीन दलाई लामा के अगले अवतार से क्यों डरा है?

चीन को डर है कि अगर अगला दलाई लामा भारत या चीन के बाहर चुना गया तो तिब्बत पर उसका नियंत्रण कमजोर पड़ सकता है। बीजिंग चाहता है कि तिब्बती बौद्ध धर्म पर कम्युनिस्ट सरकार का पूरा असर बना रहे। इसलिए चीन ऐसा दलाई लामा चाहता है जो उसकी नीतियों का समर्थन करे। लेकिन मौजूदा दलाई लामा पहले ही संकेत दे चुके हैं कि उनका अगला जन्म चीन के नियंत्रण वाले तिब्बत में नहीं होगा। यही बात चीन की सबसे बड़ी चिंता बन गई है।

भारत की भूमिका पर चीन क्यों नाराज है?

भारत में तिब्बत की निर्वासित सरकार यानी सेंट्रल तिब्बती एडमिनिस्ट्रेशन धर्मशाला में चलती है। हजारों तिब्बती शरणार्थी भी भारत में रहते हैं। भारत सरकार आधिकारिक तौर पर 'वन चाइना' नीति मानती है, लेकिन भारतीय नेताओं ने कहा है कि दलाई लामा के उत्तराधिकारी को चुनने का अधिकार सिर्फ बौद्ध परंपराओं और दलाई लामा के अनुयायियों को है। चीन को लगता है कि भारत भविष्य में नए दलाई लामा के चयन में अहम भूमिका निभा सकता है।

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दलाई लामा चुनने की परंपरा क्या है?

तिब्बती बौद्ध धर्म में माना जाता है कि दलाई लामा मृत्यु के बाद दोबारा जन्म लेते हैं। नए अवतार की खोज वरिष्ठ भिक्षु करते हैं। वे संकेत, सपने, पवित्र झीलों में दिखाई देने वाले दृश्य और धार्मिक परंपराओं के आधार पर बच्चे की पहचान करते हैं। इसके बाद बच्चे की परीक्षा ली जाती है जिसमें उसे पुराने दलाई लामा की असली वस्तुएं पहचाननी होती हैं। अगर बच्चा सही चीजें चुन ले तो उसे दलाई लामा का पुनर्जन्म माना जाता है।

चीन की 'गोल्डन अर्न' नीति क्या है?

चीन कहता है कि दलाई लामा का चयन उसकी सरकारी प्रक्रिया के तहत होना चाहिए। इसके लिए वह 'गोल्डन अर्न' नाम की पुरानी पद्धति का हवाला देता है। इसमें सोने के कलश से पर्ची निकालकर धार्मिक नेताओं का चयन किया जाता है। बीजिंग का दावा है कि अंतिम मंजूरी चीन की सरकार ही देगी। लेकिन तिब्बती बौद्ध समुदाय का बड़ा हिस्सा इसे धार्मिक मामलों में राजनीतिक दखल मानता है और इसका विरोध करता है।

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भारत-चीन रिश्तों पर क्या असर पड़ सकता है?

दलाई लामा का मुद्दा आने वाले समय में भारत और चीन के बीच बड़ा तनाव पैदा कर सकता है। अगर अगला दलाई लामा भारत में चुना जाता है तो चीन इसे अपने खिलाफ राजनीतिक कदम मान सकता है। इससे तिब्बत आंदोलन को नई ताकत मिलेगी और LAC पर तनाव बढ़ सकता है। दूसरी तरफ भारत इस मुद्दे को धार्मिक स्वतंत्रता और सांस्कृतिक अधिकारों से जोड़कर देखता है। इसलिए आने वाले वर्षों में यह मामला एशिया की बड़ी भू-राजनीतिक लड़ाई बन सकता है।

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