Petrol Diesel Price Hike: ‘तिल-तिल मार रही है सरकार', पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने पर AAP का केंद्र पर हमला
Petrol Diesel Price Hike: देशभर में पेट्रोल और डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों को लेकर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। आम आदमी पार्टी (AAP) ने ईंधन की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी पर केंद्र सरकार को घेरते हुए आरोप लगाया है कि मोदी सरकार आम जनता पर महंगाई का बोझ बढ़ा रही है।
AAP के वरिष्ठ नेता अनुराग ढ़ाडा ने पेट्रोल-डीजल की नई कीमतों को लेकर केंद्र पर तीखा हमला बोला और कहा कि सरकार जनता को एक झटके में नहीं, बल्कि तिल-तिल मार रही है।

दरअसल, बीते 10 दिनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार चौथी बार इजाफा हुआ है। राजधानी दिल्ली में अब पेट्रोल की कीमत 100 रुपये के पार पहुंच चुकी है। ताजा बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपये प्रति लीटर और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। इससे आम लोगों के घरेलू बजट पर सीधा असर पड़ रहा है, वहीं परिवहन और जरूरी सामानों की लागत बढ़ने की आशंका भी गहरा गई है।
Anurag Dhanda X Post Petrol Diesel Price: AAP का केंद्र सरकार पर सीधा हमला
AAP नेता अनुराग ढ़ाडा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि मोदी सरकार धीरे-धीरे आम जनता की जेब पर हमला कर रही है। उन्होंने लिखा, मोदी सरकार जनता को तिल-तिल मार रही है, एक झटके में नहीं। पिछले 10 दिनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 7.50 रुपये तक की बढ़ोतरी हो चुकी है। दिल्ली में आज पैट्रोल सौ के पार हो गया।पैट्रोल 102.12 रुपये और डीजल 95.20 रुपये।
15 मई: कीमतों में ₹3 प्रति लीटर की बढ़ोतरी
19 मई: पेट्रोल और डीज़ल के दाम में 90 पैसे की बढ़ोतरी
23 मई: पेट्रोल में 87 पैसे और डीजल की कीमतों में 91 पैसे प्रति लीटर का इजाफा और आज 25 मई को पेट्रोल 2.61 और डीजल 2.71 रेट बढ़ोतरी
क्यों बढ़ रहे हैं पेट्रोल-डीजल के दाम?
विशेषज्ञों के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव की वजह से भारत पर दबाव बढ़ा है। अमेरिका-ईरान संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर पैदा हुई अनिश्चितता ने वैश्विक तेल बाजार को प्रभावित किया है।
भारत अपनी जरूरत का लगभग 88 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी और वैश्विक तेल कीमतों में तेजी का सीधा असर घरेलू ईंधन दरों पर पड़ रहा है। तेल कंपनियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में लगातार बढ़ती कीमतों की वजह से उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ रहा था, जिसके बाद कीमतों में संशोधन किया गया।














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