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जेएसडब्ल्यू: इस सक्सेस स्टोरी में दिखेगा सुपर फास्ट अंदाज

बेंगलुरु (अजय मोहन)। क्या आप जानते हैं भारत में कितने स्टील प्लांट हैं? कौन सी कंपनी सबसे ज्यादा इस्पात का उत्पादन करती है? इस्पात के क्षेत्र में अग्रणी कंपनी किस रफ्तार से आगे बढ़ रही है? और ये रफ्तार देश के विकास को कितनी गति प्रदान करेगी? जेएसडब्ल्यू की सक्सेस स्टोरी में आपको इन सभी सवालों के जवाब मिलेंगे। क्योंकि इस सक्सेस स्टोरी में झलकता है सुपर फास्ट अंदाज।

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1994 में कर्नाटक के बेल्लारी-होस्पेट के बीच तोरणगलु में जेवीएसएल नाम की एक कंपनी आयी और स्टील प्लांट लगाना शुरू किया। 3700 एकड़ की जमीन पर विजयनगर स्टील प्लांट के नाम से यहां स्टील प्लांट लगा। पहले ब्लास्ट फरनेस और फिर कोरेक्स फरनेस और 11 साल के भीतर यहां इस्पात का उत्पादन शुरू हो गया।

और फिर इसका नाम बदल कर जेएसडब्ल्यू कर दिया गया। आस-पास का इलाका जो बंजर पड़ा था, वह एक टाउनश‍िप में तबदील हो गया।

टाउरश‍िप ऐसी, जहां मल्टी स्पेश‍ियालिटी हॉस्प‍िटल से लेकर स्टेडियम तक हैं। बच्चों की पढ़ाई की बेहतरीन व्यवस्था से लेकर कर्मचारियों और आस-पास के गांवों के लिये सभी जरूरी सुविधाएं हैं। लेकिन यह सब एक दिन का खेल नहीं है। ये एक-एक कर्मचारी की कड़ी मेहनत का नतीजा है।

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जेएसडब्ल्यू से जुड़े रोचक तथ्य

  • जेएसडब्ल्यू 1 करोड़ टन सालाना इस्पात का उत्पादन करने वाली भारत की पहली कंपनी है।
  • यह भारत की सबसे तेज आगे बढ़ने वाली इस्पात कंपनी है।
  • 1996 में देश की पहली कोरेक्स फरनेस यूनिट यहीं पर स्थापित की गई थी। जो मात्र दो साल के भीतर चालू भी हो गई।
  • कोरेक्स वह यूनिट होती है, जिसमें इस्पात उत्पादन के दौरान न के बराबर प्रदूषण होता है।
  • जेएसडब्ल्यू में पहला ऑक्सीजन प्लांट 1999 में लगाया गया।
  • जेएसडब्ल्यू में अपशिष्ट के रूप में निकलने वाले उत्पाद को सीमेंट के रूप में तैयार किया जाता है। जिसके लिये अलग से एक सीमेंट प्लांट है।
  • इस्पात के अलावा एयर सैपरेशन के माध्यम से जेएसडब्ल्यू ऑक्सीजन, हाईड्रोजन व नाइट्रोजन के प्लांट भी लगाती है।
  • यह कंपनी करीब 1700 मेगावॉट का बिजली उत्पादन करती है, जिसे तोरणगलु के अलावा महाराष्ट्र तक सप्लाई किया जाता है।
  • यह भारत की पहली इस्पात कंपनी है जिसने टोटल इंटीग्रेटेड रीसोर्स प्लानिंग सॉल्यूशन के तहत काम किया।
  • 2009 में जेएसडब्ब्ल्यू सबसे ज्यादा इस्पात उत्पादन करने वाली कंपनी बन गई।
  • जेएसडब्ल्यू के स्टील प्लांट में प्रति दिन 500 टन इस्पात बनता है।
  • भारत में सबसे बड़ी ब्लास्ट फरनेस जेएसडब्ल्यू के विजयनगर प्लांट में है। इसे 2009 में स्थापित किया गया था।
  • जेएसडब्ल्यू इस वक्त 1.2 करोड़ टन इस्पात उत्पादन करती है, जिसका 2016 तक का लक्ष्य 1.6 करोड़ टन है।
  • 2020 तक जेएसडब्ल्यू का लक्ष्य 2 करोड़ टन और 2025 तक 4.5 करोड़ टन स्टील प्रति वर्ष का लक्ष्य है।
  • इस प्लांट के लिये ब्राजील और ऑस्ट्रेलिया से कोयला व अन्य चीजें लायी जाती हैं।
  • यह कंपनी मेक इन इंडिया में बड़ी भूमिका निभा रही है।

मेक इन इंडिया में रुकावटें

जिंदल स्टील वर्ल्ड के वाइस प्रेसिडेंट (एडमिन) मंजुनाथ प्रभु के वनइंडिया से बातचीत में कहा कि मेक इन इंडिया प्लान देश को नई ऊंचाईयों तक पहुंचा सकता है। इसमें कोई शक नहीं कि इससे भारत विश्व पटल पर एक नये निर्माता के रूप में उभरेगा।

इस्पात के क्षेत्र में बात करते हुए मंजुनाथ प्रभु ने कहा कि चीन हमसे 10 गुना ज्यादा इस्पात बनाता है और अलग-अलग देशों में सप्लाई करता है। अगर भारत अपनी नीतियों में थोड़े से परिवर्तन करे, तो चीन के मार्केट को डाउन कर सकता है। हमारे पास बहुत बड़ी मैन पावर है और सबसे बड़ी बात प्राकृतिक संपदा है, जो किसी भी रुकावट को किनारे कर सकती है।

अगर जेएसडब्ल्यू की बात करें तो वर्तमान में इस कंपनी की खुद की कोई खान नहीं है। आयरन ओर खरीदनी पड़ती है। अगर सरकार खनन की इजाजत दे दे, तो कंपनी की लागत कीमत में 30 प्रतिशत की कमी आ सकती है। और ऐसा होने पर उत्पादन भी बढ़ेगा और हम आगे मार्केट में अपने दायरे को बढ़ाने में भी सफल हो सकेंगे।

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