IRCTC F&O Out: रेलवे के शेयर में पैसा लगाने वालों के लिए बड़ी खबर, F&O से बाहर होने का मतलब क्या? अब क्या करें
IRCTC out of F&O from February 2026: भारतीय रेलवे की ऑनलाइन टिकटिंग और कैटरिंग कंपनी IRCTC एक बार फिर बाजार की सुर्खियों में है। वजह कोई तिमाही नतीजा या बड़ा ऑर्डर नहीं, बल्कि डेरिवेटिव्स से जुड़ा अहम फैसला है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी NSE ने ऐलान किया है कि फरवरी 2026 से IRCTC को फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस सेगमेंट से हटा दिया जाएगा। इस खबर के बाद ट्रेडर्स और निवेशकों के बीच हलचल तेज हो गई है।
क्यों F&O से बाहर हो रहा है IRCTC?
दरअसल सेबी ने अगस्त 2024 में डेरिवेटिव्स से जुड़े नियमों को सख्त कर दिया था। नए नियमों के मुताबिक किसी भी स्टॉक को F&O में बने रहने के लिए लिक्विडिटी और ट्रेडिंग से जुड़े कुछ ऊंचे मानकों को पूरा करना जरूरी है। इसमें MQSOS यानी मीडियन क्वार्टर सिग्मा ऑर्डर साइज को 75 लाख रुपये करना, मार्केट वाइड पोजिशन लिमिट को 1500 करोड़ रुपये तक बढ़ाना और कैश मार्केट में एवरेज डेली डिलीवरी वैल्यू को 35 करोड़ रुपये तक लाना शामिल है। IRCTC इन नए पैमानों पर खरा नहीं उतर पाया। इसी वजह से NSE ने इसे डेरिवेटिव्स से हटाने का फैसला लिया।

🟡 F&O क्या होता है? (what is F&O)
जो लोग शेयर बाजार से ज्यादा वाकिफ नहीं हैं, उन्हें बता दें कि F&O यानी फ्यूचर्स और ऑप्शंस शेयर बाजार का डेरिवेटिव सेगमेंट होता है। इसमें निवेशक किसी शेयर या कमोडिटी को सीधे खरीदे बिना उसकी आने वाली कीमतों पर दांव लगा सकते हैं या अपने निवेश को जोखिम से सुरक्षित (हेज) कर सकते हैं।
इस तरह की ट्रेडिंग में कम पूंजी यानी मार्जिन के जरिए बड़ी पोजीशन ली जा सकती है, इसलिए मुनाफा जितना तेजी से बढ़ सकता है, उतना ही नुकसान भी कई गुना हो सकता है। F&O कॉन्ट्रैक्ट्स की एक तय एक्सपायरी डेट होती है, जिस दिन सौदा खत्म हो जाता है।
फ्यूचर्स में तय कीमत पर खरीद या बिक्री करना अनिवार्य होता है, जबकि ऑप्शंस में निवेशक के पास सिर्फ खरीदने या बेचने का अधिकार होता है, मजबूरी नहीं। यही वजह है कि F&O ट्रेडिंग को हाई-रिस्क लेकिन हाई-रिटर्न वाला सेगमेंट माना जाता है।
🟡 कब तक मिलेंगे F&O कॉन्ट्रैक्ट?
यह बात साफ कर दी गई है कि IRCTC पर तुरंत F&O ट्रेडिंग बंद नहीं होगी। दिसंबर 2025, जनवरी 2026 और फरवरी 2026 में एक्सपायर होने वाले मौजूदा कॉन्ट्रैक्ट्स ट्रेडिंग के लिए उपलब्ध रहेंगे। इन महीनों के लिए नए स्ट्राइक प्राइस भी आते रहेंगे। लेकिन फरवरी 2026 की एक्सपायरी के बाद, यानी 25 फरवरी 2026 से IRCTC पर कोई भी F&O कॉन्ट्रैक्ट नहीं बचेगा।
🟡 IRCTC ट्रेडर्स के लिए क्या बदलेगा?
ट्रेडर्स के लिहाज से यह बड़ा बदलाव है। F&O सेगमेंट से बाहर होने के बाद IRCTC में लेवरेज के जरिए बड़े दांव लगाना संभव नहीं रहेगा। ऑप्शंस के जरिए हेजिंग और शॉर्ट टर्म स्ट्रैटेजी भी खत्म हो जाएंगी। खासतौर पर उन ट्रेडर्स के लिए यह झटका है जो वोलैटिलिटी और इंट्राडे मूवमेंट से कमाई करते हैं।
आमतौर पर F&O से बाहर होने के बाद किसी स्टॉक में धीरे-धीरे उतार-चढ़ाव कम होता है। हालांकि, इसके साथ ही तेज मुनाफे के मौके भी सीमित हो जाते हैं।
🟡 फिलहाल क्यों बढ़ी हलचल?
NSE के ऐलान के बाद IRCTC में ट्रेडिंग एक्टिविटी अचानक बढ़ गई है। इसकी वजह यह है कि कई ट्रेडर्स अपने मौजूदा पोजिशन को एडजस्ट या क्लोज कर रहे हैं। जैसे-जैसे आखिरी एक्सपायरी करीब आएगी, रोलओवर प्रेशर और बढ़ सकता है। बाजार के जानकार मानते हैं कि निकट भविष्य में स्टॉक में वोलैटिलिटी बनी रह सकती है।
🟡 कैश मार्केट में IRCTC की स्थिति
F&O से बाहर होने का मतलब यह नहीं कि IRCTC की बुनियाद कमजोर हो गई है। कैश मार्केट में कंपनी अब भी मजबूत मानी जाती है। ऑनलाइन टिकटिंग, कैटरिंग और टूरिज्म में IRCTC का लगभग एकाधिकार है। कंपनी कर्ज मुक्त है और इसका फाइनेंशियल प्रोफाइल स्थिर माना जाता है।
विश्लेषकों का कहना है कि डेरिवेटिव्स से बाहर होने के बाद IRCTC के शेयर की चाल ज्यादा हद तक बिजनेस अपडेट, तिमाही नतीजों और रेलवे सेक्टर से जुड़ी खबरों पर निर्भर करेगी।
🟡 शेयर बाजार का ताजा हाल (IRCTC share news)
सोमवार को IRCTC का शेयर 1 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी के साथ 681 रुपये के आसपास बंद हुआ। कंपनी का मार्केट कैप 54 हजार करोड़ रुपये से ऊपर है। तकनीकी संकेतकों की बात करें तो RSI करीब 50 के स्तर पर है, यानी शेयर न तो ओवरबॉट है और न ही ओवरसोल्ड। फिलहाल यह कुछ शॉर्ट टर्म मूविंग एवरेज से ऊपर, जबकि लॉन्ग टर्म एवरेज से नीचे ट्रेड कर रहा है।
🟡 अब आगे क्या होगा?
फरवरी 2026 तक IRCTC डेरिवेटिव्स ट्रेडर्स की नजर में बना रहेगा। लेकिन उसके बाद तस्वीर पूरी तरह बदल जाएगी। तब यह स्टॉक ज्यादा निवेशकों का और कम ट्रेडर्स का पसंदीदा बन सकता है। कुल मिलाकर, F&O से बाहर होने का फैसला IRCTC के लिए गेमचेंजर है, जिसने बाजार में नई बहस और नई रणनीतियों को जन्म दे दिया है।
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