इंडिगो छोड़ सभी भारतीय एयरलाइंस की हालत खस्ता, उबरने को चाहिए 2.5 बिलियन डॉलर
नई दिल्ली। ग्लोबल एविएशन कंसल्टेंसी (सीएपीए) ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि भारतीय एयरलाइंस की माली हालात काफी खराब है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सिर्फ इंडिगो एयरलाइंस की स्थिति ठीक है, बाकी सबके सामने संकट है। सीएपीए की रिपोर्ट में शुक्रवार को कहा गया है कि कोरोना महामारी के चलते लगाए गए लॉकडाउन की वजह से एयरलाइंस पर जो असर हुआ है, उससे उबरने के लिए भारतीय एयरलाइंस को, इंडिगो को छोड़कर कम से कम 2.5 बिलियन डॉलर जुटाने की आवश्यकता होगी।

रिपोर्ट में कहा गया है कि एयरलाइंस के लि 2.5 बिलियन डॉलर की राशि तुरंत जरूरत है। इस राशि से ये कम से कम तब तक बची रहेंगी जब तक बाजार दोबारा पुरानी स्थिति में आता है। वहीं अगर कोरोना महामारी लंबी चली और अर्थव्यवस्था की स्थिति और खराब हुई तो ज्यादा रकम की जरूरत हो सकती है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि दूसरी भारतीय एयरलाइंस के मुकाबले इंडिगो को संकट नहीं है। उसके पास 1.13 बिलियन डॉलर फ्री कैश रिजर्व और 1.33 बिलियन रेस्ट्रिक्टिड कैश है। हालांकि, यह भी लंबे समय तक संकट की स्थिति में मुश्किल का सामना कर सकती है।
सीएपीए ने यह भी अनुमान लगाया है कि वर्तमान वित्तीय वर्ष में भारत के घरेलू उड़ानों के ट्रैफिक 5.57 करोड़ से 7 करोड़ के बीच रहेंगे जबकि इसी अवधि के लिए इससे पहले किए गए पूर्वानुमान में 8-9 करोड़ पैसेंजर्स बताया था। सामाजिक दूरी (सोशल डिस्टेंसिंग) प्रोटोकॉल्स के चलते एयरलाइंस की क्षमता में कमी होगी। इसके साथ ही, दूसरे क्वार्टर के दौरान अगर प्रतिबंध हटाई भी जाती है तो शायद ही एयर पैसेंजर्स में कोई भारी बढ़ोत्तरी देखने को मिले।
बता दें कि लॉकडाउन के चलचे उड़ाने एक महीने से ज्यादा समय ये बंद हैं। देशव्यापी लॉकडाउन के बढ़ जाने के चलते घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानें 17 मई तक प्रतिबंधित रहेंगी। नागरिक उड्डयन विभाग के महानिदेशक (डीजीसीए) ने कहा कि विदेशी और घरेलू उड़ानों के ऑपरेशंस शुरू होने के बारे में सूचित कर दिया जाएगा।
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