Hindenburg Target Madhabi Buch: कांग्रेस के आरोपों पर चुप क्यों माधबी पुरी बुच? हिंडनबर्ग ने उठाए सवाल
Hindenburg Targets Madhabi Buch: हिंडनबर्ग रिसर्च ने हाल ही में भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) की अध्यक्ष माधबी पुरी बुच की चुप्पी पर सवाल उठाए हैं। यह बयान तब आया, जब कांग्रेस पार्टी ने बुच और कुछ प्रमुख कंपनियों के बीच वित्तीय लेन-देन को लेकर नए आरोप लगाए।
कांग्रेस ने दावा किया कि SEBI द्वारा विनियमित कुछ कंपनियों से बुच की निजी कंसल्टिंग फर्म को बड़ी राशि मिली थी, जिसके बारे में अब सवाल उठ रहे हैं।

क्या हैं कांग्रेस के आरोप?
कांग्रेस पार्टी ने आरोप लगाया कि माधबी पुरी बुच की निजी कंसल्टिंग फर्म अगोरा प्राइवेट लिमिटेड को 2016 से 2024 के बीच महिंद्रा एंड महिंद्रा, आईसीआईसीआई बैंक, डॉ. रेड्डीज और पिडिलाइट जैसी कंपनियों से लगभग 2.95 करोड़ रुपये मिले।
कांग्रेस ने यह भी कहा कि इसमें से 88 फीसदी यानी 2.59 करोड़ रुपये अकेले महिंद्रा एंड महिंद्रा ग्रुप से आए थे। यह आंकड़ा कंसल्टिंग फर्म के कुल राजस्व का एक बड़ा हिस्सा दर्शाता है। इसके साथ ही कांग्रेस ने दावा किया कि बुच के पति धवल बुच को भी व्यक्तिगत रूप से महिंद्रा एंड महिंद्रा से 4.78 करोड़ रुपये मिले थे, जिससे हितों के टकराव के सवाल और भी गंभीर हो गए हैं।
हिंडनबर्ग का सवाल और प्रतिक्रिया
अमेरिका स्थित शॉर्ट-सेलर हिंडेनबर्ग रिसर्च ने भी इन आरोपों पर अपनी प्रतिक्रिया दी और कहा कि बुच ने इन आरोपों पर कई हफ्तों तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी, जो चिंताजनक है। हिंडेनबर्ग ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट में कहा कि यह गंभीर मामला है, खासकर तब जब SEBI जैसे महत्वपूर्ण नियामक पद पर रहते हुए ऐसे वित्तीय लेन-देन सामने आए हैं।
कंपनियों की प्रतिक्रिया
जहां कांग्रेस ने इन आरोपों को उठाया, वहीं महिंद्रा ग्रुप और डॉ. रेड्डीज ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि आरोप बेबुनियाद हैं। इन कंपनियों ने अपने-अपने बयानों में कहा कि उन्होंने किसी भी तरह से नियमों का उल्लंघन नहीं किया है।
क्या कहता है विवाद?
यह पूरा मामला हितों के टकराव और SEBI जैसे संस्थान के पारदर्शिता के मानकों पर सवाल उठाता है। जहां एक तरफ कांग्रेस पार्टी ने बुच के वित्तीय लेन-देन पर गंभीर आरोप लगाए हैं, वहीं दूसरी ओर हिंडेनबर्ग ने इस पूरे मुद्दे पर बुच की चुप्पी को भी निशाने पर लिया है।
कांग्रेस द्वारा लगाए गए आरोप और हिंडेनबर्ग के सवाल इस मामले को और गंभीर बना रहे हैं। SEBI की अध्यक्ष माधबी पुरी बुच की प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है, जो इस विवाद को कुछ हद तक साफ कर सकती है। महिंद्रा ग्रुप और डॉ. रेड्डीज ने अपने बचाव में बयान दिए हैं, लेकिन यह देखना होगा कि आने वाले समय में इस विवाद पर और क्या खुलासे होते हैं।












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