Budget: पिछले बजट में कृषि में डिजिटल बदलाव, नए कर ढांचे से वेतनभोगी-पेंशनभोगियों को मिली राहत
केंद्रीय बजट 2025-26 के चंद दिन शेष रह गए हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण एक फरवरी 2025 को सुबह 11 बजे संसद में केंद्रीय बजट पेश करेंगी। बजट से आम आदमी से लेकर खास तक को ढेरों उम्मीद हैं। कोई महंगाई से राहत चाहता है तो आयकर में छूट। बात अगर पिछले बजट की करें तो बजट 2024-25 में कृषि में डिजिटल बदलाव आया और नए कर ढांचे से वेतनभोगी-पेंशनभोगियों को राहत मिली थी।
23 जुलाई, 2024 को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्त वर्ष 2024-25 के लिए केंद्रीय बजट पेश किया। इस बजट में कृषि, पेंशन प्रणाली और व्यक्तिगत कर संरचना सहित कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सुधार की घोषणाएँ की गई हैं। ये सुधार आर्थिक विकास को गति देने और करदाताओं को राहत देने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।
कृषि में डिजिटल बदलाव: डीपीआई की शुरुआत
कृषि क्षेत्र के आधुनिकीकरण को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI) की शुरुआत की है। इस पहल के तहत 400 जिलों में डिजिटल फसल सर्वेक्षण किया जाएगा, जो अगले तीन वर्षों में छह करोड़ किसानों और उनकी भूमि को डिजिटल रजिस्ट्री में जोड़ने की योजना का हिस्सा है।

सरकार ने ₹1.52 लाख करोड़ का बजट आवंटित करते हुए सब्जी उत्पादन और कृषि अनुसंधान एवं विकास को भी प्राथमिकता दी है। इसके अलावा, पांच राज्यों में किसान क्रेडिट कार्ड जारी करने की नई योजना शुरू की गई है, जिससे किसानों को वित्तीय सहायता में आसानी होगी।
राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली में बड़े बदलाव
पेंशन प्रणाली में सुधार करते हुए एनपीएस-वात्सल्य योजना की शुरुआत की गई है, जो माता-पिता और अभिभावकों द्वारा किए गए योगदान के माध्यम से नाबालिगों को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करेगी।
इसके अलावा, नियोक्ताओं द्वारा एनपीएस पर किए गए व्यय की कटौती को कर्मचारी के वेतन के 10% से बढ़ाकर 14% कर दिया गया है, जिससे निजी और सार्वजनिक क्षेत्र दोनों के कर्मचारियों को अधिक लाभ मिलेगा।
नया कर ढांचा: वेतनभोगी और पेंशनभोगियों को राहत
इस बजट में करदाताओं को राहत देने के लिए कई बड़े कदम उठाए गए: मानक कटौती ₹50,000 से बढ़ाकर ₹75,000 कर दी गई।पारिवारिक पेंशन पर कटौती ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000 कर दी गई, जिससे पेंशनभोगियों को अधिक लाभ मिला। नई कर व्यवस्था में स्लैब समायोजन, उदाहरण के लिए, ₹3 लाख से ₹6 लाख के पिछले स्लैब को ₹3 लाख से ₹7 लाख कर दिया गया है। एनपीएस में नियोक्ताओं के कर लाभ को 10% से बढ़ाकर 14% कर दिया गया है।
बिहार और आंध्र प्रदेश के लिए विशेष घोषणाएँ
बजट में बिहार और आंध्र प्रदेश को विशेष प्राथमिकता दी गई है। इन राज्यों में बुनियादी ढांचे के विकास और वित्तीय सहायता की नई योजनाएँ लागू की जाएंगी।
बजट की नौ प्रमुख प्राथमिकताएँ
- कृषि में उत्पादकता और लचीलापन
- रोजगार और कौशल विकास
- समावेशी मानव संसाधन विकास
- विनिर्माण और सेवा क्षेत्र का विस्तार
- शहरी विकास
- ऊर्जा सुरक्षा
- आधारभूत संरचना का सुदृढ़ीकरण
- नवाचार, अनुसंधान और विकास
- एमएसएमई को समर्थन
- एमएसएमई के लिए नई ऋण योजना
एमएसएमई सेक्टर को मजबूती देने के लिए सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों द्वारा नया ऋण मूल्यांकन मॉडल पेश किया गया है, जो व्यवसायों की परिसंपत्तियों और टर्नओवर के बजाय उनके डिजिटल फुटप्रिंट पर आधारित होगा।
आर्थिक विकास और रोजगार पर प्रभाव
बजट में कौशल विकास और स्टार्टअप को समर्थन देने की योजनाएँ शामिल हैं। इससे नए रोजगार अवसरों का सृजन होगा और कार्यबल की दक्षता में वृद्धि होगी।
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