नोटबंदी के दौरान खुद रघुराम राजन को भी नोट बदलवाने के लिए आना पड़ा था अमेरिका से भारत
नई दिल्ली। नोटबंदी के दौरान जहां एक ओर पूरा देश बैंकों और एटीएम के बाहर लाइनें लगाए खड़ा था, वहीं सरकार के इस कड़े फैसले से भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन भी अछूते नहीं रहे। रघुराम राजन ने कहा है कि नोटबंदी की जानकारी उन्हें भी नहीं थी, जिसकी वजह से उन्हें अपने नोट बदलवाने के लिए भी अमेरिका से भारत वापस आना पड़ा था।

नोटबंदी के पक्ष में नहीं थे राजन
रघुराम राजन ने अपनी किताब के सिलसिले में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि वह कभी भी नोटबंदी के पक्ष में नहीं थे। उनका मानना था कि नोटबंदी से लंबी अवधि में होने वाले फायदों पर तत्काल समय में होने वाले नुकसान भारी पड़ेंगे। रघुराम राजन ने कालेधन पर लगाम लगाने के कुछ अन्य उपाय भी सरकार को बताए थे, लेकिन सरकार ने नोटबंदी को लागू करना ही उचित समझा।

दोबारा गवर्नर बनना चाहते हैं राजन
रघुराम राजन एक चैनल को दिए इंटरव्यू के दौरान इस बात पर पहले ही अपनी समहति जता चुके हैं कि वह दोबारा आरबीआई गवर्नर बनना चाहते हैं। उस इंटरव्यू में उन्होंने पीएम मोदी के मेक इन इंडिया पर भी सवाल उठाया था। उन्होंने कहा था कि सिर्फ 'मेक इन इंडिया' नहीं 'मेक फॉर इंडिया' भी हो तभी फायदा होगा।

नोटबंदी के आंकड़े क्या कहते हैं?
9 नवंबर से देश में नोटबंदी लागू हुई थी, जिसकी घोषणा खुद पीएम नरेंद्र मोदी ने की थी। उन्होंने दावा किया था कि नोटबंदी के बहुत सारा कालाधन सामने आएगा। हालांकि, नोटबंदी से कोई कालाधन तो सामने नहीं आया, उल्टा नोटबंदी से पूरे देश में लोगों को काफी दिक्कतें जरूर झेलनी पड़ीं। आपको बता दें कि हाल ही में भारतीय रिजर्व बैंक की तरफ से जारी किए गए आंकड़ों से यह बात सामने आई है कि करीब 99 फीसदी पुराने नोट सिस्टम में वापस आ गए हैं। अब विपक्ष इस बात पर मोदी सरकार को घेर रहा है कि आखिर कहां है कालाधन?












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