SC के आदेश पर EPFO ने कहा, 'इन 10 लोगों को मिलेगी बढ़ी हुई Pension'
EPFO ने सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश को मानने से मना कर दिया है, जिसमें कोर्ट ने कहा था कि छूट मिलने वाली कंपनियों के कर्मचारियों को मिलने वाले पूरे वेतन पर पेंशन दिया जाए।

नई दिल्ली। EPFO ने सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश को मानने से मना कर दिया है, जिसमें कोर्ट ने कहा था कि छूट मिलने वाली कंपनियों के कर्मचारियों को मिलने वाले पूरे वेतन पर पेंशन दिया जाए। आपको बता दें कि जिन कंपनियों के कर्मचारियों का फंड प्राइवेट ट्रस्ट द्वारा मैनेज होता है, उन्हें छूट वाली कंपनियां कहते हैं और जिनका ईपीएफओ से मैनेज होता है, उन्हें बगैर छूट वाली कंपनी कहते हैं। अक्टूबर 2016 में सुप्रीम कोर्ट ने कर्मचारी पेंशन योजना यानी ईपीएस के तहत 12 याचिकाकर्ताओं की पेंशन में संशोधन करने का आदेश दिया था। जब सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था तो ईपीएफओ भी बढ़ी पेंशन देने के लिए राजी हो गया था।

सिर्फ बगैर छूट वाली कंपनियों के मिलेगा फायदा
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भले ही ईपीएफओ बढ़ी पेंशन देने के लिए राजी हो गया था, लेकिन अब ईपीएफओ ने कहा है कि वह सिर्फ बगैर छूट वाली कंपंनियों के कर्मचारियों को ही बढ़ी हुई पेंशन देगा। ईपीएफओ ने कहा है कि कर्मचारी और नियोक्ता को तय सीमा से अधिक वेतन पर योगदान की जानकारी फैसले के 6 महीने के अंदर-अंदर देनी चाहिए थी। वहीं सुप्रीम कोर्ट ने ईपीएफओ की 6 महीने वाली बात को मनमानी कहा और इस नियम को खत्म करने का आदेश दिया था।

2 लोगों को नहीं मिलेगी बढ़ी पेंशन!
आपको बता दें कि जिन 12 लोगों के लिए सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला सुनाया था, उनमें 10 लोग बगैर छूट वाली कंपनी के हैं, जबकि 2 लोग छूट वाली कंपनी के हैं। ईपीएफओ ने साफ किया है कि जिन कर्मचारियों का ईपीएस उसके पास आता है, सिर्फ उनके खातों में ही बढ़ी हुई राशि जमा की जाएगी। साथ ही कहा है कि प्राइवेट ट्रस्ट से ईपीएस अकाउंट में पैसे ट्रांसफर नहीं किए जाएंगे। इसे लेकर गुरुवार को सीबीटी एक बैठक भी करने वाला है।

ये है मामला
12 याचिकार्ताओं की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने एंप्लॉयी प्रविडेंट फंड ऑर्गनाइजेशन को एंप्लॉयी पेंशन स्कीम यानी EPS को तहत पेंशन रिवाइज करने को कहा था। दरअसल याचिकाकार्ताओं और निजी ईपीएफ फंड ट्रस्टी ने EPFO से संपर्क कर EPS योगदान पर सीमा को हटाने की मांग की थी और इसे पूरे वेतन पर लागू करने को कहा। ईपीएफओ ने उनकी मांग को खारिज करते हुए 1996 के संशोधन का हवाला दिया, लेकिन याचिकाकर्ताओं ने ईपीएफओ के खिलाफ हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और ज्यादातर हाईकोर्ट ने ईपीएफओ के खिलाफ फैसला दिया। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। आखिरकार फैसला कर्मचारियों के हक में आया और कोर्ट ने EPFO को आदेश मानने कहा, लेकिन इस फैसले को लागू करने में एक साल का वक्त लग गया, लेकिन आखिरकार 1 नवंबर को ईपीएफओ ने कोर्ट के फैसले को लागू कर दिया।

ये है नियम
आपको बता दें कि पेंशन स्कीम के तहत ईपीएफ के पास 5 करोड़ से ज्यादा सदस्य हैं। पेंशन स्कीम के तहत प्राइवेट नौकरी करने वाले सभी कर्मचारी अपनी बेसिक सैलरी का 12 प्रतिशत और महंगाई भत्ता ईपीएफ में जमा करवाते है। कंपनी नियमों के मुताबिक उतनी ही रकम एंप्लॉयर भी ईपीएफओ में जमा करवाता है, लेकिन एंप्लॉयर के फंड से 8.33 प्रतिशत हिस्सा EPS में चला जाता है, जो कि कर्मचारी को रिटायरमेंट के बाद ही मिलता है। ईपीएफओ के मुताबिक EPS की सीमा निर्धारित है, जो बेसिक सैलरी + डीए पर 15000 रुपए है। इस ईपीएस की गिनती की जाए तो 15000 के अधिकतम 8.33 प्रतिशत के हिसाब से ये हर माह 1250 रुपए बनता है, जो कि 2001 से 2014 के बीच अधिकतम 541.4 रुपए और 2001 से पहले अधिक तम योगदान सीमा 416.5 रुपए था।
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