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नोटबंदी के बाद ई-वॉलेट और ऑनलाइन कैब कंपनियों को फायदा, ई-कॉमर्स कंपनियों को हुआ घाटा

नोटबंदी के बाद जहां ई-वॉलेट कंपनियों को जहां फायदा हुआ वहीं ई-कॉमर्स कंपनियों का घाटा झेलना पड़ा।

नई दिल्ली। नोटबंदी के बाद कैश की किल्लत से जूझ रहे लोगों का सहारा बना ई-वॉलेट। मोबाइल वॉलेट की मदद से लोगों को नोटबंदी के दौरान बड़ी राहत मिली है। इसका फायदा ई-वॉलेट कंपनियों को भी खूब हुआ है। नोटबंदी के बाद लोगों में कैशलेस ट्रांजेक्शन की प्रवृत्ति बढ़ी है। जिसका सबसे ज्यादा फायदा डिजिटल वॉलेट को हुआ।

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पेटीएम, मोबिक्विक, फ्रीचार्ज जैसे ई-वॉलेट कंपनियों को इसका खूब फायदा हुआ है। नोटबंदी के बाद अगर मुनाफे की बात करे तो नबंर एक के पायदान पर ई-वॉलेट कंपनियां और दूसरे पायदान पर ऑनलाइन कैब सर्विस रही। लोगों ने कैश की किल्लत के दौरान ऑनलाइन कैब का खूब इस्तेमाल किया है। जहां ई-वॉलेट और ऑनलाइन कैब सर्विसेज को फायदा हुआ तो वहीं नोटबंदी का नुकसान ई-कॉमर्स कंपनी को हुआ है। फिल्पकार्ट, स्नैपडील जैसी कंपनियों को नोटबंदी के बाद काफी नुकसान हुआ है। कैशलेस ट्रांजेक्शनंस में फूड ऑर्डर प्लेटफॉर्म और ग्रॉसरी का प्रदर्शन भी अच्छा रहा है।

कूपनदुनिया द्वारा कराए गए सर्वे के मुताबिक नोटबंदी के दौरान पेटीएम, फ्रीचार्ज, मोबिक्विक, डोमिनोज पिज्जा सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले ब्रांड बने। उसके बाद सर्वे के मुताबिक अमेजन का ट्रैफिक जहां 22 प्रतिशत घटा है। जबकि फ्लिपकार्ट और स्नैपडील के ट्रैफिक में 50 प्रतिशत का घाटा रहा। अगर शहर की बात करे तो नोटबंदी के दौरान कैश की किल्लत से बिजनेस का सबसे ज्यादा नुकसान मुंबई को हुआ। जबकि दूसरे नबंर पर कोलकाता और तीसरे नबंर पर दिल्ली रही। मुंबई को नोटबंदी से ई-कॉमर्स का ट्रैफिक मुंबई में 37 प्रतिशत घटा, जबकि कोलकाता में 26 और चेन्नई में 16 और दिल्ली में 7 प्रतिशत घटा।

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