बजट 2018:जल्द होगी डिजिटल टैक्स की शुरुआत, कॉम्पीट फी पर भी लगेगा टैक्स, जानें विस्तार से
नई दिल्ली। बजट 2018-19 में इनकम टैक्स के स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया। मध्यम वर्ग इससे नाराज है। सरकार ने स्टैंडर्ड डिडक्शन में छूट देकर लोगों को खुश करने की कोशिश की, लेकिन सेस बढ़ाकर बात बराबर कर दिया। अब आपको एक और अहम जानकारी दे दें कि इस साल बजट में सरकार ने कॉम्पीट फी को टैक्स के दायरे में लाने की कवायत की है। आपको बता दें कि अब तक नॉन-कॉम्पीट पेमेंट्स सैलरी या सैलरी के मुनाफे में नहीं आता है, इसलिए उसपर टैक्स भी नहीं लगती थी, लेकिन माना जा रहा है कि जल्द ही इसमें बदलाव किया जा सकता है।

आपको बता दें कि अगर किसी ने अपने एंप्लॉयर के बजाए किसी थर्ड पार्टी से कोई पेमेंट पाया या फिर अगर किसी व्यक्ति को किसी तीसरे से कोई पेमेंट मिलता है जिनके बीच एंप्लॉयर-एंप्लॉयी का रिश्ता नहीं है, तो वो इनकम अब तक टैक्स के दायरे में नहीं आता था, लेकिन अब उसे भी टैक्स के दायरे में लाने की कोशिश की गई है।
सरकार ने आयकर कानून सेक्शन 56 में संशोधन करने का प्रस्ताव पेश किया है, ताकि कॉम्पीट फीस को भी टैक्स के दायरे में लाया जा सके। वहीं सरकार अब डिजिटल टैक्स लाने की भी कोशिश कर रही है, जिसके तहत विदेशी डिजिटल कंपनियों को टैक्स के दायरे में लगाने की कोशिश की जा रही है। डिजिटल टैक्स उन कंपनियों पर लागू होगा, जिनका भारत में यूजर बेस या बिजनस तो है, लेकिन उनका अस्तित्व यहां नहीं है, जैसे कि फेसबुक, गूगल जैसी कंपनियां। इन कंपनियों के ऑफिस भारत में भी है, लेकिन ऑपरेशनल कमांड विदेशों से होता है,लेकिन सरकार ने इस बजट में ऐसी कंपनियों से भी डिजिटल टैक्स वसूलने की बात कही है।












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