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GDP विकास दर 5% नीचे जा सकती है, 29 को जारी होंगे आंकड़े

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नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राज्यसभा में देश की अर्थव्यवस्था को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि देश में किसी भी तरह की मंदी नहीं थी और ना ही कभी होगी। उन्होंने कहा कि इस बात की पुष्टि जल्द ही आने वाले आंकड़ों से हो जाएगी। बता दें कि स्टैटिस्टिक्स ए्ंड प्रोग्राम इंप्लिमेंटेशन मंत्रालय जुलाई-सितंबर तिमाही की जीडीपी के आंकड़े शुक्रवार को जारी करेगा। वहीं इन आंकड़ों के आने से पहले अर्थव्यवस्था के जानकारों का कहना है कि यह सितंबर तिमाही के आंकड़े 4.2 से 4.7 फीसदी हो सकते हैं जोकि पांच फीसदी से कम है। वित्त मंत्री ने यूपीए सरकार से सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर की तुलना करते हुए कहा कि वर्ष 2009-2014 के अंत में भारत की वास्तविक जीडीपी की वृद्धि दर 6.4% थी, जबकि 2014-2019 के बीच यह 7.5% पर रही।

वास्तविक आंकड़े और भी गंभीर

वास्तविक आंकड़े और भी गंभीर

वास्तविक आकंड़ों की बात करें तो यह और भी गंभीर हो सकते हैं क्योंकि 2012-13 के तिमाही में सबसे कम विकास दर दर्ज की गई थी उस वक्त जीडीपी थी। अहम बात यह है कि उस वक्त देश वैश्विक महंगाई के दौर से गुजर रहा था। इसके साथ ही देश में राजनीतिक अस्थिरता थी। अर्थव्यवस्था के छह मुख्य आधार आयात, निर्यात, रेल भाड़ा और कमाई, बिजली व डीजल की खपत कुल औद्योगिक उत्पादन पर नजर डालें तो यह अप्रैल माह से सितंबर माह के बीच काफी नीचे रहे हैं।

बैंकिंग की समस्या

बैंकिंग की समस्या

वित्त मंत्री ने कहा कि लोन मेले में बैंकों ने 2.5 लाख करोड़ रुपये के कर्ज दिए हैं इसके अलावा बैंकों को 70 हजार करोड़ रुपय की पूंजी दी गई जिससे अर्थव्यवस्था में नकदी बढ़ी है। वित्त मंत्री निर्मला सितारमण के मुताबिक जीडीपी ग्रोथ में गिरावट की वजह बैंको में दोहरी बैलेंस शीट की समस्या है जिसकी वजह से दो वित्त वर्षों में रफ्तार घटी है।

 बदलाव के दौर से गुजर रही अर्थव्यवस्था

बदलाव के दौर से गुजर रही अर्थव्यवस्था

येस बैंक के चीफ इकोनोमिस्टने बताया कि सरकार द्वारा सर्विस सेक्टर में ही बजट का आवंटन किया गया है, बाकी के सभी सेक्टर सितंबर तिमाही में पिछड़े हैं। लेकिन उनका कहना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था बदलाव के दौर से गुजर रही है लिहाजा इसका अर्थव्यवस्था पर कुछ असर देखने को मिलेगा। इन सब के बीच निर्मला सीतारमण ने कहा कि पब्लिक सेक्टर के बैंकों को रीकैपिटलाइज करने का काम चल रहा है।

 मनमोहन सिंह ने भी जताई थी चिंता

मनमोहन सिंह ने भी जताई थी चिंता

बता दें कि इससे पहले पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी देश की अर्थव्यवस्था पर चिंता जाहिर की थी। उन्होंने कहा था कि देश की विकास दर 15 सालों के न्यूनतम स्तर पर पहुंच चुकी है। यही नहीं बेरोजगारी भी अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच चुकी है। बिजली की मांग भी 15 वर्ष के न्यूनतम स्तर पर पहुंच चुकी है। उन्होंने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था काफी गंभीर हालत में है।

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English summary
Big worry as GDP growth seen slipping under 5 number to come on 29 nov.
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