Bank Privatisation: SBI को छोड़ सभी सरकारी बैंकों को होना चाहिए प्राइवेटाइजेशन, रिपोर्ट में बताई वजहें

Bank Privatisation: SBI को छोड़ सभी सरकारी बैंकों को होना चाहिए प्राइवेटाइजेशन, रिपोर्ट में बताई वजहें

नई दिल्ली। वर्तमान में देश में 12 सरकारी बैंक है, लेकिन सरकार लगातार पब्लिक सेक्टर के बैंकों का निजीकरण कर रही है। बैंकों के निजीकरण को लेकर बैंक कर्मचारियों में पहले से नाराजगी है। सरकार सरकारी बैंकों के बढ़ते एनपीए को कम करने के लिए निजीकरण की ओर बढ़ रही है। बजट में भी वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी दो और बैंकों के निजीकरण की बात कही और अब नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च (NCAER) ने सरकार को स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के अलावा बाकी सभी सरकारी बैंकों के निजीकरण की सलाह दी है।

 बैंकों के निजीकरण की सलाह

बैंकों के निजीकरण की सलाह

केंद्र सरकार को बैंकों के निजीकरण की सलाह मिल रही है। नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च यानी एनसीएईआर ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि सरकार को एसबीआई को छोड़कर सभी सरकारी बैंकों को प्राइवेट करने की सलाह दी गई है। एनसीएईआर की पूनम गुप्ता और अर्थशास्त्री अरविंद पनगढ़िया ने इस रिपोर्ट को तैयार किया है, और कहा है कि पिछले दशक से SBI के अलावा सभी सरकारी बैंक पिछ़ड़ रहे हैं। निजी बैंकों की तुलना में सरकारी बैंकों के इस हालत को देखथे हुए उनका निजीकरण करना चाहिए। रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकारी बैंकों को निजी बैंकों की तुलना में संपत्ति और इक्विटी पर कम रिटर्न मिल रहे हैं और ये लगातार हो रहा है।

 इन बैंकों का खराब प्रदर्शन

इन बैंकों का खराब प्रदर्शन

इस रिपोर्ट के मुताबित सरकारी बैंकों के जमापूंजी और लोन डिस्ट्रीब्यूशन दोनों ही निजी बैंकों की तुलना में कम है। उन्होंने कहा है कि भारत में बैंकिंग सेक्टर में विकास में अहम रोल एसबीआई और प्राइवेट बैंकों का है। पिछले एक दशक से सार्वजनिक बैंकों का प्रदर्शन बहुत संतोषजनक नहीं रहा है। बैड लोन के दवाब में इन बैंकों का प्रदर्शन लगातार खराब हो रहा है। प्राइवेट बैंकों की तुलना में सरकारी बैंकों पर एनपीए का बोझ बढ़ा है।

सरकार के निवेश के बावजूद नहीं सुथरी स्थिति

सरकार के निवेश के बावजूद नहीं सुथरी स्थिति

इस रिपोर्ट में सरकार द्वारा बैंकों में किए गए निवेशों का जिक्र किया गया है। सरकार ने साल 2010-11 और 2020-21 के दौरान सरकारी बैंक पंजाब नेशनल बैंक में 65.67 अरब डॉलर का निवेश किया। बैंकों पर बढ़ते एनपीए के दवाब को कम करने के लिए ये निवेश किया गया, लेकिन इसके बावजूद बैंक का रिकैपिटलाइजेशन राशि 30.78 अरब डॉलर है।

 नीति आयोग ने भी दी सलाह

नीति आयोग ने भी दी सलाह

आपको बता दें कि नीति आयोग ने भी बैंकों के विलय की सलाह दी है। नीति आयोग की सलाह के मुताबिक सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया और इंडियन ओवरसीज बैंक के निजीकरण का सुझाव दिया है। वहीं इंडियन बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा को के निजीकरण की सलाह दी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि छोटे बैंकों का निजीकरण आसान है।

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