Adani-Hindenburg: अडानी-हिंडनबर्ग मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, जानिए SEBI ने क्या-क्या कहा?
Adani-Hindenburg case Update: अडानी-हिंडनबर्ग मामले में सुप्रीम कोर्ट को भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड सेबी (SEBI) ने बताया कि मार्केट रेगुलेटर 2016 से अडाणी ग्रुप की जांच नहीं कर रहा है।

Adani-Hindenburg case Update: अडानी-हिंडनबर्ग मामले को लेकर सोमवार 15 मई को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड सेबी (SEBI) ने एक एफिडेविट के जरिेए सुप्रीम कोर्ट में अडानी-हिंडनबर्ग मामले पर कई बातें कहीं।
सेबी ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि अडानी ग्रुप के विनियामक खुलासों की संभावित खामियों की जांच का कोई भी गलत या समय से पहले निष्कर्ष कानूनी रूप से अस्थिर होगा और इस मामले में उचित न्याय नहीं हो पाएगा। इसके साथ ही सेबी ने कहा 2016 से अडाणी ग्रुप की जांच के सभी दावे तथ्यात्मक रूप गलत और निराधार हैं।
सेबी अडाणी ग्रुप की जांच 2016 से नहीं कर रहा है। अडानी ग्रुप पर ये आरोप लगाए जा रहे थे कि GDR मामले में उसपर 2016 से जांच चल रही है।
सेबी ने 29 अप्रैल को अपनी जांच पूरी करने के लिए सुप्रीम कोर्ट से 06 महीने का समय मांगा था। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने 2 महीने का वक्त दिया था लेकिन अब 3 महीने इस अवधि को और बढ़ा दिया गया है। सेबी ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि ग्लोबल डिपॉजिटरी रिसिप्ट्स (GDRs) जारी करने के मामले में जांच करने के बाद कानून कार्रवाई की गई है।
सेबी ने कहा कि अडानी ग्रुप की कोई भी लिस्टेड कंपनी 2016 की इस जांच का हिस्सा नहीं है, जिसमें भारतीय 51 कंपनियां शामिल हैं।
सेबी पहले से ही 11 विदेशी नियामकों से जानकारी के लिए संपर्क कर चुका है। सेबी ने मिनिमम पब्लिक शेयर होल्डिंग के मामले में 11 देशों के रेगुलेटर्स से संपर्क किया है और उनसे पूछा है कि क्या अडानी समूह ने अपने सार्वजनिक रूप से उपलब्ध शेयरों के संबंध में किसी भी मानदंड का उल्लंघन किया है? हमने इन सभी रेगुलेटर्स से जानकारी देने के लिए आवेदन किया है।
सेबी ने कहा याचिकाकर्ताओं की तरफ से जिस जांच का जिक्र किया गया है, उसका हिंडनबर्ग रिपोर्ट से कोई लेना-देना नहीं है। ये जांच सिर्फ 51 लिस्टेड कंपनियों के GDR मामले थी।
सेबी ने कोर्ट को यह भी बताया कि हिंडनबर्ग ने अपनी रिपोर्ट में जो 12 लेन-देन के आरोप लगाए हैं,वो कापी जटिल हैं और उनके साथ कई सब-ट्रांजैक्शंस जुड़े हुए हैं। इसलिए जब तक हम अलग-अलग सोर्स से जानकारी नहीं जुटा लेते, एनालिसिस नहीं कर लेते, तब तक किसी भी फाइनल रिजल्ट पर पहुंचना सही नहीं होगा।












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