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इस होली पर वनइंडिया कूपन संग मचाइए धमाल

अगर आप सोचते हैं कि आप कहां से गुझियां , फिरनी, ठंड़ई या अन्य पकवानों को ऑर्डर करें तो हम आपकी मदद कर सकते हैं।

बेंगलुरू। होली को लेकर लोगों में काफी उत्साह, ऊर्जा और प्यार होता है। यह पर्व ऐसा पर्व है जिसे आप बुराई पर सच्चाई की जीत के तौर पर मनाते हैं, यह पर्व ऐसा पर्व है जब सर्दियों की विदाई होती है और गर्मी के मौसम की शुरुआत होती है, लोग इस पर्व को प्रेम का पर्व मानते हैं और जमकर लोग इसे मनाते हैं।

इस होली पर वनइंडिया कूपन संग मचाइए धमाल

रंगों से लेकर तरह-तरह के व्यंजन भी आकर्षित करते हैं

होली में रंगों से लेकर तरह-तरह के व्यंजन भी लोगों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं, कहते हैं कि इस पर्व में दुश्मन भी दोस्त बन जाते हैं, लेकिन इन सब के बीच हम होली का एक दूसरा रंग भी पिछले कुछ समय से देख रहे हैं, ऐसे में कुछ ऐसी बातें हैं जिसका हमें होली मनाते समय ध्यान रखना चाहिए।

होलिका दहन के नाम पर लकड़ियों को जलाने से पर्यावरण पर प्रभाव

होलिका के पर्व के पीछ प्रहलाद, हिरण्यकश्यप और उसकी बहन होलिका की पौराणिक कथा है और इसे बुराई पर अच्छाई की जीत के दौर पर देखा जाता है। लेकिन आधुनिक समय में इस संदेश को कुछ गलत तरह से लिया गया, हर वर्ष 30 हजार जगह लकड़ी को होलिका दहन को जलाया जाता है।

100 किलो लकड़ी हर होलिका में जलाई जाती है

इसमें तकरीबन 100 किलो लकड़ी हर होलिका में जलाई जाती है, होलिका दहन के बाद 5 मिलियन किलो कार्बन डाई आक्साइड पर्यावरण में जाती है, जोकि पर्यावरण को दूषित करने में काफी अहम भूमिका निभाता है, जिसमें मुख्य रूप से देश के बड़े शहर सबसे आगे होते है। लेकिन कुछ छोटी सावधानियां आपको इस प्रदूषण से बचा सकती हैं।

होली में काफी पानी खर्च होता है

होलिका दहन के बाद लोग सड़क पर होली मनाना शुरु करते हैं, जिसमें काफी पानी का इस्तेमाल किया जाता है, बच्चे पानी की बाल्टियां भरकर रंग घोलते हैं और लोगों पर फेंकते हैं, इसके अलावा पिचकारियों की धार दिनभर चलती है, रंगों के गुब्बारे भी बच्चों के लिए प्रमुख आकर्षण होते हैं। एक तरफ जहां बच्चे अपने अंदाज में रंग खेलते हैं तो दूसरी तरफ बड़े-बुजुर्ग सूखे रंगों से रंग खेलते हैं।

गुझिया, पापड़ और तरह तरह के पकवान

इसके साथ ही दिनभर गुझिया, पापड़ और तरह तरह के पकवान दिनभर लोगों को रंग खेलने के दौरान उनकी खुशियों को दोगुना कर देती है। लेकिन शायद आपको अंदाजा नहीं है, होली के दिन तकरीबन 3.5 करोड़ लोग होली खेलते हैं और अगर औसत एक व्यक्ति तीन बाल्टी पानी का इस्तेमाल करता है तो वह 45 लीटर पानी बर्बाद करता है यानि कुल करोड़ो लीटर पानी बर्बाद होता है।

पौधों को पानी देने का काम आ सकता है

यह पानी लोगों के खाना बनाने, पौधों को पानी देने का काम आ सकता है, ऐसे में अगर थोड़ी समझदारी से हम पानी की खपत को कम करें तो पानी बचाने में काफी अहम भूमिका निभा सकते हैं।

तकरीबन 10 फीसदी पानी दूषित

होली के दिन पानी के खर्च को कम करने के लिए हम कई और तरीके भी अपना सकते हैं और पानी को बचा सकते हैं, देश में तकरीबन 7.6 करोड़ लोग पानी की किल्लत से जूझ रहे हैं और उन्हे पीने का पानी लेने के लिए मीलों जाना पड़ता है, देश में तकरीबन 10 फीसदी पानी दूषित है, देश में ग्रामीण इलाकों में पानी पहुंचाने के लिए सरकार 3.4 लाख करोड़ रुपए खर्च करती है, ऐसे में इन आकड़ों को देखकर आप इस बात का अंदाजा लगा सकते हैं कि पानी की क्या कीमत है।

रंग खेलने से सबसे ज्यादा असर किनपर पड़ता है

स्कॉलर रिसर्च लाइब्रेरी के सर्वे के अनुसार यह पाया गया कि होली मनाने वालों में तकरीबन 80 फीसदी बच्चे और किशोर हैं जो होली मनाते हैं, यह आयु मुख्य रूप से 10-20 वर्ष की है, जिसमें से सिर्फ 15 फीसदी लोग पानी की बर्बादी के बारे में जानते हैं, ये वो लोग हैं जिन्हें रंगों का उनके शरीर पर होने वाले नुकसान का अंदाजा नहीं होता है।

हानिकारक रसायनों का इस्तेमाल

जिस तरह से रंगों मे हानिकारक रसायनों का इस्तेमाल किया जाता है उसने कुछ हद तक रंगों के प्रयोग में कमी लाई है, 31-40 वर्ष की उम्र के लोगों में रंग खेलने में तकरीबन 35 फीसदी कमी आई है, जबकि 50 साल की उम्र के वर्ग में 5 फीसदी कमी आई है। जिस तरह से होली के बाद त्वचा की समस्या बढ़ी है, उसे देखते हुए लोगों को रंगों के नुकसान के बारे में जागरूक करना काफी अहम है। रंगों के नुकसान से बचने का एक बड़ा विकल्प ये हो सकता है कि लोग हर्बल रंगों का इस्तेमाल करें और जो रंग बाजार में बिकते हैं उनके सत्यापन पर सरकार सख्ती बरते।

अन्य संसाधनों पर होली का असर

होली पर इस्तेमाल होने वाले पानी रंगो के इस्तेमाल प्राकृतिक संसाधनों पर भी पड़ता है, जो रंग होली में खेला जाता है वह झील, तालाब में बहकर जाता है, जिसका इस्तेमाल मवेशी भी करते हैं, सर्वे व शोध के अनुसार पानी में पीएच लेवल काफी कम होता है जो कि होली की वजह से 6.1 तक पहुंच जाता है जोकि पानी की कठोरता को बढ़ाता है और यह 720 तक पहुंच जाता है।

पीएच लेवल काफी खतरनाक

आपको बता दें कि पीएच लेवल काफी खतरनाक है और पानी की गुणवत्ता को तकरीनब दस गुना खराब करता है। ऐसे में मवेशियों और जानवरों को बचाने के लिए बेहतर है कि आप होली सड़कों और सार्वजनिक जगहों पर नहीं ।

होली में बर्बाद होने वाले पानी से क्या हो सकता है

जो पानी हम होली में बर्बाद करते है अगर उसे बचाया जाए तो हम करोड़ो पौधो को पानी दे सकते हैं, अगर इस पानी को बचाया जा सके तो इससे हम 157 बिलियन कप चाय बना सकते हैं, आप होली में जो गुझिया या पकवान बनाते हैं उसे आप 450 बार इस पानी से बना सकते हैं।

अतिरिक्त पानी को बर्बाद होने से बचाने पर थोड़ा ध्यान दें

ऐसे में हम आपसे उम्मीद करते हैं कि आप इस बार होली खेलते समय पानी की बचत करेंगे, लेकिन आपको अपनी पिचकारियों और गुब्बारों से दूर होने की जरूरत नहीं है बस अतिरिक्त पानी को बर्बाद होने से बचाने पर थोड़ा ध्यान दें तो काफी पानी बचाया जा सकता है।

खुशियों के त्योहार होली

चलिए तो फिर तैयार हो जाइए एक बार फिर से खुशियों के त्योहार होली को मनाने के लिए, लेकिन इस बार आपको थोड़ी सावधानी के साथ रंग खेलने की जरूरत है, फिर चाहे वह पानी हो, लकड़ी को जलाना या रंगों का इस्तेमाल करना। ऐसे में अगर आप भविष्य और आने वाली पीढ़ियों के बारे में सोचते हैं।

रंगों में मिले रसायन से खुद को बचाना

रंगों में मिले रसायन से खुद को बचाना चाहते हैं तो तो सूखे रंगों से आप होली खेल सकते हैं जिसे छुड़ाना भी काफी आसान होता है और पानी की बर्बादी भी नहीं होती है, आप आराम से घर में बैठकर अपने परिवार के साथ पकवानों का लुत्फ उठा सकते हैं। लेकिन अगर आप सोचते हैं कि आप कहां से गुझियां , फिरनी, ठंड़ई या अन्य पकवानों को ऑर्डर करें तो हम आपकी मदद कर सकते हैं, इसमें हम आपके पैसों के खर्च को भी बचा सकते हैं। क्लिक करें यहां

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