एक साथ दो कंपनियों में कर रहे थे काम, विप्रो ने 300 कर्मचारियों को नौकरी से निकाला
नई दिल्ली, 22 सितंबर। विप्रो कंपनी में बड़ी संख्या में कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया है। बुधवार को कंपनी के एग्जेक्युटिव चेयरैन रिशद प्रेमजी ने कहा कि 300 कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया गया है क्योंकि वह हमारी कंपनी में काम करने के साथ हमारी प्रतिस्पर्धा कंपनी के लिए भी साथ-साथ काम कर रहे थे। आईमा के एक कार्यक्रम में बोलते हुए प्रेमजी ने कहा कि वह मूनलाइटिंग को लेकर दिए गए अपने पिछले बयान पर कायम हैं। बता दें कि उन्होंने कहा था कि कर्मचारियों द्वारा मूनलाइटिंग टेक इंडस्ट्री में धोखा है। कर्मचारियों ने अखंड़ता के उल्लंघन का काम किया है और यह धोखा है, जिसकी वजह से उन्हें कंपनी से बाहर किया गया है।

बता दें कि मूनलाइटिंग का अर्थ होता है कि आप किसी कंपनी में काम करने के साथ दूसरी कंपनी के साथ मिलकर भी काम करते हैं। कोरोना महामारी के चलते जिस तरह से लोग घर से काम कर रहे हैं उसकी वजह से यह परंपरा देखने को मिली है, जोकि आईटी इंडस्ट्री के लिए बड़ी चिंता है। टेक कंपनियों को इस बात की चिंता है कि इससे कर्मचारी के हितों में टकराव हो सकता है, आंकड़ों के साथ धोखाधड़ी हो सकती है, कंपनी की बौद्धिक संपत्ति का गलत इस्तेमाल हो सकता है।
प्रेमजी ने कहा कि मूनलाइटिंग की परिभाषा अपने आप में ही यह परिभाषित करती है कि आप चुपके से कोई दूसरा काम कर रहे हैं। पारदर्शिता को ध्यान में रखते हुए कर्मचारी खुद से इस बात की जानकारी दे सकते हैं कि वह छुट्टियों में दूसरे काम करते हैं, दूसरे ब्रांड के साथ काम करते हैं। कर्मचारी खुद यह तय कर सकते हैं कि क्या उनके हित में है और क्या नहीं। Xpheno के को-फाउंडर कमल करनाथ ने बताया कि कर्मचारियों के करियर में यह काला धब्बा होगा, लेकिन उनके व्यक्तिगत करियर में इसका कोई बड़ा नुकसान नहीं होगा। अगर सिबिल जैसी कोई रेटिंग नहीं होगी तो इस तरह की कार्रवाई के दूरगामी प्रभाव नहीं होंगे। जिस तरह से बड़ी संख्या में कर्मचारियों की मांग है उसके चलते इस तरह के एक्शन का कर्मचारी पर कोई खास असर नहीं होगा। हालांकि विप्रो की ओर से यह स्पष्ट नहीं है कि क्या इन कर्मचारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी और कैसे कंपनी को यह पता चला कि ये कर्मचारी दूसरी कंपनी के लिए काम कर रहे थे।












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