बुलंदशहर में बेटी पैदा होने पर महिला को दिया तीन तलाक, दहेज़ के लिए रोज करते थे प्रताड़ित
विश्व में जहां तक महिलाओं के खिलाफ अपराध का सवाल है, यह केवल कुछ लोगों द्वारा की गई हिंसा का कार्य नहीं है, बल्कि पिछले कई हज़ार साल पुराने अराजकवादी सामंती मानसिकता की उपज है और आधुनिक उपभोक्तावादी संस्कृति से फल-फूल रही है। फिर चाहे वो भ्रूण हत्या, तीन तलाक हो या दहेज़ के लिए मार दी गई लड़की हो, ऐसे अपराध हर जगह, हर वक्त अंजाम दिए जाते हैं। लेकिन उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से एक ऐसा मामला सामना आया है जिसमे एक महिला को लड़की पैदा होने पर दहेज़ के लिए प्रताड़ित भी किया गया और बाद में तीन तलाक देकर घर से बहार भी निकाल दिया गया।

बेटी पैदा होने पर दिया तीन तलाक
दरअसल, पूरा मामला उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर अंतर्गत नर्सेना थाना क्षेत्र का है। पीड़िता ने आरोप लगाते हुए बताया कि उसका पति और सास ससुर दहेज की खातिर उसके साथ मारपीट करते हैं। उसने यह भी कहा कि वह पिछले काफी समय से अपने ससुरालियों से परेशान है और कई बार अपने पति को समझाने की कोशिश भी की लेकिन दिन-ब-दिन मारपीट और प्रताड़ना बढ़ती जा रही थी। इसी बीच मैंने एक पुत्री को जन्म दिया और सोचा की अब सबकुछ ठीक हो जाएगा। लेकिन हुआ बिलकुल इसके विपरीत, उन्होंने यह कहते हुए मुझे तीन तलाक दे दिया कि अब इसका दहेज़ कौन देगा और मुझे जबरदस्ती घर से भी बहार निकाल दिया। पीड़िता ने इसकी शिकायत नर्सेना थाने में दे दी है।
थाना प्रभारी संजेश कुमार ने बताया कि तहरीर के आधार पर मामले की जांच की जा रही है, आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और तहरीर के आधार पर पुलिस हर बिंदु पर जांच कर रही है।

क्या है कानून ?
पहले तीन तलाक के तहत कोई पति अपनी पत्नी को तीन बार तलाक बोल कर छोड़ देता था। लेकिन अब यह गैरकानूनी है। तीन तलाक कानून के अंतर्गत अगर कोई पति अपनी पत्नी को तीन बार तलाक बोल कर छोड़ देता है तो उसे कानूनन तीन साल की सजा हो सकती है और पुलिस बिना वारंट के गिरफ्तार कर सकती है।
वहीं दहेज निषेध अधिनियम, 1961 के अनुसार दहेज लेने, देने या इसके लेन-देन में सहयोग करने पर 5 साल की कैद और 15,000 रुपए के जुर्माने का प्रावधान है। दहेज के लिए उत्पीड़न करने पर भारतीय दंड संहिता की धारा 498-ए जो कि पति और उसके रिश्तेदारों द्वारा सम्पत्ति अथवा कीमती वस्तुओं के लिए अवैधानिक मांग के मामले से संबंधित है, के अन्तर्गत 3 साल की कैद और जुर्माना हो सकता है। धारा 406 के अन्तर्गत लड़की के पति और ससुराल वालों के लिए 3 साल की कैद अथवा जुर्माना या दोनों, यदि वे लड़की के स्त्रीधन को उसे सौंपने से मना करते हैं।

दहेज़, भ्रूण हत्या और तीन तलाक के कारण
आज़ादी के लगभग 70 सालो के बाद भी आज भी हमारे देश में महिलाओ या बच्चियो की स्थिति सही नहीं है। अभी भी लड़कियों को बोझ समझा जाता है और इसको वो समानता नहीं दी जाती जो लड़को को दी जाती है। बेटे की इच्छा परिवार नियोजन के छोटे परिवार की संकल्पना के साथ जुडती है और दहेज़ की प्रथा ने ऐसी स्थिति को जन्म दिया है जहाँ बेटी का जन्म किसी भी कीमत पर रोका जाता है। लोगों का मानना है कि लड़के परिवार के वंश को जारी रखते हैं जबकि वो ये बेहद आसान सी बात नहीं समझते कि दुनिया में लड़कियाँ ही शिशु को जन्म दे सकती हैं, लड़के नहीं।
कई लोगों की सोंच होती है कि पुत्र आय का मुख्य स्त्रोत होता है जबकि लड़कियां केवल उपभोक्ता के रुप में होती हैं। समाज में ये गलतफहमी है कि लड़के अपने अभिवावक की सेवा करते हैं जबकि लड़कियाँ पराया धन होती है। इसके इलावा दहेज़ व्यवस्था की पुरानी प्रथा भारत में अभिवावकों के सामने एक बड़ी चुनौती है जो लड़कियां पैदा होने से बचने का मुख्य कारण है। इसीलिए आए दिन आज भी ऐसे कई मामले दुर्भाग्यवश हमारे सामने आते रहते हैं।












Click it and Unblock the Notifications