गूगल सीईओ सुंदर पिचाई ने बताया, कौन सी दो चीज़ें भविष्य में लाएंगी क्रांति
गूगल के प्रमुख सुंदर पिचाई ने चेतावनी दी है कि दुनियाभर के कई देशों में इंटरनेट की स्वतंत्रता पर हमले हो रहे हैं.
उनका कहना है कि कई देश सूचना के प्रवाह को रोक रहे हैं और स्वतंत्रता के मॉडल को अक्सर हल्के में लिया जाता है.
बीबीसी को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने प्राइवेसी, डेटा और टैक्स से जुड़े विवादों पर भी बात की.
उन्होंने कहा कि आर्टिफ़िशियल इंटेलीजेंस से होने वाले बदलाव आग, बिजली या इंटरनेट से भी ज़्यादा प्रभावी होंगे.
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चीन के इंटरनेट मॉडल पर राय
पिचाई से जब पूछा गया कि इंटरनेट का चीनी मॉडल - जिसमें सरकार के हाथ में बहुत ताक़त है और कड़ी निगरानी रखी जाती है, कितना सही है, तो पिचाई ने बिना चीन का उल्लेख करते हुए कहा कि स्वतंत्र और मुक्त इंटरनेट पर "हमला किया जा रहा है."
हालांकि उन्होंने इसके बाद कहा, "हमारे प्रमुख उत्पादों और सेवाओं में से कुछ भी चीन में उपलब्ध नहीं हैं."
'दो चीज़ों से आएगी क्रांति'
पिचाई के अनुसार, अगले 25 सालों में दो चीज़ें क्रांति लेकर आएँगी, वो हैं, आर्टिफ़िशियल इंटेलीजेंस और क्वॉन्टम कंप्यूटिंग.
आर्टिफ़िशियल इंटेलीजेंस पर बात करते हुए उन्होंने कहा, "मैं इसे मानवता की बनाई जाने वाली सबसे बेहतरीन तकनीक के रूप में देखता हूँ."
"आप आग, बिजली या इंटरनेट के बारे में अभी जैसा सोचते हैं, ये वैसा ही होने वाला है. मुझे लगता है उनसे भी बेहतर"
आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस सिस्टम मनुष्यों की तरह काम काम करने के लिए बनाया जाता है, ख़ासतौर पर किसी विशेष प्रकार की समस्याओं को हल करने के लिए. अभी भी कई ऐसे सिस्टम काम कर रहे हैं.
क्वॉन्टम कंप्यूटिंग एक पूरी तरह से अलग कॉन्सेप्ट है. साधारण कंप्यूटिंग बाइनरी पर आधारित हैं: 0 या 1. इनके बीच कुछ नहीं होता. इन्हें बिट्स कहा जाता है.
क्वॉन्टम कंप्यूटर क्यूबिट्स पर काम करते हैं. इससे एक पदार्थ को एक ही समय में कई स्टेट में होने की संभावना बनती है. इसे समझना मुश्किल है लेकिन ये दुनिया में बड़ा बदलाव ला सकते हैं.
हालांकि पिचाई समेत तकनीक से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि ये सभी जगह काम नहीं आएँगे.
टैक्स संबंधित मामलों पर क्या बोले पिचाई?
टैक्स से संबंधित मामलों में गूगल की प्रतिक्रिया रक्षात्मक रही है.
कई वर्षों से, कंपनी ने अपने टैक्स दायित्वों को कानूनी रूप से कम करने के लिए एकाउंटेंट और वकीलों को भारी रकम का भुगतान किया है.
उदाहरण के लिए साल 2017 में, गूगल ने अपनी "डबल आयरिश, डच सैंडविच" नामक रणनीति के तहत, एक डच शेल कंपनी के माध्यम से 20 बिलियन डॉलर से अधिक रकम बरमूडा में भेजी थी.
पिचाई ने कहा कि गूगल अब इस स्कीम का इस्तेमाल नहीं करता और कंपनी दुनिया के सबसे बड़े करदाताओं में से एक है, वो हर देश में टैक्स क़ानूनों का पालन करती है, जहाँ भी वो मौजूद है.
उन्होंने स्पष्ट किया कि वे "कॉर्पोरेट ग्लोबल मिनिमम टैक्स पर हो रही बातचीत से उत्साहित हैं."
इसके अलावा उन्होंने कहा कि कंपनी ने पिछले एक दशक में आमदनी का 20 प्रतिशत तक टैक्स चुकाया है, जो कई कंपनियों की तुलना में अधिक है. इसमें से ज़्यादातर टैक्स अमेरिका में दिया जाता है.
अन्य बड़े मुद्दों को लेकर भी गूगल जाँच का सामना कर रहा है जैसा डेटा और प्राइवेसी और सर्च के क्षेत्र में एकाधिकार.
एकाधिकार पर बात करते हुए पिचाई यह तर्क देते हैं कि गूगल एक मुफ़्त उत्पाद है, और यूज़र्स आसानी से कहीं और जा सकते हैं.
ऐसा ही तर्क फ़ेसबुक भी पहले दे चुका है.
'भारत मेरे अंदर बसा है'
इंटरव्यू में उनसे पूछा गया कि वो अमेरिकी हैं या भारतीय, इसके जवाब में उन्होंने कहा, "मैं अमेरिका का नागरिक हूँ, लेकिन भारत मेरे अंदर बसा है और जो मैं हूँ, उसका एक अहम हिस्सा है."
सुंदर पिचाई का जन्म 1972 में भारत के तमिलनाडु राज्य में हुआ था और उनके पिता पेशे से इलेक्ट्रिकल इंजीनियर थे जो एक ब्रितानी कंपनी जीईसी में काम करते थे. जबकि सुंदर की माँ स्टेनोग्राफर थीं.
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स्कूली शिक्षा ख़त्म करने के बाद सुंदर पिचाई को आईआईटी खड़गपुर में दाखिला मिला, जहाँ उन्होंने मेटालर्जी में इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की. अमेरिका के स्टैनफ़र्ड विश्विद्यालय से इंजीनियरिंग में एमएस करने के बाद पिचाई ने अमेरिका के सबसे प्रतिष्ठित बिज़नेस स्कूलों में से एक व्हार्टन से एमबीए भी किया.
2004 में सुंदर पिचाई गूगल से जुड़े. 2015 में, गूगल अल्फ़ाबेट कंपनी का हिस्सा बना और पिचाई उसके सीईओ बने.
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